धर्म डेस्क: घर के पूजा स्थल, मंदिर की अलमारी या दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें और धार्मिक कैलेंडर रखना भारतीय परिवारों में आम परंपरा है। समय बीतने के साथ इन तस्वीरों के पुराने होने, फटने, रंग फीके पड़ने या उनमें नमी लगने की स्थिति भी आती है। ऐसे में अक्सर लोगों के सामने सवाल होता है कि इन धार्मिक तस्वीरों और कैलेंडरों का सम्मानपूर्वक निस्तारण कैसे किया जाए।
कई लोग खराब हो चुकी धार्मिक तस्वीरों को सामान्य कचरे में डाल देते हैं या कहीं भी छोड़ देते हैं। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। वहीं पर्यावरण की दृष्टि से भी धार्मिक सामग्री को इधर-उधर फेंकने के बजाय उसके निस्तारण का जिम्मेदार तरीका अपनाना बेहतर है। खासकर प्लास्टिक, सिंथेटिक कवर, धातु और अन्य गैर-जैविक सामग्री को जलाने या पानी में डालने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।
पुरानी तस्वीरों को लेकर क्यों उठता है सवाल?
देवी-देवताओं की तस्वीरें केवल सजावटी वस्तु नहीं मानी जातीं। पूजा-पाठ करने वाले परिवारों में इन्हें श्रद्धा और आस्था से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि जब तस्वीर पुरानी होकर खराब होने लगती है तो उसे सामान्य कागज की तरह फेंकने में कई लोगों को संकोच होता है।
धार्मिक कैलेंडर के साथ भी यही स्थिति रहती है। कैलेंडर का वर्ष बीत जाने के बाद उस पर छपी देवी-देवताओं की तस्वीरें लंबे समय तक घर में रखी रह सकती हैं। समय के साथ कागज खराब होने लगता है और तस्वीर पर धूल, नमी या दीमक का असर दिखाई दे सकता है।
ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी बात यह है कि घबराने के बजाय श्रद्धा के साथ उचित निस्तारण का रास्ता अपनाया जाए।
तस्वीर खराब हो जाए तो क्या करें?
यदि किसी धार्मिक तस्वीर का फ्रेम खराब हो गया है लेकिन तस्वीर अभी सुरक्षित है, तो सबसे पहले उसे साफ कपड़े से सावधानीपूर्वक साफ किया जा सकता है। यदि फ्रेम टूटा है तो तस्वीर को फ्रेम से अलग कर सम्मानपूर्वक सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है।
यदि तस्वीर पूरी तरह खराब, फटी या गलने की स्थिति में पहुंच गई है, तो उसे लंबे समय तक पूजा स्थल पर रखना भी उचित नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में परिवार अपनी स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार निस्तारण कर सकता है।
कई हिंदू परिवार धार्मिक सामग्री को मंदिर या किसी धार्मिक संस्था के माध्यम से सम्मानपूर्वक निस्तारित करना पसंद करते हैं। स्थानीय मंदिर में पहले पूछ लेना बेहतर है कि वहां पुरानी धार्मिक तस्वीरें या पूजा सामग्री स्वीकार की जाती हैं या नहीं।
पानी में प्रवाहित करना कितना सही?
पुराने समय में धार्मिक सामग्री को जल में प्रवाहित करने की परंपरा कई जगहों पर दिखाई देती थी। लेकिन आज के समय में हर प्रकार की तस्वीर या कैलेंडर को नदी, तालाब या किसी जलस्रोत में डालना पर्यावरण की दृष्टि से उचित नहीं है।
खासकर प्लास्टिक लैमिनेशन, सिंथेटिक कागज, चमकीली पन्नी, रासायनिक रंग और फ्रेम जैसी सामग्री जलस्रोत को प्रदूषित कर सकती है। इसलिए केवल धार्मिक भावना के नाम पर ऐसी वस्तुओं को किसी नदी या तालाब में डालना जिम्मेदार विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
यदि किसी स्थानीय धार्मिक परंपरा में जल से संबंधित कोई विशेष विधि अपनाई जाती है, तो उसमें भी पर्यावरणीय नियमों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी है।
क्या तस्वीरों को जलाना चाहिए?
