कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने बाल विवाह और 18 वर्ष से कम उम्र में गर्भधारण एवं प्रसव के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 7 सितंबर 2026 को कहा कि राज्य में नाबालिग लड़कियों की शादी और उनसे जुड़े मामलों की पहचान के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। सरकार ने ऐसे मामलों में पति, परिवार, विवाह कराने वाले पुरोहित या काजी समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री के उस बयान की है, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि कोई लड़की 18 वर्ष की उम्र पूरी करने से पहले मां बनती है और मामला नाबालिग विवाह या यौन संबंध से जुड़ा पाया जाता है, तो उसके पति के खिलाफ POCSO कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर पुलिस कार्रवाई शुरू करने की बात भी कही है। हालांकि, किसी विशेष मामले में कौन-सी कानूनी धाराएं लागू होंगी, यह जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।
60 हजार से ज्यादा नाबालिग प्रसव के आंकड़ों का दावा
सरकार की कार्रवाई के पीछे स्वास्थ्य विभाग से सामने आए आंकड़ों को प्रमुख कारण बताया गया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, 1 जनवरी से 30 जून 2026 के बीच करीब 60 हजार संस्थागत प्रसव ऐसे मामलों में दर्ज हुए, जिनमें लड़कियों की उम्र 18 वर्ष से कम थी। इन आंकड़ों में मुर्शिदाबाद सबसे ऊपर रहा, जहां 12,847 ऐसे संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए। इसके बाद दक्षिण 24 परगना में 4,178 मामले सामने आए।
सरकार का कहना है कि अस्पतालों में दर्ज जन्म और गर्भावस्था से संबंधित रिकॉर्ड का इस्तेमाल संभावित बाल विवाह की पहचान के लिए किया जाएगा। इसके बाद संबंधित परिवारों और पतियों से उम्र के प्रमाण मांगे जा सकते हैं। प्रशासन का उद्देश्य केवल शादी रोकना नहीं, बल्कि नाबालिग लड़कियों के शोषण और कम उम्र में गर्भधारण के मामलों पर भी रोक लगाना है।
पति से मांगा जाएगा उम्र का दस्तावेज
मुख्यमंत्री के अनुसार, ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग संबंधित लोगों को शो-कॉज नोटिस जारी करेगा। खासतौर पर पति से उसकी पत्नी की उम्र से संबंधित जन्म प्रमाणपत्र या अन्य वैध दस्तावेज पेश करने को कहा जा सकता है। इसके लिए समय सीमा दिए जाने की बात कही गई है।
यदि जांच में यह सामने आता है कि लड़की की शादी 18 वर्ष से पहले हुई थी और मामले में अपराध के तत्व पाए जाते हैं, तो पुलिस भारतीय न्याय संहिता, बाल विवाह निषेध कानून और परिस्थितियों के अनुसार POCSO की धाराओं के तहत कार्रवाई कर सकती है।
यहां यह समझना जरूरी है कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध POCSO कानून के दायरे में आ सकते हैं, भले ही विवाह हुआ हो। इसी कानूनी स्थिति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने नाबालिग पत्नी के गर्भधारण से जुड़े मामलों में कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
बाल विवाह कराने वालों पर भी होगी कार्रवाई
पश्चिम बंगाल सरकार ने सिर्फ पति या परिवार को ही कार्रवाई के दायरे में रखने की बात नहीं कही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पुरोहित, काजी या अन्य व्यक्ति नाबालिग की शादी कराने या उसे संपन्न कराने में भूमिका निभाता है, तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत नाबालिग विवाह से जुड़े लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। रिपोर्टों के मुताबिक, कानून के तहत ऐसे अपराध में दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए सरकार का नया अभियान विवाह कराने वाले लोगों के लिए भी बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।
घर-घर चलेगा अभियान, पुलिस भी रहेगी शामिल
मुख्यमंत्री ने राज्यभर में door-to-door अभियान चलाने की बात कही है। इस अभियान में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के बीच समन्वय की योजना बताई गई है। अस्पतालों में सामने आए नाबालिग गर्भावस्था और प्रसव के रिकॉर्ड को संभावित मामलों की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि कार्रवाई केवल जागरूकता अभियान तक सीमित नहीं रहेगी। संदिग्ध मामलों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और अपराध की पुष्टि होने पर FIR एवं गिरफ्तारी की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
सरकारी योजनाओं का लाभ भी रोकने की चेतावनी
पश्चिम बंगाल सरकार ने बाल विवाह के दोषी पाए जाने वाले परिवारों के खिलाफ सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी पाए जाने वालों को राज्य और केंद्र की कुछ सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा सकता है।
इस फैसले का उद्देश्य आर्थिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बाल विवाह के खिलाफ दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति को योजना से वंचित करने की कार्रवाई संबंधित योजना और लागू नियमों के अनुसार ही होगी।
मुर्शिदाबाद के बाद किन जिलों में ज्यादा मामले?
स्वास्थ्य विभाग के बताए आंकड़ों में मुर्शिदाबाद सबसे आगे रहा। इसके बाद दक्षिण 24 परगना और पूर्व बर्दवान जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नाबालिग प्रसव दर्ज किए गए। उपलब्ध रिपोर्टों में मालदा, पश्चिम मेदिनीपुर, उत्तर दिनाजपुर, नदिया, पुरुलिया और उत्तर 24 परगना समेत कई जिलों का भी उल्लेख है।
सरकार का मानना है कि आंकड़े बाल विवाह और किशोरावस्था में गर्भधारण की गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं। कम उम्र में गर्भधारण से मां और नवजात दोनों के स्वास्थ्य पर जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक और कानूनी हस्तक्षेप की जरूरत होती है।
बयान के बाद बढ़ी सियासी और सामाजिक चर्चा
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को लेकर पिछली सरकार पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पहले पर्याप्त आंकड़े केंद्र के साथ साझा नहीं किए गए। वहीं, मौजूदा सरकार ने इसे बाल संरक्षण और कानून के सख्त पालन से जोड़ते हुए कार्रवाई तेज करने की बात कही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य में घोषित अभियान जमीन पर किस तरह लागू होता है और कितने मामलों में वास्तव में FIR, गिरफ्तारी तथा अभियोजन की कार्रवाई होती है। सरकार के सामने चुनौती यह भी होगी कि नाबालिग लड़कियों की पहचान के साथ उनकी सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जाए।
निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल सरकार का यह ऐलान बाल विवाह और नाबालिग गर्भधारण के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रशासनिक कदमों में से एक के रूप में सामने आया है। पति से उम्र के दस्तावेज मांगने से लेकर पुलिस कार्रवाई, POCSO के संभावित इस्तेमाल और विवाह कराने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। हालांकि, हर मामले में अंतिम कानूनी कार्रवाई जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।