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भारत का खजाना भर गया! विदेशी मुद्रा भंडार 785 अरब डॉलर पार

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के […]

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  • September 12, 2026 7:30 am IST, Published 56 minutes ago

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 44.90 अरब डॉलर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई और कुल भंडार बढ़कर 785.71 अरब डॉलर हो गया। यह देश के विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सर्वाधिक स्तर है।

इससे पहले 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भी भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 11.47 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी और यह 740.80 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। लगातार दूसरी बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को एक नए रिकॉर्ड पर पहुंचा दिया है।

एक हफ्ते में करीब 45 अरब डॉलर की छलांग

RBI के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली बात एक ही सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में हुई करीब 45 अरब डॉलर की बढ़ोतरी है। 4 सितंबर तक कुल रिजर्व 785.706 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो पिछले सप्ताह के 740.803 अरब डॉलर से करीब 44.903 अरब डॉलर अधिक है। यह अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी मानी जा रही है।

इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान Foreign Currency Assets (FCA) का रहा। सप्ताह के दौरान FCA में 47.498 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 648.168 अरब डॉलर हो गया। FCA भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी विदेशी मुद्राओं में रखी संपत्तियां भी शामिल होती हैं। डॉलर में इनके मूल्य में होने वाले बदलाव का असर भी FCA के आंकड़े पर पड़ता है।

सोने के भंडार में आई गिरावट

जहां विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में जोरदार बढ़ोतरी हुई, वहीं भारत के गोल्ड रिजर्व में इस सप्ताह कमी देखने को मिली। RBI के मुताबिक, सोने का भंडार 2.594 अरब डॉलर घटकर 113.816 अरब डॉलर रह गया।

हालांकि, एक साल पहले की तुलना में भारत का गोल्ड रिजर्व अभी भी करीब 23.517 अरब डॉलर अधिक है। वहीं मार्च के अंत की तुलना में इसमें करीब 1.580 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई है। इसका मतलब यह है कि कुल विदेशी मुद्रा भंडार की रिकॉर्ड छलांग में सोने की भूमिका बढ़ोतरी वाली नहीं रही, बल्कि मुख्य ताकत विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों से आई।

SDR में मामूली कमी, IMF रिजर्व पोजिशन बढ़ी

भारत के Special Drawing Rights (SDR) में भी इस सप्ताह मामूली गिरावट दर्ज की गई। SDR करीब 4 मिलियन डॉलर घटकर 18.806 अरब डॉलर रह गया। दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन 2 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.916 अरब डॉलर हो गई।

कुल मिलाकर इन आंकड़ों से साफ है कि विदेशी मुद्रा भंडार की रिकॉर्ड बढ़ोतरी का मुख्य आधार FCA रहा। गोल्ड और SDR में मामूली कमी के बावजूद कुल रिजर्व में लगभग 45 अरब डॉलर की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई।

आखिर इतनी तेजी से क्यों बढ़ा भारत का रिजर्व?

विदेशी मुद्रा भंडार में इस असाधारण उछाल के पीछे विदेशी मुद्रा के बड़े प्रवाह को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। जून 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार की ओर से डॉलर प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए कुछ उपाय किए गए थे। इनमें विदेशी उधारी और विदेशी मुद्रा जमा से जुड़े हेजिंग प्रावधान भी शामिल थे।

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, 5 जून से 31 अगस्त के बीच इन योजनाओं के तहत RBI को करीब 136.3 अरब डॉलर का प्रवाह मिला। इसमें Non-Resident Indian यानी NRI जमा का योगदान लगभग 127 अरब डॉलर रहा, जो अनुमान से काफी ज्यादा था।

इसी मजबूत डॉलर प्रवाह ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को लगातार ऊपर जाने में मदद की है। रिपोर्टों के मुताबिक, 4 सितंबर तक पहुंचने से पहले विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कई सप्ताह बढ़ चुका था और इस दौरान कुल बढ़ोतरी करीब 120 अरब डॉलर के आसपास रही।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है 785 अरब डॉलर का रिजर्व?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के कच्चे तेल, सोने और कई अन्य उत्पादों का आयात करता है। इन आयातों का भुगतान मुख्य रूप से डॉलर में किया जाता है। ऐसे में पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार देश को बाहरी झटकों से निपटने में मदद करता है।

अगर वैश्विक बाजार में अचानक अस्थिरता आती है, कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है या रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार RBI को बाजार में हस्तक्षेप करने की क्षमता देता है। इससे रुपये में अचानक और तेज गिरावट को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

इसी वजह से 785.71 अरब डॉलर का रिकॉर्ड रिजर्व भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे आयात भुगतान की क्षमता मजबूत होती है और वैश्विक आर्थिक संकट की स्थिति में देश को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।

लेकिन रिकॉर्ड रिजर्व की एक दूसरी तस्वीर भी है

हालांकि विदेशी मुद्रा भंडार में इतनी बड़ी बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है, लेकिन विशेषज्ञ इसके पीछे आने वाले डॉलर प्रवाह की प्रकृति पर भी नजर रखने की बात कर रहे हैं। Reuters के अनुसार, इन उपायों से आए कुछ विदेशी डॉलर प्रवाह भविष्य में RBI की देनदारी से जुड़े हो सकते हैं। यानी मौजूदा समय में रिजर्व बढ़ने से बाहरी सुरक्षा मजबूत होती है, लेकिन भविष्य में इन प्रवाहों से संबंधित दायित्वों को भी ध्यान में रखना होगा।

इसके अलावा बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने से घरेलू बैंकिंग सिस्टम में रुपये की तरलता भी बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक को मौद्रिक स्थिरता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त तरलता को प्रबंधित करना पड़ सकता है।

दुनिया में भारत की स्थिति भी हुई मजबूत

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.71 अरब डॉलर तक पहुंचने के साथ देश की वैश्विक स्थिति भी मजबूत हुई है। Indian Express के अनुसार, इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद भारत ने विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में रूस को पीछे छोड़कर दुनिया में चौथा स्थान हासिल किया है। चीन, जापान और स्विट्जरलैंड भारत से आगे हैं।

यानी एक सप्ताह में करीब 45 अरब डॉलर की यह छलांग केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि भारत की बाहरी वित्तीय क्षमता में आए बड़े बदलाव का संकेत भी है। हालांकि आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विदेशी पूंजी का प्रवाह कितना टिकाऊ रहता है और RBI रुपये, डॉलर की मांग तथा घरेलू तरलता के बीच किस तरह संतुलन बनाए रखता है।

निष्कर्ष: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में रिकॉर्ड 785.71 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। करीब 44.90 अरब डॉलर की साप्ताहिक बढ़ोतरी में FCA की सबसे बड़ी भूमिका रही। यह उपलब्धि भारत को बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा कवच देती है, जबकि आने वाले समय में इन डॉलर प्रवाहों की स्थिरता और उनके आर्थिक प्रभाव पर बाजार की नजर रहेगी।

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