नागपुरः महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने युवाओं और खासकर Gen-Z के बीच बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता जताई है। युवाओं के साथ संवाद के दौरान उन्होंने संकेत दिया कि डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर संतुलन बनाना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्क्रीन का इस्तेमाल आज की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसका समय और तरीका तय होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस मुद्दे पर विचार करने की जरूरत बताई और कहा कि स्क्रीन टाइम को कम करने की दिशा में कदम उठाने पड़ सकते हैं।
आज स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई, मनोरंजन, बातचीत और कामकाज के लिए इंटरनेट पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में लंबे समय तक मोबाइल या अन्य डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल युवाओं की दिनचर्या, पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से बच्चों और युवाओं के स्क्रीन टाइम को लेकर अभिभावकों और विशेषज्ञों के बीच भी लगातार चर्चा होती रही है।
फडणवीस ने हालांकि डिजिटल दुनिया के दूसरे पहलू को भी सामने रखा। उनका कहना है कि स्क्रीन का इस्तेमाल पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने युवाओं के लिए रोजगार, कारोबार और अपनी प्रतिभा दिखाने के नए रास्ते खोले हैं। आज बड़ी संख्या में युवा कंटेंट क्रिएशन, डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन शिक्षा और तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में अपना करियर बना रहे हैं। ऐसे में स्क्रीन से पूरी तरह दूरी बनाना व्यावहारिक समाधान नहीं माना जा सकता।
मुख्यमंत्री के बयान का मुख्य संदेश डिजिटल तकनीक के संतुलित इस्तेमाल से जुड़ा माना जा रहा है। उनका जोर इस बात पर है कि युवा तकनीक का उपयोग अपनी पढ़ाई, कौशल विकास और करियर के लिए करें, लेकिन इसके कारण उनका पूरा समय स्क्रीन पर ही न बीते। खासकर कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन के इस्तेमाल को लेकर अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
युवाओं से बातचीत के दौरान फडणवीस ने महाराष्ट्र में स्टार्टअप और नए कारोबार को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं के नए विचारों को आगे बढ़ाने के लिए फंड और इनक्यूबेशन सेंटर जैसी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य छोटे शहरों और अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं को भी अपने आइडिया को कारोबार में बदलने के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।
Screen Time को लेकर मुख्यमंत्री का बयान फिलहाल किसी नए कानून या निश्चित समय सीमा की घोषणा नहीं है। इसे डिजिटल जीवनशैली को लेकर सरकार की चिंता और भविष्य में संभावित नीतिगत चर्चा के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर यदि कोई नीति तैयार होती है, तो उसमें बच्चों की पढ़ाई, डिजिटल सुरक्षा, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनोरंजन और युवाओं के मानसिक एवं सामाजिक विकास जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है।
फिलहाल फडणवीस की बात का केंद्र यही है कि तकनीक से दूरी बनाने के बजाय उसका समझदारी और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया जाए। Gen-Z के दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट से पूरी तरह अलग होना मुश्किल है, लेकिन स्क्रीन और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन बनाना युवाओं के लिए अहम चुनौती बनता जा रहा है।