नयी दिल्ली: मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर विरोध कर रहे आदिवासी और प्रभावित परिवारों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुलाकात की। परियोजना से प्रभावित लोगों ने उनके सामने विस्थापन, जमीन और आजीविका से जुड़े मुद्दे रखे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परियोजना के कारण उनकी वर्षों पुरानी जमीन और जीवन-व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित बर्बरता का मुद्दा भी राहुल गांधी के सामने उठाया।
केन-बेतवा लिंक परियोजना केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य केन नदी के पानी को बेतवा नदी तक पहुंचाकर बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। परियोजना का बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से जुड़ा है। सरकार की ओर से इसे क्षेत्र के लिए जल संकट दूर करने और कृषि को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना बताया जाता है। दूसरी ओर, परियोजना से प्रभावित परिवार लंबे समय से पुनर्वास, मुआवजे और विस्थापन से जुड़े सवाल उठा रहे हैं।
राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान प्रभावित आदिवासियों और ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं विस्तार से बताईं। उनका कहना था कि विकास परियोजना के नाम पर यदि लोगों को उनकी जमीन और पारंपरिक आजीविका से दूर किया जाता है तो उनके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने जमीन के बदले उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
प्रभावित लोगों ने आंदोलन के दौरान प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि अपने अधिकारों और जमीन को लेकर आवाज उठाने वाले लोगों के साथ सख्ती की गई। ग्रामीणों ने राहुल गांधी को बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने मांग की कि आंदोलनकारियों की बात सुनी जाए और परियोजना से जुड़े फैसलों में प्रभावित समुदायों की सहमति और हितों को प्राथमिकता दी जाए।
राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों की बातें सुनीं और उनकी लड़ाई में समर्थन देने का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की जमीन, घर और आजीविका किसी परियोजना से प्रभावित हो रही है, उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रभावित आदिवासियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए उनके साथ खड़े रहने की बात कही।
केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासी भाई-बहनों की समस्याएं, मांगें, संघर्ष और आपबीती – उनकी जुबानी।
सालों से सिर्फ़ अपने अधिकारों के लिए अन्याय और अत्याचार सह रहे ये बुंदेलखंड निवासी सम्मान और समर्थन के हक़दार हैं।
आदिवासी भाई-बहनों की इस लड़ाई में, मैं और… pic.twitter.com/graNKRt4IE
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 19, 2026
केन-बेतवा परियोजना को लेकर पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव भी लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। परियोजना के समर्थकों का तर्क है कि इससे बुंदेलखंड में सिंचाई का विस्तार होगा, जल संकट कम होगा और कृषि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। वहीं विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि परियोजना के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो सकते हैं और वन तथा स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी असर पड़ सकता है।
पन्ना और छतरपुर में राहुल गांधी की प्रभावित लोगों से मुलाकात ऐसे समय हुई है जब परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध जारी है। कांग्रेस इस मुद्दे को विस्थापन, आदिवासी अधिकार और पर्यावरण से जोड़कर सरकार के सामने उठा रही है। पार्टी का कहना है कि विकास योजनाओं का लाभ तभी सार्थक होगा जब उससे प्रभावित लोगों के अधिकारों की भी रक्षा की जाए।
स्थानीय लोगों के लिए यह मुलाकात अपनी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का अवसर भी बनी। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि उनकी आवाज व्यापक स्तर पर पहुंचेगी और सरकार पुनर्वास तथा मुआवजे से जुड़े मामलों पर गंभीरता से विचार करेगी। केन-बेतवा परियोजना बुंदेलखंड के लिए आर्थिक और जल प्रबंधन की दृष्टि से बड़ी योजना है, लेकिन इसके साथ जुड़े सामाजिक और पर्यावरणीय सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। राहुल गांधी की प्रभावित आदिवासियों से मुलाकात ने इन मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।