नई दिल्ली: हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा के सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। खरगे ने पत्र में घटना पर नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि इतने दिन बीतने के बावजूद अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई।
खरगे ने अपने पत्र में कहा कि यह मामला केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान या कांग्रेस अध्यक्ष के पद तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, इससे समाज के करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने नड्डा से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने और घटना में कथित तौर पर शामिल लोगों व संगठनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश देने का आग्रह किया।
दरअसल, 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की कांग्रेस की एक जनसभा हुई थी। कांग्रेस का आरोप है कि इसके दो दिन बाद यानी 10 अगस्त को उस मंच का कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया गया। पार्टी ने इस घटना को जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए विरोध जताया था।
इस मुद्दे को खरगे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में भी उठाया था। सदन में हुई चर्चा के दौरान जेपी नड्डा ने घटना को दुखद बताया था और जांच कराने की बात कही थी। नड्डा ने यह भी कहा था कि भाजपा इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
खरगे ने अपने नए पत्र में इसी आश्वासन का हवाला देते हुए कहा कि जांच और कार्रवाई को लेकर सदन में आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए नड्डा से मामले में तत्काल कदम उठाने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस घटना पर राज्यसभा के सभापति ने भी चिंता व्यक्त की थी। ऐसे में उनके मुताबिक, मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस विवाद ने कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि खरगे के दलित होने की वजह से उनके कार्यक्रम के बाद मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, जिसे पार्टी सामाजिक भेदभाव का प्रतीक मानती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठा चुके हैं और उन्होंने घटना की आलोचना करते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
राज्यसभा में नेता सदन श्री @JPNadda को पत्र लिखकर हल्द्वानी में मेरी जनसभा के बाद रामलीला मैदान में कराए गए शुद्धीकरण (purification) के गंभीर मामले में उनके द्वारा सदन में दिए गए आश्वासन की मैंने याद दिलाई है और आग्रह किया है कि इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
24 दिन बीत जाने… pic.twitter.com/QWtFACaSg6
— Mallikarjun Kharge (@kharge) September 3, 2026
दूसरी ओर, कथित शुद्धिकरण से जुड़े संगठन और स्थानीय लोगों की ओर से जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया गया है। उनका कहना है कि इस घटना को जातिगत नजरिए से पेश किया जा रहा है और लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।
अब खरगे के पत्र के बाद इस मामले में उत्तराखंड सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी। कांग्रेस की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं, राजनीतिक विवाद के बीच अंतिम स्थिति जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।