नई दिल्ली। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा के बाद जारी होने वाली उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए ली जाने वाली फीस को लेकर सफाई दी है। एनटीए ने कहा है कि उत्तर कुंजी में किसी सवाल का जवाब गलत लगता है, तो उम्मीदवार उस पर आपत्ति दर्ज करा सकता है। इसके लिए प्रत्येक सवाल पर 200 रुपये की फीस निर्धारित है।
एनटीए के मुताबिक, आपत्ति दर्ज कराने के लिए फीस लेने का उद्देश्य छात्रों से पैसा कमाना नहीं, बल्कि बेवजह और गलत आपत्तियों को रोकना है। एजेंसी ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार की आपत्ति सही पाई जाती है, तो उसकी जमा की गई फीस वापस कर दी जाएगी। साथ ही, उस गलती को सुधारने का लाभ अन्य सभी उम्मीदवारों को भी मिलेगा और इससे परिणाम अधिक सही तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
एनटीए ने 16 अगस्त को यूजीसी-नेट के 84 विषयों की उत्तर कुंजी जारी की थी। हालांकि, इसी दिन अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षाएं रद्द करने का फैसला भी लिया गया था।
एनटीए ने बताया कि इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में वर्तनी और छपाई से जुड़ी गलतियां सामने आई थीं। इसके अलावा प्रश्नपत्रों में पहले पूछे जा चुके कुछ सवाल भी दोहराए गए थे। उत्तर कुंजी जारी होने के बाद छात्रों ने इन गड़बड़ियों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
एजेंसी के अनुसार, इन खामियों को केवल कुछ सवाल हटाकर ठीक करना संभव नहीं था। इसलिए अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र की परीक्षाएं दोबारा आयोजित कराने का फैसला लिया गया।
एनटीए ने इन तीनों विषयों की दोबारा परीक्षा की तारीख भी घोषित कर दी है। अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षाएं 9 और 10 सितंबर को आयोजित की जाएंगी।
यूजीसी-नेट परीक्षा का आयोजन इस साल 22 से 30 जून के बीच किया गया था। अब उत्तर कुंजी को लेकर एनटीए की सफाई के बाद छात्रों को उम्मीद है कि सही आपत्तियों को स्वीकार कर परिणाम में जरूरी सुधार किया जाएगा।
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज कराने की फीस का उद्देश्य राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि केवल गंभीर और तथ्यात्मक आपत्तियों को सामने लाना है। सही आपत्ति मिलने पर संबंधित उम्मीदवार को फीस वापस करने के साथ-साथ उसका लाभ अन्य अभ्यर्थियों को भी दिया जाएगा।