यह भी एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब सावधानी से समझना जरूरी है। हर धार्मिक तस्वीर को जलाना आवश्यक नहीं है। तस्वीर में इस्तेमाल कागज के अलावा प्लास्टिक, कोटिंग, सिंथेटिक सामग्री या रासायनिक रंग हो सकते हैं। इन्हें खुले में जलाने से धुआं और प्रदूषण फैल सकता है।
इसलिए धार्मिक सामग्री को जलाने की बजाय स्थानीय मंदिर, धार्मिक संस्था या कचरा प्रबंधन व्यवस्था से उचित निस्तारण के विकल्प के बारे में जानकारी लेना ज्यादा सुरक्षित तरीका हो सकता है।
यदि किसी विशेष धार्मिक परंपरा में अग्नि से संबंधित विधि बताई जाती है, तो उसे खुले में स्वयं करने के बजाय योग्य धार्मिक व्यक्ति के मार्गदर्शन और स्थानीय नियमों के अनुसार ही करना चाहिए।
लकड़ी या कपड़े से बनी तस्वीरों का क्या करें?
कुछ तस्वीरें लकड़ी के बोर्ड, कपड़े या अन्य प्राकृतिक सामग्री पर बनी होती हैं। ऐसी वस्तुओं का निस्तारण उनके निर्माण में इस्तेमाल सामग्री को देखकर किया जाना चाहिए।
यदि तस्वीर को अलग किया जा सकता है तो धार्मिक चित्र और फ्रेम की सामग्री को अलग-अलग संभालना बेहतर रहता है। लकड़ी या धातु के फ्रेम को संभव हो तो पुनः उपयोग या रीसाइक्लिंग के लिए दिया जा सकता है।
कपड़े या प्राकृतिक सामग्री वाली वस्तुओं के लिए भी स्थानीय धार्मिक संस्था से सलाह ली जा सकती है। इसका उद्देश्य यही होना चाहिए कि श्रद्धा बनी रहे और पर्यावरण को अनावश्यक नुकसान भी न पहुंचे।
घर में पुरानी धार्मिक तस्वीरें रखने से क्या होता है?
किसी तस्वीर के पुरानी हो जाने मात्र से घर में कोई अनिवार्य धार्मिक समस्या पैदा होती है, ऐसा वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में पूजा स्थल को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जाता है।
इसलिए यदि तस्वीर खराब हो चुकी है तो उसे केवल डर या अंधविश्वास के कारण घर में जमा करके रखना जरूरी नहीं है। श्रद्धा के साथ उसे उचित तरीके से हटाना और निस्तारित करना बेहतर विकल्प है।
निस्तारण में सबसे जरूरी है श्रद्धा और जिम्मेदारी
पुरानी धार्मिक तस्वीरों और कैलेंडरों के निस्तारण को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग तरीके हो सकते हैं। इसलिए किसी एक तरीके को सभी लोगों के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम बताना उचित नहीं होगा।
सबसे व्यावहारिक तरीका यह है कि खराब तस्वीर को सामान्य कचरे में खुले तौर पर न फेंका जाए, जलस्रोतों को प्रदूषित न किया जाए और प्लास्टिक या अन्य गैर-जैविक सामग्री को जलाने से बचा जाए। स्थानीय मंदिर या धार्मिक संस्था यदि ऐसी सामग्री स्वीकार करती है, तो वहां सम्मानपूर्वक देने का विकल्प चुना जा सकता है।
निष्कर्ष: पुरानी देवी-देवताओं की तस्वीर या धार्मिक कैलेंडर खराब हो जाए तो उसे लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। श्रद्धा के साथ, स्थानीय परंपरा और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए उसका निस्तारण करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।