नासिक में बोरे में कुत्ते लेकर पहुंचे लोग, टेबल पर छोड़े

नासिक/निफाड: महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफाड में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन सामने आया है। आवारा कुत्तों से परेशान होने का दावा कर रहे कुछ स्थानीय लोग और युवा सेना के कार्यकर्ता कुत्तों को बोरियों में भरकर नगर पंचायत कार्यालय पहुंच गए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत […]

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  • September 17, 2026 4:43 pm IST, Published 1 hour ago

नासिक/निफाड: महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफाड में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन सामने आया है। आवारा कुत्तों से परेशान होने का दावा कर रहे कुछ स्थानीय लोग और युवा सेना के कार्यकर्ता कुत्तों को बोरियों में भरकर नगर पंचायत कार्यालय पहुंच गए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत के मुख्याधिकारी की टेबल पर ही कुत्तों को छोड़ दिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है।

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन का नेतृत्व युवा सेना के जिला प्रमुख विक्रम रंधावे ने किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निफाड शहर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय से आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है। उनका दावा है कि इस वजह से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आई हैं और इस समस्या को लेकर नगर पंचायत प्रशासन को कई बार शिकायतें और लिखित आवेदन दिए गए। उनके मुताबिक, शिकायतों के बावजूद समस्या के समाधान के लिए अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

बोरे में कुत्ते लेकर नगर पंचायत पहुंचे प्रदर्शनकारी

विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता कुछ आवारा कुत्तों को बोरियों में लेकर निफाड नगर पंचायत के मुख्याधिकारी धीरज भामरे के कार्यालय पहुंचे। कार्यालय के भीतर बोरियां खोली गईं और कुत्तों को अधिकारी की टेबल पर छोड़ दिया गया।

सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कार्यालय के भीतर कुत्तों को इधर-उधर जाते हुए देखा जा सकता है। इस दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसा माहौल भी दिखाई दिया। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में कर्मचारियों ने कुत्तों को कार्यालय से बाहर निकाला।

अधिकारी को नोटों की माला पहनाने की भी कोशिश

प्रदर्शन के दौरान केवल कुत्तों को कार्यालय लाने तक मामला सीमित नहीं रहा। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत के मुख्याधिकारी धीरज भामरे को नोटों की माला पहनाने की कोशिश भी की। इसके जरिए प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत के कामकाज और कथित लापरवाही पर विरोध जताया।

कुछ रिपोर्टों में कर्मचारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

आवारा कुत्तों की समस्या पर क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग?

प्रदर्शनकारियों ने निफाड शहर और आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। उनकी प्रमुख मांगों में आवारा कुत्तों को पकड़ने की व्यवस्था, नसबंदी अभियान और उनकी संख्या को नियंत्रित करने के लिए नियमानुसार उपाय करना शामिल बताया गया है।

युवा सेना नेता विक्रम रंधावे का कहना है कि समस्या को लेकर पहले भी प्रशासन के सामने शिकायतें रखी गई थीं। उनके अनुसार, बैठक और आश्वासन के बावजूद समस्या का समाधान जमीन पर दिखाई नहीं दिया, जिसके बाद प्रदर्शन का यह तरीका अपनाया गया। ये बातें प्रदर्शनकारियों के दावों के रूप में सामने आई हैं।

गणेशोत्सव के दौरान भी उठाया गया था मुद्दा

रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने गणेशोत्सव के दौरान भी आवारा कुत्तों की समस्या का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि सार्वजनिक आयोजनों और गणेश पंडालों के आसपास लोगों की आवाजाही के दौरान आवारा कुत्तों की मौजूदगी से नागरिकों को परेशानी होती है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों से संबंधित शिकायतों का व्यवस्थित तरीके से समाधान किया जाए और नागरिकों की सुरक्षा के साथ पशु कल्याण से जुड़े नियमों का भी पालन किया जाए।

प्रशासन ने कार्रवाई का भरोसा दिया

निफाड नगर पंचायत के मुख्याधिकारी धीरज भामरे की ओर से आवारा कुत्तों की समस्या पर जल्द उपाय किए जाने का भरोसा दिए जाने की जानकारी भी मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि, इस मामले में प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक कार्रवाई योजना या समयसीमा की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर आवारा कुत्तों की समस्या, नागरिक सुरक्षा और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी को चर्चा में ला दिया है। स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतों के समाधान के लिए नगर निकायों को क्षेत्रवार स्थिति का आकलन, शिकायतों का रिकॉर्ड और नियमानुसार पशु जन्म नियंत्रण संबंधी उपायों पर काम करना पड़ता है।

नागरिक सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों जरूरी

आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या को केवल कानून-व्यवस्था या सफाई का विषय मानकर नहीं देखा जा सकता। एक ओर नागरिकों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार और लागू नियमों का पालन भी आवश्यक है। इसलिए किसी भी कार्रवाई में दोनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

निफाड की घटना में प्रदर्शनकारियों ने जिस तरीके से अपनी शिकायत प्रशासन के सामने रखी, वह सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस घटना से जुड़े आरोपों और दावों को संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों के साथ ही अंतिम रूप से देखा जाना चाहिए।

फिलहाल, नासिक के निफाड में नगर पंचायत कार्यालय के भीतर कुत्ते छोड़ने का वीडियो सामने आने के बाद आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर लोगों की नजर बनी हुई है। प्रशासन की ओर से समस्या के समाधान के लिए उठाए जाने वाले अगले कदम इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।

संपादकीय नोट: खबर में प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों को आरोप/दावे के रूप में ही रखा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार घटना 17 सितंबर 2026 को निफाड, नासिक में हुई। �

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