संजय सिंह का ऐलान, 9 अक्टूबर को लखनऊ में CEC के खिलाफ प्रदर्शन

संजय सिंह का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मतदाता को अपने मत की गोपनीयता और उसके सही तरीके से दर्ज होने को लेकर पूरा विश्वास हो। इस मांग के जरिए AAP विपक्षी दलों के बीच चुनाव सुधार को लेकर चल रही बहस को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है...

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 7, 2026 3:41 pm IST, Published 19 minutes ago

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी आगामी 9 अक्टूबर को लखनऊ में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करेगी। इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी।

संजय सिंह ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए जाने चाहिए। उनका कहना है कि चुनाव प्रणाली को लेकर जनता के मन में किसी भी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए और इसके लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिस पर सभी पक्षों का भरोसा कायम हो।

AAP सांसद ने उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक बहस का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें 80 और 20 के अनुपात की राजनीतिक चर्चा की जाती है। संजय सिंह ने इसके जवाब में PDA और NDA के सामाजिक समीकरण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में वास्तविक सामाजिक हिस्सेदारी को 85 और 15 के अनुपात में देखा जाना चाहिए।

संजय सिंह का बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति के साथ-साथ निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर भी विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष की ओर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), चुनावी पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे समय-समय पर उठाए जाते रहे हैं। हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली मौजूदा व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष का अपना पक्ष है।

लखनऊ में प्रस्तावित प्रदर्शन के जरिए आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर और मजबूती से उठाने की तैयारी में है। संजय सिंह के मुताबिक, प्रदर्शन का उद्देश्य चुनाव व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग को सामने रखना है। पार्टी इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी करेगी। बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी इस विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा रहने वाली है। संजय सिंह का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मतदाता को अपने मत की गोपनीयता और उसके सही तरीके से दर्ज होने को लेकर पूरा विश्वास हो। इस मांग के जरिए AAP विपक्षी दलों के बीच चुनाव सुधार को लेकर चल रही बहस को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में PDA और NDA के सामाजिक समीकरण को लेकर भी आने वाले समय में बयानबाजी तेज होने की संभावना है। संजय सिंह ने 85 और 15 का उल्लेख करते हुए सामाजिक प्रतिनिधित्व के सवाल को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखने का संकेत दिया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा की ओर से 80 और 20 जैसे राजनीतिक संदर्भों का इस्तेमाल अलग-अलग मुद्दों पर किया जाता रहा है।

9 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाला प्रदर्शन इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सीधे सड़क पर उठाने जा रही है। प्रदर्शन के दौरान पार्टी की ओर से निर्वाचन आयोग की भूमिका, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग प्रमुखता से रखी जाएगी।

इस घटनाक्रम से उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बयानबाजी के और तेज होने के संकेत हैं। आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चुनाव प्रणाली, सामाजिक समीकरण और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर आरोप-प्रत्यारोप बढ़ सकते हैं। हालांकि प्रदर्शन के बाद इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया से तस्वीर और स्पष्ट होगी।

 

 

 

Advertisement