पटना: खेती-किसानी में आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाने और किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से कृषि विभाग की ओर से सब्सिडी योजना के तहत किसानों को कृषि यंत्र खरीदने का मौका दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस योजना में अलग-अलग श्रेणी के कृषि यंत्रों पर किसानों को सरकारी अनुदान दिया जाएगा।
योजना से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, किसानों को 86 प्रकार के कृषि यंत्रों पर श्रेणी के अनुसार करीब 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलने का प्रावधान है। ऐसे में खेती के लिए ट्रैक्टर, पावर टिलर, कल्टीवेटर, रीपर, सीड ड्रिल और अन्य मशीन खरीदने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए यह योजना काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
86 प्रकार के कृषि यंत्र योजना में शामिल
कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए योजना में खेती के अलग-अलग कामों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को शामिल किया गया है। इनमें जुताई, बुआई, रोपाई, निकाई-गुड़ाई, सिंचाई, कटाई और मड़ाई से संबंधित मशीनें शामिल हैं।
किसानों के लिए उपलब्ध कृषि यंत्रों में ट्रैक्टर, पावर टिलर, कल्टीवेटर, हैप्पी सीडर, सीड ड्रिल, कंबाइन हार्वेस्टर, रीपर, मल्टीक्रॉप थ्रेसर समेत कई मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मल्चर, श्रेडर, स्ट्रॉ रीपर और स्ट्रॉ मशीन जैसी मशीनों पर भी अनुदान का प्रावधान बताया गया है।
इसका सीधा फायदा यह होगा कि किसान महंगे कृषि उपकरण खरीदने के लिए सरकार की सहायता ले सकेंगे। आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से खेती के कई काम कम समय में पूरे किए जा सकते हैं और मजदूरी समेत खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
80 प्रतिशत तक मिल सकता है अनुदान
योजना में कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी मशीन और किसान की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।
यानी पात्र किसान को कृषि यंत्र की पूरी कीमत अपनी जेब से नहीं चुकानी होगी। हालांकि, वास्तविक अनुदान राशि संबंधित कृषि यंत्र की निर्धारित लागत, अधिकतम स्वीकृत सीमा और किसान की श्रेणी के आधार पर तय होगी। इसलिए आवेदन करने से पहले किसान को संबंधित पोर्टल पर अपने पसंदीदा यंत्र के लिए निर्धारित अनुदान और पात्रता की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
कस्टम हायरिंग सेंटर पर भी सहायता
योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत रूप से कृषि यंत्र खरीदने वाले किसानों तक सीमित नहीं है। कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की स्थापना के लिए भी सहायता का प्रावधान है।
जानकारी के अनुसार, कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना पर लागत का 40 प्रतिशत तक, अधिकतम चार लाख रुपये तक सहायता दी जा सकती है। वहीं, कृषि यंत्र बैंक के लिए लागत का 80 प्रतिशत तक, अधिकतम आठ लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान बताया गया है।
कस्टम हायरिंग सेंटर का उद्देश्य किसानों को महंगे कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध कराना है। इससे छोटे और सीमांत किसान भी जरूरत के समय आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर सकते हैं, बिना हर मशीन खरीदने पर बड़ी रकम खर्च किए।
ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर को भी बढ़ावा
कृषि क्षेत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए भी सहायता दिए जाने की बात सामने आई है। ड्रोन के जरिए फसल पर निगरानी, छिड़काव और कृषि से जुड़े कई कार्यों को अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।
हालांकि, ड्रोन से जुड़ी सहायता के लिए अलग पात्रता, शर्तें और स्वीकृति प्रक्रिया लागू हो सकती है। इच्छुक आवेदकों को आवेदन से पहले विभागीय दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
ऑनलाइन आवेदन के बाद लॉटरी से होगा चयन
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आवेदन करने मात्र से कृषि यंत्र पर अनुदान मिलना तय नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद लाभुकों का चयन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।
चयनित किसान को कृषि यंत्र खरीदने के लिए परमिट जारी किया जाएगा। जारी परमिट की वैधता 15 दिनों की होगी। इस अवधि के भीतर किसान को निर्धारित प्रक्रिया के तहत कृषि यंत्र खरीदना होगा। यदि तय समय में यंत्र नहीं खरीदा गया तो परमिट स्वतः समाप्त हो सकता है।
इसलिए चयन होने के बाद किसानों को परमिट की वैधता अवधि का विशेष ध्यान रखना होगा। केवल आवेदन कर देने के बाद प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी।
पहले पूरी कीमत चुकानी होगी, फिर मिलेगा अनुदान
योजना के तहत चयनित किसान को कृषि यंत्र खरीदते समय पहले यंत्र की पूरी कीमत का भुगतान करना होगा। खरीद और संबंधित औपचारिकताओं की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुदान की राशि किसान के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
इस वजह से आवेदन करने वाले किसानों को अपनी वित्तीय व्यवस्था पहले से तैयार रखनी चाहिए। साथ ही, कृषि यंत्र खरीदते समय अधिकृत विक्रेता, निर्धारित मॉडल और विभागीय नियमों का पालन करना जरूरी होगा, ताकि बाद में अनुदान प्राप्त करने में परेशानी न आए।
आवेदन कहां और कैसे करें?
किसान कृषि विभाग के Farm Mechanization Portal के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। स्क्रीनशॉट में दिए गए विवरण के अनुसार आवेदन के लिए विभागीय पोर्टल farmech.bihar.gov.in का उल्लेख किया गया है।
ऑनलाइन आवेदन करते समय किसान को अपनी पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, कृषि यंत्र की श्रेणी और अनुदान से संबंधित शर्तों को ध्यान से जांचना चाहिए। आवेदन के बाद चयन, परमिट और खरीद से जुड़ी जानकारी भी समय-समय पर पोर्टल पर देखना जरूरी होगा।
किसानों के लिए जरूरी बातें
योजना में 86 प्रकार के कृषि यंत्र शामिल हैं।
अलग-अलग यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान बताया गया है।
कस्टम हायरिंग सेंटर और कृषि यंत्र बैंक के लिए भी सहायता उपलब्ध है।
आवेदन ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।
लाभुकों का चयन लॉटरी से किया जा सकता है।
चयनित किसान को निर्धारित अवधि में परमिट के आधार पर यंत्र खरीदना होगा।
कृषि यंत्र खरीदने के बाद अनुदान की राशि बैंक खाते में भेजी जाएगी।
आवेदन से पहले पात्रता और निर्धारित अनुदान राशि की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें।
नोट: अनुदान की वास्तविक राशि और पात्रता कृषि विभाग के मौजूदा दिशा-निर्देश, किसान की श्रेणी और संबंधित कृषि यंत्र के अनुसार तय होगी। आवेदन करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर नवीनतम नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।