नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन और चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग के बीच निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसे किसी भी राजनीतिक दल या उसके प्रतिनिधिमंडल से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है। आयोग ने कहा है कि राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए पहले से तय प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का पालन किया जाना जरूरी है। आयोग के अनुसार, मंगलवार शाम चार बजे तक किसी राजनीतिक दल की ओर से अधिकृत माध्यम से बैठक के लिए औपचारिक समय नहीं मांगा गया था।
दरअसल, मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। विपक्षी दलों की मांग थी कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग के अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी चिंताएं सामने रखें। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने आयोग से मिलने की मांग को लेकर आकाशवाणी भवन परिसर में धरना भी दिया। बाद में दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटाया।
विपक्षी नेताओं का आरोप था कि चुनाव आयोग उनसे मिलने के लिए तैयार नहीं है। वहीं आयोग ने अपने बयान में इस दावे से अलग तस्वीर पेश की। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए वर्ष 2025 में एक निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल बनाया गया था। इसके तहत किसी राजनीतिक दल या प्रतिनिधिमंडल को पहले अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग से मिलने का समय मांगना होता है। इसके बाद दोनों पक्षों की सहमति से बैठक का समय तय किया जाता है।
आयोग के मुताबिक, मंगलवार शाम करीब चार बजे दिल्ली पुलिस के माध्यम से उसे जानकारी मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है और ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने कहा कि वह इस अनुरोध पर विचार कर रहा था। इसी दौरान उसे यह भी बताया गया कि विपक्षी सांसद संसद भवन की एनेक्सी में बैठक करना चाहते हैं। आयोग के अनुसार, यह अनुरोध उसके तय प्रोटोकॉल से अलग था, क्योंकि राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक आयोग के परिसर में ही आयोजित करने की व्यवस्था है।
निर्वाचन आयोग ने संसद भवन की एनेक्सी में बैठक के अनुरोध को असामान्य बताते हुए स्वीकार नहीं किया। हालांकि, आयोग ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक वैकल्पिक व्यवस्था का प्रस्ताव भी दिया। इसके तहत आयोग के सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को संसद भवन की एनेक्सी में भेजकर विपक्षी सांसदों से ज्ञापन लेने की बात कही गई थी। आयोग का कहना है कि सांसद इस विकल्प पर सहमत नहीं हुए। आयोग ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के सदस्यों से मिलने में उसे किसी तरह की आपत्ति नहीं है। उसका कहना है कि सभी राजनीतिक दल पहले भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आयोग से मुलाकात करते रहे हैं और आगे भी ऐसा कर सकते हैं।
आयोग के मुताबिक, यदि कोई दल अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से बैठक का अनुरोध करता है तो उस पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जाएगा। विवाद के केंद्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दे भी हैं। विपक्षी दल इन मामलों को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। मंगलवार का प्रदर्शन इसी राजनीतिक टकराव के बीच हुआ, जिसमें कई विपक्षी सांसदों की पुलिस से नोकझोंक हुई और उन्हें हिरासत में लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद आयोग और विपक्ष के बीच संवाद की प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण हो गई है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि वह राजनीतिक दलों के साथ चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन बैठक निर्धारित नियमों के तहत ही होगी। वहीं विपक्षी दल आयोग के सामने अपनी शिकायतें सीधे रखने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में औपचारिक बैठक के लिए अनुरोध और उसके बाद तय होने वाली प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।