मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले गैर-मराठी ड्राइवरों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि ऐसे चालकों को बोलचाल की मराठी सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस अवधि के दौरान यदि कोई चालक मराठी सीख नहीं पाता है तो उसके खिलाफ केवल भाषा की वजह से कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था। संगठनों की मांग पर सरकार ने एक साल की मोहलत देने का फैसला किया है। इससे हाल में भाषा संबंधी नियमों को लेकर पैदा हुए तनाव के बीच चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र के परिवहन विभाग ने 20 अगस्त 2026 से प्रदेशभर में एक अभियान शुरू किया था। इसका उद्देश्य गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और अन्य कैब चालकों के मराठी भाषा संबंधी ज्ञान की जांच करना था। सरकार का कहना था कि महाराष्ट्र में काम करने वाले ड्राइवरों को स्थानीय लोगों से सामान्य बातचीत करने में सक्षम होना चाहिए। परिवहन विभाग की पहल के बाद बड़ी संख्या में ड्राइवरों के बीच कार्रवाई और जुर्माने को लेकर चिंता पैदा हुई। कई जगहों पर चालकों ने इसका विरोध भी किया।
मुंबई के कुछ इलाकों में ऑटो और टैक्सी चालकों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। चालकों का कहना था कि अचानक भाषा संबंधी अनिवार्यता लागू करने से उनके रोजगार पर असर पड़ सकता है। भाषा संबंधी नियम को लेकर कानूनी चुनौती भी सामने आई। मुंबई के चार कैब चालकों ने 25 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिकाकर्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी, जिसके तहत ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान जरूरी किया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि इस तरह की अनिवार्यता आम लोगों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया अलग स्तर पर जारी है, जबकि राज्य सरकार ने अब चालकों को एक साल की अतिरिक्त मोहलत देने की घोषणा की है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार का उद्देश्य किसी चालक की रोजी-रोटी छीनना नहीं है। सरकार चाहती है कि महाराष्ट्र में काम करने वाले लोग स्थानीय भाषा और संस्कृति से परिचित हों और उसका सम्मान करें।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी भाषा अभियान के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा था कि सरकार ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनाना नहीं चाहती। मकसद केवल इतना है कि वे अपने काम से जुड़ी सामान्य बातचीत स्थानीय भाषा में कर सकें। ऑटो और टैक्सी चालकों के बीच अभियान को लेकर फैली जुर्माने की आशंकाओं ने मामले को और संवेदनशील बना दिया था। विरोध के बाद सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। अब एक साल की मोहलत दिए जाने से तत्काल कार्रवाई की चिंता कम होने की संभावना है।
सरकार के फैसले के अनुसार गैर-मराठी चालकों को अब बोलचाल की मराठी सीखने के लिए एक वर्ष का समय मिलेगा। इस दौरान उन्हें भाषा सीखने का अवसर दिया जाएगा और केवल मराठी न जानने के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह फैसला सरकार और चालक संगठनों के बीच संवाद के बाद आया है। इससे एक तरफ सरकार की स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने की नीति जारी रहेगी, वहीं दूसरी तरफ दूसरे राज्यों से आकर महाराष्ट्र में रोजगार करने वाले चालकों को तत्काल दबाव से राहत मिलेगी।
अब इस एक वर्ष की अवधि के दौरान सरकार और परिवहन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यदि भाषा सीखने के लिए प्रशिक्षण या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं तो चालकों के लिए निर्धारित लक्ष्य हासिल करना आसान हो सकता है। फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों के पास मराठी सीखने के लिए एक साल का समय रहेगा। इस अवधि में भाषा न आने पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। इससे महाराष्ट्र में भाषा और रोजगार से जुड़े विवाद को फिलहाल कुछ समय के लिए शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।