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चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का हल्लाबोल

मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) समेत कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और सुप्रिया सुले समेत कई प्रमुख नेता प्रदर्शन में नजर आए। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 140 से अधिक विपक्षी सांसदों के मार्च में शामिल होने की बात सामने आई, हालांकि आम आदमी पार्टी और डीएमके इस प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे...

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  • October 6, 2026 1:40 pm IST, Published 27 minutes ago

नई दिल्ली: दिल्ली में मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA ब्लॉक के सांसदों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसद संसद परिसर से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने निकले, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के तहत उन्हें रास्ते में रोक दिया गया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी नेता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई।

विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। INDIA ब्लॉक पहले से ही इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान चला रहा है। मंगलवार का मार्च इसी अभियान का हिस्सा था। विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और कथित गड़बड़ियों पर जवाब देने की मांग की।

मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) समेत कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और सुप्रिया सुले समेत कई प्रमुख नेता प्रदर्शन में नजर आए। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 140 से अधिक विपक्षी सांसदों के मार्च में शामिल होने की बात सामने आई, हालांकि आम आदमी पार्टी और डीएमके इस प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे।

प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद कई सांसद बैरिकेड पर चढ़ते दिखाई दिए, जबकि कुछ नेता वहीं धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने पुलिस की रोक के बाद विरोध दर्ज कराया। मध्य दिल्ली में बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। प्रशासन ने भीड़ और कानून-व्यवस्था को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है और विपक्षी दलों को लगता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अखिलेश ने SIR और मतदाता सूची में कथित बदलावों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चुनाव में मतदाताओं के नाम काटे जाने और फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग जैसे मामलों की जांच होनी चाहिए।

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अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों का उल्लेख करते हुए कई चुनावों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने चंडीगढ़ के मेयर चुनाव से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। ये सभी आरोप अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं, जिन पर चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल का पक्ष अलग रहा है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के आरोपों को दोहराया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को पहले से ही ज्ञानेश कुमार पर भरोसा नहीं था और मौजूदा घटनाक्रम के बाद उसकी आशंका और मजबूत हुई है।

प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए। इस बीच, SIR और फॉर्म-6 से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की टिप्पणियों ने भी राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अदालत ने कहा था कि उसने फॉर्म-6 के किसी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है और चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। विपक्ष ने इन टिप्पणियों को अपनी आपत्तियों के समर्थन के रूप में पेश किया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में किसी तरह के मतभेद या मनमानी के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

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विरोध मार्च के कारण मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती के साथ कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए थे। भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा और दिल्ली पुलिस को मार्गों के संबंध में एडवाइजरी जारी करनी पड़ी।

INDIA ब्लॉक के इस प्रदर्शन ने SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर चल रही राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया है। विपक्ष जहां इसे लोकतंत्र और मताधिकार से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों का बचाव कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बहस जारी रहने के आसार हैं।

 

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