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नेहरू प्लेस पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, अब हटेंगी दुकानें

अदालत के आदेश के बाद नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर के एक बड़े हिस्से में अवैध वेंडिंग और रेहड़ी-पटरी गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

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Gauravshali Bharat News
  • October 7, 2026 8:00 pm IST, Published 31 minutes ago

नई दिल्ली। दिल्ली के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर कारोबार केंद्र नेहरू प्लेस को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत के आदेश के बाद नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर के एक बड़े हिस्से में अवैध वेंडिंग और रेहड़ी-पटरी गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक संबंधित एजेंसियां निर्धारित समयसीमा के बाद अनधिकृत विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं। इस फैसले ने इलाके में कारोबार करने वाले दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी संचालकों और ग्राहकों के बीच चर्चा तेज कर दी है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने नेहरू प्लेस में वेंडिंग गतिविधियों से जुड़े आंकड़े और मौजूदा स्थिति रखी गई। बताया गया कि नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर में बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग तरह का कारोबार कर रहे हैं। इनमें से सभी के पास वैध वेंडिंग अधिकार या निर्धारित स्थान होने की स्थिति नहीं है। इसी वजह से क्षेत्र में अनधिकृत वेंडिंग को लेकर लंबे समय से प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर सवाल उठते रहे हैं।

12 अक्टूबर के बाद कार्रवाई की तैयारी

अदालत के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार 12 अक्टूबर 2026 के बाद संबंधित नगर निकाय को इलाके में मौजूद अनधिकृत रेहड़ी-पटरी और अन्य अवैध वेंडिंग गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति मिल सकती है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो बिना वैध अनुमति या निर्धारित वेंडिंग अधिकार के सार्वजनिक स्थानों पर कारोबार कर रहे हैं।

कोर्ट की कार्यवाही के दौरान यह भी सामने आया कि नेहरू प्लेस में बड़ी संख्या में विक्रेता कारोबार कर रहे हैं, जबकि आधिकारिक तौर पर वेंडिंग की अनुमति प्राप्त करने वालों की संख्या काफी कम बताई गई। इससे यह सवाल भी उठा कि इतने बड़े कारोबारी क्षेत्र में वास्तविक वेंडिंग व्यवस्था और जमीन पर मौजूद गतिविधियों के बीच इतना अंतर क्यों है।

400 से ज्यादा विक्रेताओं का कारोबार

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर क्षेत्र में 400 से अधिक विक्रेता कारोबार कर रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या में ऐसे विक्रेता बताए गए हैं जिनके पास वैध वेंडिंग अधिकार नहीं हैं। वहीं, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक केवल करीब 90 विक्रेताओं को अधिकृत तौर पर वेंडिंग की अनुमति प्राप्त होने की बात सामने आई है।

यह अंतर प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकता है। एक ओर बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी इस तरह के छोटे कारोबार से जुड़ी है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक स्थानों पर अनधिकृत कब्जे, आवाजाही में परेशानी और व्यवस्थित बाजार व्यवस्था का मुद्दा भी सामने आता है।

‘नो-वेंडिंग जोन’ घोषित होने का क्या मतलब?

नेहरू प्लेस के संबंधित हिस्से को नो-वेंडिंग जोन घोषित किए जाने का मतलब है कि वहां निर्धारित नियमों के तहत वेंडिंग गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। ऐसे क्षेत्र में रेहड़ी, पटरी या अन्य अस्थायी ढांचे के माध्यम से कारोबार करना नियमों के विपरीत माना जा सकता है।

इस तरह के निर्णय का उद्देश्य आम तौर पर सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण से मुक्त रखना, पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना और यातायात तथा बाजार व्यवस्था को बेहतर बनाना होता है। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई में उन लोगों के पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था का सवाल भी महत्वपूर्ण होता है जिनकी आजीविका लंबे समय से छोटे कारोबार पर निर्भर है।

दुकानदारों और ग्राहकों पर भी पड़ेगा असर

नेहरू प्लेस दिल्ली का एक प्रमुख कारोबारी केंद्र है, जहां कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और तकनीकी उत्पादों से जुड़े कारोबार के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यहां मुख्य दुकानों के अलावा आसपास छोटे विक्रेताओं और सर्विस से जुड़े कारोबार भी लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।

यदि अनधिकृत वेंडिंग के खिलाफ व्यापक कार्रवाई होती है, तो इसका असर केवल विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहेगा। ग्राहकों की खरीदारी व्यवस्था, बाजार में आने-जाने का तरीका और आसपास के छोटे कारोबार पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि कार्रवाई के साथ बाजार की सामान्य गतिविधियों को भी सुचारु रखा जाए।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ी

अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित सरकारी एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत हो और अधिकृत तथा अनधिकृत विक्रेताओं की पहचान स्पष्ट तरीके से की जाए।

साथ ही यह भी जरूरी होगा कि जिन विक्रेताओं के पास वैध दस्तावेज या अधिकार हैं, उनके साथ किसी तरह की गलत कार्रवाई न हो। दूसरी तरफ जिन लोगों के पास अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कदम उठाना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।

विवाद की जड़ में है वेंडिंग व्यवस्था

दिल्ली के कई व्यस्त बाजारों की तरह नेहरू प्लेस में भी वेंडिंग और अतिक्रमण का मुद्दा नया नहीं है। बड़े बाजारों में फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी कारोबार से एक ओर लोगों को सस्ते उत्पाद और सेवाएं मिलती हैं, तो दूसरी ओर भीड़, अव्यवस्था और पैदल आवाजाही की समस्या पैदा हो सकती है।

ऐसे में स्थायी समाधान के लिए केवल हटाने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जाती। जरूरत इस बात की भी है कि पात्र विक्रेताओं की पहचान कर उन्हें नियमों के तहत व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। इससे बाजार की व्यवस्था भी बेहतर हो सकती है और छोटे कारोबारियों की आजीविका भी प्रभावित होने से बच सकती है।

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आने वाले दिनों में नेहरू प्लेस में प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी। यदि 12 अक्टूबर के बाद अनधिकृत वेंडरों को हटाने की कार्रवाई शुरू होती है, तो बाजार के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि, अंतिम कार्रवाई संबंधित आदेशों, प्रशासनिक प्रक्रिया और पात्र विक्रेताओं के अधिकारों के अनुरूप ही होनी चाहिए। नेहरू प्लेस जैसे बड़े कारोबारी केंद्र में कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधा और छोटे कारोबारियों की आजीविका के बीच संतुलन बनाना सबसे अहम चुनौती होगी।

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