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राहुल गांधी के बयान पर बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस से पूछे सवाल

नई दिल्ली: भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता खत्म करने’ संबंधी बयान को लेकर उन पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं के अधिकार और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ राहुल गांधी की बात क्या केवल सार्वजनिक मंचों तक सीमित है या कांग्रेस संगठन में भी इसका […]

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  • August 26, 2026 5:13 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता खत्म करने’ संबंधी बयान को लेकर उन पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं के अधिकार और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ राहुल गांधी की बात क्या केवल सार्वजनिक मंचों तक सीमित है या कांग्रेस संगठन में भी इसका पालन होता है। स्वराज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर राजनीतिक व्यवस्था और नेतृत्व को लेकर राहुल गांधी के दावे और उनकी पार्टी की वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई देता है।

बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी के पुणे में 22 अगस्त को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का संदर्भ देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता ने वहां पितृसत्ता को खत्म करने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और समानता की बात का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ राजनीतिक दलों के भीतर भी समान अवसर और महिलाओं की भूमिका को लेकर समान मानदंड होने चाहिए।

भाजपा सांसद ने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता के पास देश के लिए स्पष्ट और सकारात्मक राजनीतिक एजेंडा नहीं है और वे अपनी टीम से मिले इनपुट के आधार पर राजनीतिक नैरेटिव तैयार करते हैं। स्वराज ने कहा कि युवाओं और मतदाताओं के सामने किसी भी मुद्दे को रखने से पहले राजनीतिक दलों को अपने आचरण और रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर पितृसत्ता के खिलाफ लड़ाई की बात की जा रही है तो इसकी शुरुआत राजनीतिक संगठनों के भीतर से भी होनी चाहिए। स्वराज ने कांग्रेस को इसी कसौटी पर परखने की बात कही। उनका कहना था कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी, नेतृत्व और सम्मान को केवल भाषणों का विषय बनाने के बजाय उसे पार्टी के व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।

बांसुरी स्वराज ने अपने बयान में राहुल गांधी के एक कथित सोशल मीडिया प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने एक महिला प्रधानमंत्री को लेकर किए गए आपत्तिजनक मजाक के प्रसंग में हिस्सा लिया था। उन्होंने विशेष रूप से इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी का नाम लेते हुए कहा कि किसी महिला राजनीतिक नेता को लेकर सार्वजनिक चर्चा में भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। स्वराज ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर चर्चा हासिल करने के लिए राजनीतिक नेताओं को व्यक्तिगत टिप्पणियों और सस्ते मजाक का सहारा नहीं लेना चाहिए।

‘पितृसत्ता’ का मुद्दा भारतीय राजनीति में लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। राजनीतिक दल महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की बात करते हैं। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि राजनीतिक संगठनों के भीतर महिलाओं को नेतृत्व के कितने अवसर मिलते हैं और सार्वजनिक जीवन में महिला नेताओं को किस तरह की भाषा और व्यवहार का सामना करना पड़ता है।

बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी के बयान को इसी संदर्भ में चुनौती देते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक विचारधारा की वास्तविक परीक्षा उसके व्यवहार में होती है। उनका तर्क है कि यदि कोई दल या नेता पितृसत्तात्मक व्यवस्था को चुनौती देने की बात करता है तो उसे अपने संगठन और राजनीतिक गतिविधियों में भी समानता और सम्मान के सिद्धांत लागू करने चाहिए।

फिलहाल यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह बड़ा राजनीतिक सवाल है कि महिलाओं के सम्मान और समानता की बात करने वाले दल अपने संगठनात्मक ढांचे और सार्वजनिक आचरण में इन मूल्यों को किस तरह लागू करते हैं। आने वाले समय में दोनों पक्षों की ओर से इस मुद्दे पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

 

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