नई दिल्ली: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) ने मातृ स्वास्थ्य और सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में नई पहल शुरू की है। आयुष मंत्रालय के तहत काम करने वाले इस प्रमुख संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘गर्भिणी मित्र’ कोर्स शुरू किया है। छह महीने का यह ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम ऐसे प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर केंद्रित है, जो गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद की अवधि तक महिलाओं को स्वास्थ्य शिक्षा, जीवनशैली संबंधी सलाह और जरूरी सामुदायिक सहायता उपलब्ध करा सकें।
AIIA के अनुसार, पाठ्यक्रम का आधार आयुर्वेद में वर्णित मातृ एवं शिशु देखभाल की पारंपरिक अवधारणाएं हैं। इनमें ‘गर्भिणी परिचर्या’, यानी गर्भावस्था के दौरान देखभाल, ‘सूतिका परिचर्या’, यानी प्रसव के बाद मां की देखभाल और ‘गर्भधान विधि’, यानी गर्भधारण से पहले अपनाई जाने वाली देखभाल संबंधी अवधारणाएं शामिल हैं। इस तरह प्रशिक्षण में पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और व्यावहारिक कौशल के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।
यह कोर्स नई दिल्ली के सरिता विहार स्थित AIIA परिसर में संचालित किया जाएगा। प्रशिक्षण सोमवार से शुक्रवार तक दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। प्रत्येक बैच में अधिकतम 20 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि मातृ एवं नवजात देखभाल से जुड़े व्यावहारिक कौशल भी हासिल हों।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों के अनुसार पोषण और आहार संबंधी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ जीवनशैली में आवश्यक बदलाव, गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित योग, प्रसव के समय भावनात्मक सहयोग और नवजात शिशु की मालिश जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट प्रोटोकॉल की जानकारी भी पाठ्यक्रम का हिस्सा है।
स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संक्रमण नियंत्रण, व्यक्तिगत स्वच्छता, बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित प्रबंधन और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इससे प्रशिक्षुओं को मातृ स्वास्थ्य सहायता के साथ-साथ सुरक्षित और स्वच्छ स्वास्थ्य वातावरण बनाए रखने की समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
इस कोर्स में दाखिले के लिए उम्मीदवार का भारत के किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से सीनियर सेकेंडरी यानी 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है। आवेदन के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। जिन विद्यार्थियों का 12वीं कक्षा का परिणाम अभी घोषित नहीं हुआ है, वे भी प्रोविज़नल आधार पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।
कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद प्रशिक्षित उम्मीदवार विभिन्न भूमिकाओं में काम कर सकते हैं। इनमें ‘गर्भिणी मित्र असिस्टेंट’, प्रीनेटल और पोस्टनेटल केयर असिस्टेंट, एंटीनेटल वेलनेस गाइड तथा मैटर्नल हेल्थ सपोर्ट वर्कर जैसी भूमिकाएं शामिल हैं। आयुष केंद्रों, मैटरनिटी क्लीनिक, गैर-सरकारी संगठनों, सामुदायिक स्वास्थ्य परियोजनाओं और वेलनेस संस्थानों में उनके लिए अवसर बन सकते हैं।
हालांकि, ‘गर्भिणी मित्र’ कार्यक्रम को चिकित्सकीय प्रसव-पूर्व देखभाल के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नियमित चिकित्सकीय जांच, आवश्यक डायग्नोस्टिक टेस्ट और रक्तचाप तथा हीमोग्लोबिन की निगरानी गर्भावस्था के दौरान महत्वपूर्ण बनी रहती है। प्रशिक्षित व्यक्ति का प्रमुख कार्य स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना, सहयोग देना और किसी संभावित खतरे के संकेत मिलने पर महिला को योग्य डॉक्टर या उचित स्वास्थ्य केंद्र तक समय पर पहुंचाने में सहायता करना होगा।
AIIA की यह पहल आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य ज्ञान को कौशल प्रशिक्षण के साथ जोड़ते हुए मातृ कल्याण के लिए सामुदायिक स्तर पर सहायता तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक कदम मानी जा सकती है। इससे प्रशिक्षित युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में नए अवसर मिलने के साथ गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को भी सही समय पर स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।