नयी दिल्ली: राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी सांसदों के विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष के करीब 300 सांसद चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलकर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR समेत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब मांगना चाहते हैं, लेकिन उन्हें आयोग तक पहुंचने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों से बातचीत करना चाहता है।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी सांसदों को पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से हटा दिया, जबकि उनकी मांग सिर्फ इतनी थी कि उन्हें चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने का अवसर दिया जाए। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों को देश के करोड़ों मतदाताओं का समर्थन मिला है और ऐसे में चुनाव आयोग को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। उनके मुताबिक, विपक्ष SIR के अलावा पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और हरियाणा की चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी आयोग से स्पष्टीकरण चाहता है।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है तो आयोग को विपक्षी सांसदों से मिलने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मताधिकार से जुड़े सवालों पर देश में गंभीर स्थिति पैदा हो रही है। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए उन पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने के आरोप लगाए। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग तथा विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया था कि उसने Form 6 में किए गए बदलावों को मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर पद के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। हालांकि, चुनाव आयोग ने उनके दावों को भ्रामक बताया है और कहा है कि SIR से जुड़ी प्रक्रिया आयोग की मंजूरी से आगे बढ़ी थी।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान बातचीत और पारदर्शिता से होना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि विपक्ष के सवालों का जवाब दिया जाता है तो विवाद को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने आगे की रणनीति को लेकर भी पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस उन्हें यहां से हटाना चाहती है तो वह उन्हें हटा सकती है, लेकिन यह भी बताए कि उन्हें देश में कहां बैठने की अनुमति होगी। उन्होंने इंडिया गेट, जंतर-मंतर और सड़क पर बैठने जैसे विकल्पों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष अपने मुद्दे को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है।
विपक्षी सांसदों के मार्च के दौरान दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई थी। पुलिस ने चुनाव आयोग की ओर बढ़ रहे नेताओं को बैरिकेडिंग के जरिए रोक दिया। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन में कांग्रेस के अलावा INDIA ब्लॉक के कई दलों के नेता शामिल हुए। बीजू जनता दल ने भी अपने नेताओं को इस प्रदर्शन में भेजा।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी पारदर्शिता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR से जुड़े फैसलों की समीक्षा की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा और चुनाव आयोग विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR संबंधी उसकी प्रक्रिया कानूनी आधार पर है, जबकि विपक्ष इन दावों पर लगातार सवाल उठा रहा है।