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सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में 1,712 मामलों का निपटारा

‘समाधान समारोह’ 2026 पहल का समापन नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में ‘समाधान समारोह’ 2026 पहल के तहत आयोजित तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत का रविवार को समापन हो गया। इस दौरान कुल 1,712 मामलों का निपटारा या समाधान किया गया। लोक अदालत का आयोजन 21 से 23 अगस्त तक किया गया था। यह विशेष लोक […]

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  • August 25, 2026 5:26 am IST, Published 6 minutes ago

‘समाधान समारोह’ 2026 पहल का समापन

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में ‘समाधान समारोह’ 2026 पहल के तहत आयोजित तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत का रविवार को समापन हो गया। इस दौरान कुल 1,712 मामलों का निपटारा या समाधान किया गया। लोक अदालत का आयोजन 21 से 23 अगस्त तक किया गया था।

यह विशेष लोक अदालत ‘सुप्रीम कोर्ट एक्शन फॉर मीडिएटेड एडजुडिकेशन एंड डिस्प्यूट्स हार्मोनाइजेशन अक्रॉस नेशन’ (समाधान) पहल का हिस्सा थी। इस पहल की शुरुआत भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के मार्गदर्शन में की गई थी। इसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित ऐसे मामलों की पहचान करना था, जिनका समाधान पक्षकारों की आपसी सहमति और मध्यस्थता के जरिए किया जा सकता है।

3,285 मामले हुए सूचीबद्ध

विशेष लोक अदालत के तीन दिनों के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कुल 3,285 मामलों को सूचीबद्ध किया गया। इनमें से 1,664 मामलों का निपटारा या समाधान किया गया। इसके अलावा मध्यस्थता प्रक्रिया के माध्यम से 48 अन्य मामलों का समाधान हुआ।

इस तरह लोक अदालत के दौरान कुल 1,712 मामलों का निपटारा या समाधान किया गया। इससे बड़ी संख्या में लंबित मामलों को आपसी सहमति और वैकल्पिक विवाद समाधान के माध्यम से खत्म करने में मदद मिली।

21 अप्रैल से शुरू हुई थी प्रक्रिया

‘समाधान’ पहल की शुरुआत 21 अप्रैल 2026 को व्यवस्थित प्री-सेटलमेंट प्रक्रिया के साथ की गई थी। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों में से ऐसे मामलों की पहचान की गई, जिनमें पक्षकारों की सहमति से विवाद का समाधान संभव था।

इसके लिए संबंधित वादियों और उनके अधिवक्ताओं से पहले ही संपर्क किया गया और मामलों में समझौते की संभावनाओं का पता लगाया गया। इसके बाद उपयुक्त मामलों को विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ाया गया।

लंबित मामलों के समाधान पर जोर

सुप्रीम कोर्ट की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया पर लंबित मामलों के बोझ को कम करना और पक्षकारों को त्वरित एवं सहमति आधारित समाधान उपलब्ध कराना है। विशेष लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा होने को वैकल्पिक विवाद समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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