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जमानत के बाद निकाला जुलूस, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को पेश करने का आदेश

नई दिल्ली: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद हत्या के आरोपी द्वारा कथित तौर पर निकाले गए ‘जीत के जुलूस’ और गवाहों को धमकाने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने हरियाणा पुलिस को आरोपी विशाल को गिरफ्तार कर अगली सुनवाई में अदालत के सामने […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • September 14, 2026 10:41 am IST, Published 23 seconds ago
नई दिल्ली: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद हत्या के आरोपी द्वारा कथित तौर पर निकाले गए ‘जीत के जुलूस’ और गवाहों को धमकाने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने हरियाणा पुलिस को आरोपी विशाल को गिरफ्तार कर अगली सुनवाई में अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने 8 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत के सामने बताया गया कि आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट पहले ही जारी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद उसे अभी तक गिरफ्तार करके अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद विशाल ने कथित रूप से जुलूस निकाला था। आरोप यह भी है कि इस दौरान उसने मामले से जुड़े गवाहों को धमकाने की कोशिश की। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को सरेंडर करने का निर्देश दिया

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अगस्त में जारी गैर-जमानती वारंट अब तक लागू नहीं कराया जा सका है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर अदालत में पेश नहीं किया है। हालांकि, पीठ ने फिलहाल इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं की कि वारंट की तामील अब तक क्यों नहीं हो सकी।

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के चरखी दादरी जिले के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह गैर-जमानती वारंट की तामील सुनिश्चित करें। अदालत ने कहा कि आरोपी को अगली तारीख पर उसके सामने पेश किया जाना चाहिए। इसके साथ ही रजिस्ट्री को आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर संबंधित पुलिस अधीक्षक तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला एक पुराने जमीन विवाद से जुड़ा है। घटना 27 अक्टूबर 2022 की बताई गई है। आरोप है कि उस दिन विशाल एक विवादित जमीन के प्लॉट पर टिन शेड लगाने का काम शुरू कर रहा था। इसी दौरान शिकायतकर्ता राजबाला के परिवार के लोगों के साथ उसका विवाद हो गया।

बताया गया है कि विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी दौरान विशाल ने कथित तौर पर लाठी और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में शिकायतकर्ता पक्ष के कई लोग घायल हुए थे। घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी और घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसी मामले में विशाल के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई।

मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 23 अप्रैल को विशाल को जमानत दे दी थी। जमानत के बाद कथित जुलूस और गवाहों को धमकाने के आरोप सामने आने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। शीर्ष अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान गैर-जमानती वारंट की तामील न होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब हरियाणा पुलिस के सामने आरोपी को वारंट के आधार पर गिरफ्तार कर निर्धारित तारीख पर शीर्ष अदालत में पेश करने की जिम्मेदारी है। अदालत ने फिलहाल वारंट की तामील में देरी के कारणों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अगली सुनवाई में पुलिस की कार्रवाई और आरोपी की पेशी पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

मामले में अदालत के निर्देश का केंद्र बिंदु आरोपी की गिरफ्तारी और उसकी समय पर पेशी है। साथ ही गवाहों को कथित धमकी दिए जाने के आरोप भी न्यायिक जांच के दायरे में हैं। अब सभी की नजर 21 सितंबर की सुनवाई पर रहेगी, जब सुप्रीम कोर्ट के सामने पुलिस की कार्रवाई की स्थिति रखी जाएगी।

 

 

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