कोच्चि। केरल हाई कोर्ट ने राज्य में बिना वैध प्रैक्टिस सर्टिफिकेट (COP) के वकालत करने वाले अधिवक्ताओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केरल बार काउंसिल को 2010 से 2021 के बीच नामांकित उन 1,157 अधिवक्ताओं के नाम सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है, जिन्होंने ऑल इंडिया बार परीक्षा (AIBE) पास नहीं की है और बिना वैध प्रैक्टिस सर्टिफिकेट के प्रैक्टिस करते पाए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति वी.एम. श्याम कुमार की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि इन अधिवक्ताओं की पूरी सूची केरल बार काउंसिल और केरल हाई कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाए।
हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि सूची में शामिल किसी अधिवक्ता ने किसी मामले में वकालतनामा दाखिल किया है, तो संबंधित अदालत का रजिस्ट्रार उस मामले की फाइल में उचित प्रविष्टि करे।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामले की सुनवाई करने वाली बेंच को संबंधित अधिवक्ता की प्रैक्टिस की वैध स्थिति की जानकारी रहे।
अदालत के निर्देश के मुताबिक, जिन अधिवक्ताओं के पास वैध Certificate of Practice (COP) नहीं है और जिन्होंने AIBE पास नहीं किया है, उनकी स्थिति को रिकॉर्ड में स्पष्ट किया जाएगा।
कोर्ट ने संबंधित संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि ऐसे अधिवक्ताओं द्वारा दाखिल किए गए मामलों में उनकी स्थिति अदालत के संज्ञान में रहे।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सूची में शामिल अधिवक्ताओं के लिए सुधार का रास्ता खुला रहेगा। यदि कोई अधिवक्ता बाद में वैध प्रैक्टिस सर्टिफिकेट हासिल कर लेता है, तो उसका नाम सूची से हटाया जा सकता है।
इसके लिए संबंधित अधिवक्ता को प्रैक्टिस सर्टिफिकेट की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करनी होगी। प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता की पुष्टि होने के बाद सूची में आवश्यक बदलाव किया जा सकेगा।
अदालत के आदेश के बाद केरल बार काउंसिल को 1,157 अधिवक्ताओं की सूची तैयार कर उसे सार्वजनिक करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सूची को केरल बार काउंसिल के साथ-साथ केरल हाई कोर्ट की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस कदम से अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं की वैधता और पेशेवर स्थिति को लेकर पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
ऑल इंडिया बार परीक्षा (AIBE) बार काउंसिल ऑफ इंडिया की परीक्षा है, जिसे कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिवक्ताओं के लिए पेशेवर प्रैक्टिस से जुड़ी योग्यता के रूप में लागू किया गया है। वहीं, Certificate of Practice (COP) अधिवक्ता के वैध रूप से प्रैक्टिस करने की स्थिति से संबंधित प्रमाणपत्र है।
केरल हाई कोर्ट के इस आदेश से उन अधिवक्ताओं पर निगरानी बढ़ेगी, जो आवश्यक पेशेवर औपचारिकताओं को पूरा किए बिना अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
कोर्ट का संदेश स्पष्ट है कि अदालतों में वकालत करने वाले प्रत्येक अधिवक्ता की पेशेवर पात्रता और वैध प्रैक्टिस स्थिति सुनिश्चित होना जरूरी है।