राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर मचा बवाल, BJP का पलटवार

पुणे: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार, 22 अगस्त को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और सामाजिक अधिकारों को लेकर बड़ा बयान दिया। छात्राओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मनुस्मृति का संदर्भ देते हुए कहा कि महिलाओं को दबाने वाली मानसिकता […]

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  • August 23, 2026 11:16 pm IST, Published 14 seconds ago

पुणे: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार, 22 अगस्त को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और सामाजिक अधिकारों को लेकर बड़ा बयान दिया। छात्राओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मनुस्मृति का संदर्भ देते हुए कहा कि महिलाओं को दबाने वाली मानसिकता के खिलाफ लड़ाई जरूरी है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया और भाजपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की पहचान और स्वतंत्रता के मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी महिला का पिता, भाई, पति या बेटे के साथ पारिवारिक संबंध हो सकता है, लेकिन उसकी पहचान केवल इन रिश्तों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक महिलाओं को अपने जीवन, करियर और भविष्य से जुड़े फैसले स्वयं लेने का अधिकार होना चाहिए।

मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मनुस्मृति में महिलाओं की स्थिति से जुड़े विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें महिला को जीवन के अलग-अलग चरणों में पिता, पति और बेटे के अधीन रहने की बात कही गई है। उन्होंने ऐसी सोच को महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया और इसे शर्मनाक करार दिया।

उन्होंने कहा कि भारत की महिलाओं को स्वतंत्र होकर अपने लिए खड़ा होना चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि किसी महिला का अपने परिवार के सदस्यों से रिश्ता होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि महिला किसी की संपत्ति या अधीनस्थ हो।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में महिलाओं को नियंत्रित करने वाली सामाजिक मानसिकता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ नियंत्रण कई स्तरों पर दिखाई देता है और समाज को इस सोच में बदलाव लाने की जरूरत है।

महिलाएं भारत की सबसे बड़ी ताकत’

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं को देश की ताकत और भविष्य बताया। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत देश की करोड़ों महिलाएं हैं और हर महिला की अपनी अलग पहचान, सपना और भविष्य है। कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं को केवल बेटी, पत्नी या मां के रूप में देखने की मानसिकता पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि महिलाएं प्रोफेशनल, खिलाड़ी, उद्यमी, नेता और विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली स्वतंत्र व्यक्तित्व वाली नागरिक हैं। इसलिए उनकी पहचान केवल पारिवारिक रिश्तों से तय नहीं की जानी चाहिए।

राहुल गांधी ने महिलाओं के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, आवाजाही, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों को महिलाओं की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। उनके अनुसार कई मामलों में लड़कियों के लिए करियर और जीवन से जुड़े विकल्पों पर सामाजिक दबाव डाला जाता है।

BJP ने राहुल गांधी पर किया पलटवार

राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी को मनुस्मृति पढ़ने और समझने की नसीहत देते हुए मनुस्मृति के एक प्रसिद्ध श्लोक का उल्लेख किया, जिसमें महिलाओं के सम्मान की बात कही गई है।

निशिकांत दुबे ने अपने बयान में राहुल गांधी के ज्ञान और मनुस्मृति की उनकी व्याख्या पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं के सम्मान से संबंधित श्लोक भी मौजूद हैं। इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में राहुल गांधी के बयान को लेकर बहस और तेज हो गई।

इस पूरे विवाद में कांग्रेस और भाजपा की ओर से मनुस्मृति की व्याख्या को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण सामने आए हैं। एक ओर राहुल गांधी महिलाओं की स्वतंत्रता और समान अधिकारों के मुद्दे को केंद्र में रख रहे हैं, वहीं भाजपा नेता उनके मनुस्मृति संबंधी दावे पर सवाल उठा रहे हैं।

पिंजरे में बंद नहीं रखना चाहते’: राहुल गांधी

पुणे के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की आजादी को ‘पिंजरा तोड़ने’ की सोच से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसा भारत नहीं होना चाहिए जहां लड़कियों और महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित किया जाए। उन्होंने महिलाओं से अपनी आवाज उठाने, अपने अधिकारों के लिए खड़े होने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की अपील की।

राहुल गांधी ने पितृसत्तात्मक व्यवस्था को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को दबाने, डराने या नियंत्रित करने वाली सोच को बदलना जरूरी है। उन्होंने ‘Smash the Patriarchy’ का नारा भी दिया और महिलाओं से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।

छात्राओं ने भी उठाए अपने मुद्दे

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को केवल राजनीतिक भाषण तक सीमित नहीं रखा गया। कार्यक्रम में कई छात्राओं और महिलाओं ने मंच पर आकर अपने अनुभव और समस्याएं साझा कीं। रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षा, हॉस्टल, पेपर लीक और महिलाओं की सामाजिक स्थिति जैसे मुद्दे भी चर्चा में आए। भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने भी मंच से महिलाओं की आवाज और लोकतांत्रिक सवालों से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी।

कार्यक्रम का मुख्य फोकस युवतियों और महिलाओं की आवाज को सामने लाना रहा। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने चाहिए और समाज में अपनी अलग पहचान बनाने का अधिकार होना चाहिए।

बयान से फिर गरमाई राजनीतिक बहस

राहुल गांधी के इस बयान ने मनुस्मृति, महिला स्वतंत्रता और पितृसत्ता को लेकर पुरानी राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। कांग्रेस जहां राहुल गांधी के बयान को महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता की लड़ाई से जोड़ रही है, वहीं भाजपा उनके मनुस्मृति संबंधी दावों पर सवाल उठा रही है।

फिलहाल पुणे के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी के बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सोशल मीडिया के साथ-साथ राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा का विषय बन सकता है।

नोट: इस खबर में राहुल गांधी और भाजपा नेताओं के बयानों को उनके सार्वजनिक रूप से सामने आए वक्तव्यों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। मनुस्मृति की व्याख्या को लेकर विभिन्न विद्वानों और राजनीतिक पक्षों में अलग-अलग मत पाए जाते हैं।

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