लखनऊ/मुजफ्फरनगर: जीएसटी चोरी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के दौरान पूर्व बसपा एमएलसी शाहनवाज राणा और उनके करीबियों के ठिकानों से करीब 3.80 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी को तलाशी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिनका संबंध कथित फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए कर चोरी से बताया जा रहा है। ईडी की कार्रवाई करीब एक दिन से अधिक समय तक चली और जांच पूरी होने के बाद टीमें वापस लखनऊ रवाना हो गईं।
ईडी ने सोमवार सुबह मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में आरोपियों से जुड़े 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया था। इन परिसरों में पूर्व बसपा एमएलसी शाहनवाज राणा के अलावा उनके परिजनों और करीबियों से जुड़े स्थान शामिल थे। कार्रवाई के दायरे में स्टील कारोबार से जुड़े लोगों और चार्टर्ड अकाउंटेंट से संबंधित परिसरों को भी शामिल किया गया था।
जांच एजेंसी की कार्रवाई पुराने जीएसटी छापे और उसके आधार पर दर्ज एफआईआर से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई गई। जांच में कथित तौर पर यह सामने आया था कि बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के फर्जी बिल तैयार किए गए और उनके आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया। आरोप है कि इस क्रेडिट को आगे भी इस्तेमाल किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को करीब 27.02 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
ईडी की तलाशी के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न ठिकानों पर दस्तावेज, रिकॉर्ड और अन्य सामग्री की जांच की। एजेंसी अब बरामद दस्तावेजों और नकदी के स्रोत की पड़ताल करेगी। यह भी देखा जाएगा कि बरामद सामग्री का कथित जीएसटी चोरी और फर्जी बिलिंग नेटवर्क से क्या संबंध है। जांच आगे बढ़ने के साथ संबंधित लोगों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
बताया गया है कि आरोपियों और संबंधित व्यक्तियों को सितंबर के पहले सप्ताह में समन जारी कर पूछताछ के लिए लखनऊ बुलाया जा सकता है। पूछताछ के दौरान बरामद दस्तावेजों, नकदी और कथित लेनदेन से जुड़े सवाल पूछे जाने की संभावना है। करीब 26 घंटे से अधिक चली कार्रवाई के दौरान राना हाउस को जांच एजेंसी ने अपने घेरे में रखा। परिवार के सदस्यों और संबंधित लोगों को इस अवधि में परिसर के भीतर ही रहना पड़ा। बाहरी लोगों की आवाजाही भी सीमित रही। अधिकारियों ने घर के अलग-अलग हिस्सों और उपलब्ध रिकॉर्ड की गहन जांच की।
ईडी की कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला चरण पूछताछ और बरामद सामग्री के विश्लेषण से जुड़ा होगा। एजेंसी यह निर्धारित करने का प्रयास करेगी कि बरामद करीब 3.80 करोड़ रुपये की नकदी का स्रोत क्या है और इसका कथित कर चोरी से कोई संबंध है या नहीं। इसी तरह संदिग्ध दस्तावेजों की जांच के जरिए कथित फर्जी बिलिंग के नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को समझने की कोशिश की जाएगी।
मामले में एजेंसी की आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। सितंबर में प्रस्तावित पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि बरामद दस्तावेज और नकदी मामले की जांच में किस तरह की भूमिका निभाते हैं। फिलहाल ईडी की कार्रवाई ने कथित जीएसटी चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।