703 करोड़ का बीमा, सोने-चांदी से सजे लालबागचा राजा

मुंबई में गणेशोत्सव की बात हो और लालबागचा राजा का नाम न आए, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। हालांकि, मायानगरी में आस्था और भव्यता का एक और बड़ा केंद्र है, जहां गणपति बप्पा के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। किंग्स सर्कल में स्थित GSB सेवा मंडल के […]

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  • September 14, 2026 11:38 am IST, Published 3 minutes ago
मुंबई में गणेशोत्सव की बात हो और लालबागचा राजा का नाम न आए, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। हालांकि, मायानगरी में आस्था और भव्यता का एक और बड़ा केंद्र है, जहां गणपति बप्पा के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। किंग्स सर्कल में स्थित GSB सेवा मंडल के महागणपति को उनकी भव्य सजावट और बड़े बीमा कवर के कारण ‘मुंबई का सबसे अमीर बप्पा’ कहा जाता है।

इस वर्ष GSB सेवा मंडल अपना 72वां गणेशोत्सव मना रहा है। यहां विराजमान गणपति की प्रतिमा को करीब 66 किलो सोने और 335 किलो चांदी से बने आभूषणों से सजाया गया है। बप्पा की यह भव्य सजावट दर्शन के लिए आने वाले लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। हालांकि, इन आभूषणों की खासियत सिर्फ उनकी कीमत नहीं है, बल्कि इनके पीछे श्रद्धालुओं की आस्था और वर्षों से चली आ रही परंपरा भी जुड़ी हुई है।

महागणपति की सुरक्षा और पूरे आयोजन को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष मंडल ने करीब 703.27 करोड़ रुपये का बीमा कवर लिया है। इस बीमा में केवल सोने-चांदी के आभूषण ही शामिल नहीं हैं, बल्कि आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं, स्वयंसेवकों और दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी कवर का हिस्सा बताई गई है। इतना बड़ा बीमा कवर इस गणेशोत्सव की व्यापकता को दर्शाता है। GSB सेवा मंडल का आयोजन पांच दिनों तक चलता है। इन दिनों मुंबई के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। खास बात यह है कि विदेशों में रहने वाले NRI सेवादार भी गणपति उत्सव में हिस्सा लेने के लिए मुंबई आते हैं। आयोजन की कई जिम्मेदारियां स्वयंसेवक संभालते हैं और सेवा की भावना इस उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

मंडल से जुड़ी परंपराओं में तुलादान का विशेष महत्व है। मान्यता और श्रद्धा के चलते कई भक्त अपनी मन्नत पूरी होने के बाद अपने वजन के बराबर सामग्री या धन का दान करते हैं। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन और प्रसाद की व्यवस्था भी की जाती है। इस तरह यहां गणपति उत्सव पूजा के साथ सेवा, दान और सामुदायिक भागीदारी का भी बड़ा अवसर बन जाता है।

बप्पा के श्रृंगार में शामिल 66 किलो सोना और 335 किलो चांदी किसी एक व्यक्ति के योगदान से जमा नहीं हुई। यह संग्रह कई दशकों में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और मन्नतों के जरिए तैयार हुआ है। बताया जाता है कि 1950 के दशक में उत्सव की शुरुआत के बाद भक्त सोने के सिक्के, चेन, कंगन, हार और अन्य आभूषण अर्पित करने लगे। समय के साथ यह परंपरा आगे बढ़ी और देश-विदेश में रहने वाले गौड़ सारस्वत समुदाय समेत अन्य श्रद्धालु भी इससे जुड़ते गए।

इसी वजह से बप्पा के आभूषणों को केवल बहुमूल्य धातुओं का संग्रह नहीं माना जाता। प्रत्येक आभूषण के साथ किसी न किसी श्रद्धालु की मन्नत, विश्वास या धन्यवाद की भावना जुड़ी होने की बात कही जाती है। सात दशकों से अधिक समय में यह परंपरा एक बड़े धार्मिक और सामाजिक आयोजन में बदल गई है। GSB सेवा मंडल का गणेशोत्सव मुंबई की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है। गणपति के दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ फिल्मी सितारे, नेता और उद्योग जगत से जुड़े लोग भी पहुंचते हैं। इस वर्ष अभिनेता मनोज जोशी ने भी बप्पा के दर्शन किए।

मंडल की गतिविधियां केवल गणेशोत्सव के पांच दिनों तक सीमित नहीं रहतीं। सालभर शिक्षा के क्षेत्र में सहायता, जरूरतमंद लोगों की मदद, स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं और अन्नदान जैसे सामाजिक कार्यों में भी मंडल की भागीदारी रहती है।

यही वजह है कि GSB सेवा मंडल के गणपति की पहचान केवल सोने-चांदी के भव्य श्रृंगार या करोड़ों के बीमा तक सीमित नहीं है। यहां धार्मिक आस्था के साथ सेवा, दान और सामाजिक जिम्मेदारी की परंपरा भी दिखाई देती है। मुंबई के गणेशोत्सव में यह आयोजन अपनी इसी अलग पहचान के कारण हर साल श्रद्धालुओं और लोगों का ध्यान खींचता है।

 

 

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