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भारत में हर चौथा कर्मचारी करता है 16 घंटे मुफ्त काम, रिपोर्ट

नई दिल्ली। भारत की वर्क कल्चर को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने काम के लंबे घंटों और उसके बदले मिलने वाले भुगतान पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ADP Research की People at Work 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 24 फीसदी कर्मचारी हर सप्ताह 16 घंटे या उससे अधिक बिना भुगतान […]

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  • September 4, 2026 11:22 pm IST, Published 16 minutes ago

नई दिल्ली। भारत की वर्क कल्चर को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने काम के लंबे घंटों और उसके बदले मिलने वाले भुगतान पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ADP Research की People at Work 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 24 फीसदी कर्मचारी हर सप्ताह 16 घंटे या उससे अधिक बिना भुगतान के काम करने की बात कहते हैं। सर्वे में शामिल 36 बाजारों में यह हिस्सेदारी सबसे अधिक बताई गई है।

रिपोर्ट का यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब भारत में कॉरपोरेट कल्चर, वर्क-लाइफ बैलेंस, उत्पादकता और कर्मचारियों के मानसिक दबाव को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर भी अक्सर कर्मचारियों के लंबे कामकाजी घंटों और ऑफिस टाइम के बाद काम करने को लेकर बहस होती रहती है। हालांकि, ADP का आंकड़ा कर्मचारियों द्वारा स्वयं दी गई जानकारी पर आधारित है और इसे पूरे भारतीय कार्यबल पर सीधे लागू करना उचित नहीं होगा।

24 फीसदी कर्मचारी 16 घंटे या उससे ज्यादा अतिरिक्त काम

ADP Research के अनुसार, भारत में सर्वे किए गए कर्मचारियों में 24 फीसदी ने बताया कि वे सप्ताह में 16 घंटे या उससे ज्यादा बिना भुगतान वाला काम करते हैं। इसके अलावा करीब 40 फीसदी कर्मचारी सप्ताह में 6 से 15 घंटे तक बिना भुगतान के काम करने की बात कहते हैं। यानी सर्वे में शामिल लगभग 64 फीसदी भारतीय कर्मचारियों ने सप्ताह में कम से कम छह घंटे के unpaid work की जानकारी दी।

यहां ‘unpaid work’ का अर्थ ऐसे कामकाजी घंटों से है, जिन्हें कर्मचारी अपने नियमित भुगतान वाले काम के अतिरिक्त करते हैं। इसमें ऑफिस के निर्धारित समय के बाद काम करना, अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभाना या काम से जुड़े ऐसे घंटे शामिल हो सकते हैं जिनके लिए अलग भुगतान नहीं मिलता।

दुनिया के मुकाबले भारत की स्थिति क्यों चर्चा में?

ADP की वैश्विक रिपोर्ट में 36 बाजारों के 39,000 से अधिक कामकाजी वयस्कों की राय शामिल की गई है। वैश्विक स्तर पर 62 फीसदी कर्मचारियों ने बताया कि वे सप्ताह में पांच घंटे तक unpaid work करते हैं, जबकि 38 फीसदी छह घंटे या उससे अधिक बिना भुगतान के काम करते हैं। इनमें 16 घंटे या उससे अधिक unpaid work करने वालों की वैश्विक हिस्सेदारी 12 फीसदी बताई गई है।

भारत का 24 फीसदी आंकड़ा इसी कारण खास ध्यान खींचता है। यह वैश्विक 12 फीसदी हिस्सेदारी से दोगुना है। रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे किए गए बाजारों में भारत में 16 घंटे या उससे अधिक unpaid work करने वाले कर्मचारियों का अनुपात सबसे ज्यादा है।

क्या ज्यादा घंटे काम करने से बढ़ती है उत्पादकता?

लंबे समय तक काम करने को अक्सर अधिक मेहनत और बेहतर प्रदर्शन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ADP की रिपोर्ट इससे कहीं अधिक जटिल तस्वीर सामने रखती है। अध्ययन के मुताबिक, ज्यादा unpaid hours करने वाले कर्मचारियों में अपने काम को meaningful मानने और engagement का स्तर कुछ मामलों में अधिक पाया गया। लेकिन इसी समूह में काम के दौरान खुद को कम productive महसूस करने और दूसरी नौकरी तलाशने या इंटरव्यू देने की संभावना भी अधिक देखी गई।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी जो अतिरिक्त घंटे काम करता है, वह परेशान या असंतुष्ट है। कई कर्मचारी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, समय सीमा, करियर ग्रोथ या अपनी पसंद के कारण भी अतिरिक्त समय देते हैं। ADP ने भी संकेत दिया है कि unpaid work हमेशा केवल दबाव के कारण नहीं होता।

