• होम
  • महाराष्ट्र
  • पुणे में 12 दिन की शराबबंदी पर हाईकोर्ट की सख्ती, फैसला बदला

पुणे में 12 दिन की शराबबंदी पर हाईकोर्ट की सख्ती, फैसला बदला

पुणे/मुंबई। महाराष्ट्र के पुणे जिले में गणेशोत्सव के दौरान शराब की बिक्री और सेवन पर लगाए गए 12 दिन के व्यापक प्रतिबंध को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या केवल यह मान लेना उचित है कि शराब का सेवन करने वाला हर व्यक्ति त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 12, 2026 6:51 am IST, Published 51 minutes ago

पुणे/मुंबई। महाराष्ट्र के पुणे जिले में गणेशोत्सव के दौरान शराब की बिक्री और सेवन पर लगाए गए 12 दिन के व्यापक प्रतिबंध को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या केवल यह मान लेना उचित है कि शराब का सेवन करने वाला हर व्यक्ति त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करेगा। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद पुणे जिला प्रशासन ने 12 दिन की प्रस्तावित शराबबंदी को वापस लेते हुए प्रतिबंध को केवल दो प्रमुख दिनों तक सीमित करने का निर्णय लिया है।

इस घटनाक्रम के बाद गणेशोत्सव के दौरान पुणे में शराब बिक्री को लेकर तस्वीर काफी बदल गई है। पहले पूरे गणेशोत्सव काल में व्यापक प्रतिबंध की योजना थी, लेकिन अदालत की आपत्ति के बाद अब 14 सितंबर और 25 सितंबर को ड्राय डे रखने की बात सामने आई है। 14 सितंबर गणेशोत्सव के शुरुआती प्रमुख दिन और 25 सितंबर अनंत चतुर्दशी यानी गणेश विसर्जन का दिन है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में नया आदेश जारी किया जाना है।

12 दिन की शराबबंदी पर क्यों उठे सवाल?

पुणे जिला प्रशासन की ओर से गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से शराब बिक्री पर लंबे समय तक प्रतिबंध लगाया गया था। प्रशासन का तर्क था कि गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकलते हैं, सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ रहती है और विभिन्न इलाकों में धार्मिक कार्यक्रम तथा जुलूस आयोजित होते हैं। ऐसे में शराब की बिक्री पर रोक लगाने से किसी संभावित अप्रिय स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस फैसले को लेकर शराब विक्रेताओं और संबंधित कारोबारी संगठनों की ओर से आपत्ति जताई गई। मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन के फैसले के पीछे मौजूद तर्क और उसके व्यापक प्रभाव पर सवाल उठाए।

हाईकोर्ट ने कहा- हर शराब पीने वाला कानून-व्यवस्था नहीं बिगाड़ता

मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान व्यापक शराबबंदी पर गंभीर आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि केवल शराब पीने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित व्यक्ति कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि लंबे समय तक अचानक शराब उपलब्ध नहीं होने से नियमित या शराब पर निर्भर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका भी जताई गई। हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि इतने लंबे समय तक प्रतिबंध लगाने का तर्कसंगत आधार क्या है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति शराब पीने के बाद कानून-व्यवस्था बिगाड़ता है या सार्वजनिक शांति भंग करता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। यानी कानून तोड़ने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई और सभी शराब उपभोक्ताओं पर एक साथ प्रतिबंध लगाने के बीच अंतर किया जाना चाहिए।

सिर्फ पुणे में ही प्रतिबंध क्यों?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल यह रहा कि गणेशोत्सव पूरे महाराष्ट्र में मनाया जाता है, फिर इतने लंबे समय का व्यापक शराब प्रतिबंध केवल पुणे जिले में क्यों लगाया गया।

अदालत ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा कि पुणे को अलग तरीके से क्यों देखा जा रहा है। न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी शहर या जिले के संबंध में ऐसा व्यापक आदेश जारी करने के लिए स्पष्ट और तार्किक आधार होना चाहिए।

पुणे महाराष्ट्र का प्रमुख सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र होने के साथ-साथ गणेशोत्सव की ऐतिहासिक परंपरा के लिए भी जाना जाता है। यहां गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक कार्यक्रमों और मंडलों में शामिल होते हैं। इसी वजह से प्रशासन के लिए भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है।

अब सिर्फ दो दिन रहेगा ड्राय डे

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद पुणे जिला प्रशासन ने 12 दिन की शराबबंदी वापस लेने का निर्णय लिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अब नया आदेश जारी करके केवल दो प्रमुख दिनों को ड्राय डे बनाया जाएगा। इनमें 14 सितंबर और 25 सितंबर शामिल हैं।

इस बदलाव का सीधा मतलब यह है कि गणेशोत्सव के बाकी दिनों में शराब की बिक्री पर पहले की तरह 12 दिन का व्यापक प्रतिबंध लागू नहीं रहेगा, हालांकि अन्य सामान्य कानूनी और प्रशासनिक नियम प्रभावी रहेंगे। अंतिम व्यवस्था नए प्रशासनिक आदेश में स्पष्ट की जाएगी।

कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

हाईकोर्ट ने शराब पीने पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय कानून-व्यवस्था से जुड़े वास्तविक मामलों पर कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। यदि कोई व्यक्ति शराब के नशे में सार्वजनिक स्थान पर उपद्रव करता है, लोगों को परेशान करता है या कानून तोड़ता है, तो पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

इससे प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि वह गणेशोत्सव के दौरान भीड़ और सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावी ढंग से संभाले, लेकिन इसके लिए सभी शराब उपभोक्ताओं को एक ही श्रेणी में न रखे।

कारोबारियों को भी बड़ी राहत

12 दिन की शराबबंदी वापस लिए जाने से शराब बिक्री से जुड़े लाइसेंसधारकों और कारोबारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय तक बिक्री बंद रहने से उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता था। इसी मुद्दे को लेकर संबंधित संगठनों ने न्यायालय का रुख किया था।

वहीं, प्रशासन के लिए गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण बनी रहेगी। बड़ी भीड़, विसर्जन जुलूस, यातायात दबाव और सार्वजनिक कार्यक्रमों के बीच पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने होंगे।

क्या है पूरे विवाद का सार?

पूरे मामले में विवाद सिर्फ शराब बिक्री पर रोक का नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रतिबंध की सीमा और उसके तर्कसंगत आधार का है। सरकार और प्रशासन का उद्देश्य सार्वजनिक शांति बनाए रखना है, जबकि हाईकोर्ट ने कहा है कि इस उद्देश्य के लिए ऐसा व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता जिसका स्पष्ट और तार्किक आधार सामने न हो।

फिलहाल 12 दिन की व्यापक शराबबंदी को वापस लेकर प्रतिबंध को दो प्रमुख दिनों तक सीमित करने की प्रक्रिया सामने आई है। इसलिए पुणे में रहने वाले नागरिकों, कारोबारियों और गणेशोत्सव में शामिल होने वाले लोगों के लिए नए आधिकारिक आदेश पर नजर रखना जरूरी होगा।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध न्यायिक और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। शराब बिक्री से संबंधित अंतिम स्थानीय नियमों के लिए पुणे जिला प्रशासन/राज्य आबकारी विभाग की नवीनतम अधिसूचना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Advertisement