फिर भी लगातार लंबे घंटे काम करना कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। यदि अतिरिक्त काम नियमित व्यवस्था का हिस्सा बन जाए और उसकी स्पष्ट अपेक्षाएं या उचित मुआवजा न हो, तो इसका असर तनाव, उत्पादकता और कर्मचारी retention पर पड़ सकता है।

भारत में AI का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा

People at Work 2026 रिपोर्ट में भारतीय कार्यस्थल की एक दूसरी दिलचस्प तस्वीर भी सामने आती है। ADP के मुताबिक, भारत में 41 फीसदी कर्मचारी लगभग रोजाना AI का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 80 फीसदी कर्मचारी सप्ताह में कई बार AI का उपयोग करते हैं। यह सर्वे किए गए बाजारों में सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है।

ऐसे में एक तरफ भारतीय कर्मचारी तकनीक और AI को तेजी से अपना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में कर्मचारी अतिरिक्त unpaid hours भी कर रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि आने वाले समय में AI और automation क्या कर्मचारियों का कामकाजी बोझ कम कर पाएंगे या नई तरह की जिम्मेदारियां पैदा करेंगे।

कंपनियों के लिए भी है बड़ा संकेत

ADP Research का कहना है कि कर्मचारियों को काम की प्राथमिकताओं और उनसे की जाने वाली अपेक्षाओं की स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है। रिपोर्ट में पाया गया कि सप्ताह में पांच घंटे या उससे कम unpaid work करने वाले कर्मचारियों के बीच यह कहने की संभावना अधिक थी कि उन्हें अपने काम से जुड़ी अपेक्षाएं स्पष्ट रूप से समझ आती हैं।

इससे कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश निकलता है—सिर्फ ज्यादा घंटे काम करवाना उत्पादकता की गारंटी नहीं है। बेहतर परिणाम के लिए काम की स्पष्ट प्राथमिकताएं, उचित workload, समय प्रबंधन और कर्मचारियों की wellbeing पर ध्यान देना जरूरी है।

आंकड़ा कर्मचारियों की राय पर आधारित

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ADP की रिपोर्ट कोई सरकारी श्रम गणना नहीं है। इसके आंकड़े ADP Research Global Workforce Survey से आए हैं। 2025 में किए गए इस सर्वे में 36 बाजारों के 39,000 से अधिक working adults शामिल हुए थे। प्रतिभागियों में अलग-अलग उद्योगों, शैक्षणिक पृष्ठभूमि, काम के प्रकार और on-site तथा remote work environments से जुड़े लोग शामिल थे।

इसलिए रिपोर्ट को भारतीय कर्मचारियों के अनुभवों और workplace sentiment का एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण समझना चाहिए, न कि देश के प्रत्येक कर्मचारी के वास्तविक कामकाजी घंटों की आधिकारिक गणना।

बदलती वर्क कल्चर पर बड़ी बहस

भारत में 24 फीसदी कर्मचारियों का 16 घंटे या उससे ज्यादा unpaid work करने का आंकड़ा निश्चित रूप से चौंकाने वाला है। यह केवल लंबे समय तक काम करने की आदत का मामला नहीं, बल्कि इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों के समय, workload और performance को किस तरह परिभाषित कर रही हैं।

एक ओर AI और नई तकनीक काम को आसान और तेज बनाने का दावा कर रही हैं, दूसरी ओर कई कर्मचारी अब भी नियमित काम के अतिरिक्त बड़ी संख्या में घंटे लगा रहे हैं। आने वाले समय में कंपनियों के सामने चुनौती यह होगी कि तकनीकी बदलाव का इस्तेमाल केवल productivity बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि कर्मचारियों के काम के बोझ और work-life balance को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाए।

निष्कर्षतः, ADP People at Work 2026 का भारत से जुड़ा आंकड़ा देश की workplace culture पर एक गंभीर चर्चा शुरू करता है। हर सप्ताह 16 घंटे या उससे अधिक unpaid work करने वाले 24 फीसदी कर्मचारियों की हिस्सेदारी यह सवाल जरूर उठाती है कि क्या लंबे working hours को सफलता और productivity का पैमाना माना जाना चाहिए, या अब काम के बेहतर और संतुलित तरीके पर ध्यान देने का समय आ गया है।

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