गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में बाबा बालक नाथ मंदिर को लेकर विवाद अब और गहराता दिखाई दे रहा है। सेक्टर-50 के आदमपुर झाड़सा क्षेत्र में स्थित मंदिर परिसर में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बन गई है। मंदिर और संतों की समाधियों को हटाए जाने से नाराज ग्रामीणों ने अब महापंचायत बुलाने का ऐलान किया है। पंचायत में आगे की रणनीति और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन को लेकर फैसला लिया जा सकता है।
तड़के पहुंची प्रशासन की टीम, शुरू हुई कार्रवाई
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार तड़के हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की टीम पुलिस बल के साथ मंदिर परिसर पहुंची। कार्रवाई के दौरान नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग और नगर निगम की टीमें भी मौजूद थीं। रिपोर्टों के अनुसार, पहले मंदिर में मौजूद मूर्तियों को हटाकर दूसरे मंदिरों में स्थापित कराया गया और गौशाला में मौजूद गायों को दूसरी जगह भेजा गया। इसके बाद परिसर में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की गई।
बताया गया है कि कार्रवाई के बाद करीब चार एकड़ जमीन को खाली कराकर प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया। मौके पर चारदीवारी का काम शुरू किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आधार जमीन के अधिग्रहण और कथित कब्जे से जुड़ा बताया गया है।
पुलिस की भारी तैनाती से इलाके में तनाव
कार्रवाई के दौरान मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। कई रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए, जिससे स्थानीय लोगों और अन्य लोगों को कार्रवाई वाली जगह तक पहुंचने से रोका गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस की नाकेबंदी के कारण आसपास की आवाजाही भी प्रभावित हुई और स्कूल बसों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों और साधु-संतों ने कार्रवाई का विरोध किया। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि विरोध करने वाले लोगों को मौके तक पहुंचने से रोका गया। कार्रवाई के दौरान मीडिया कर्मियों को भी अंदर जाने से रोके जाने की खबरें सामने आई हैं।
मंदिर और समाधि टूटने से ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि बाबा बालक नाथ मंदिर लंबे समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। मंदिर परिसर में संतों की समाधियां भी थीं, जिन्हें स्थानीय लोग श्रद्धा से देखते थे। प्रशासन की कार्रवाई में इन संरचनाओं के हटाए जाने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर का इतिहास करीब 100 साल पुराना बताया गया है और वर्ष 1930 में इसके निर्माण का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मंदिर से जुड़ी जमीन और आसपास के जोहड़ की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है।
हालांकि, अलग-अलग पक्षों की ओर से मंदिर की उम्र और जमीन के इतिहास को लेकर अलग दावे भी सामने आए हैं। ऐसे में पूरे विवाद को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड और न्यायिक आदेश महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
जमीन विवाद के बीच NGT का आदेश भी अहम
मंदिर विवाद में जमीन और जल निकाय से जुड़ा पहलू भी सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने 24 अगस्त को राजस्व रिकॉर्ड में जोहड़ के रूप में दर्ज बताए गए करीब 2.5 एकड़ जल निकाय से अतिक्रमण हटाने और उसे बहाल करने से संबंधित निर्देश दिए थे। सर्वे में मंदिर समेत कुछ अन्य निर्माणों का उल्लेख भी किया गया था।
यही वजह है कि प्रशासन की कार्रवाई को केवल मंदिर हटाने की कार्रवाई के तौर पर देखे जाने के बजाय जमीन और जल निकाय से जुड़े विवाद के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। प्रशासन की कार्रवाई के पीछे कानूनी और भूमि संबंधी आधार बताए जा रहे हैं, जबकि ग्रामीण धार्मिक स्थल और लंबे समय से चले आ रहे उपयोग का हवाला देकर सवाल उठा रहे हैं।
ग्रामीणों ने लगाए बिल्डर से मिलीभगत के आरोप
कार्रवाई के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मंदिर परिसर को हटाने की कार्रवाई के पीछे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। कुछ स्थानीय नेताओं और राजस्थान के तिजारा से विधायक महंत बालक नाथ ने भी प्रशासन पर बिल्डरों के दबाव में कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
हालांकि, ये आरोप ग्रामीणों और अन्य विरोध कर रहे पक्षों की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मामले में प्रशासन या संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।
तिजारा विधायक महंत बालक नाथ भी पहुंचे
मंदिर पर कार्रवाई की सूचना मिलने के बाद राजस्थान के तिजारा से विधायक महंत बालक नाथ भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए और ग्रामीणों के समर्थन में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को मामले की पूरी जानकारी सही तरीके से नहीं दी गई।
मंदिर से जुड़े विवाद में साधु-संतों के पहुंचने और विरोध जताने की खबरों ने भी मामले को संवेदनशील बना दिया है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया।
रविवार को महापंचायत, आगे की रणनीति पर नजर
मंदिर तोड़े जाने के विरोध में ग्रामीणों ने अब महापंचायत का ऐलान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, रविवार सुबह झाड़सा क्षेत्र में पंचायत आयोजित की जानी है। इसके लिए 11 सदस्यीय कमेटी गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पंचायत में मंदिर की कार्रवाई के विरोध, प्रशासन के खिलाफ आगे की रणनीति और ग्रामीणों की मांगों पर चर्चा होने की संभावना है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि महापंचायत में ग्रामीण क्या फैसला लेते हैं और प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है। एक तरफ जमीन और कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का प्रशासनिक पक्ष है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण मंदिर की धार्मिक आस्था, पुराना इतिहास और जमीन के इस्तेमाल को लेकर अपनी आपत्ति जता रहे हैं।
मामला अब स्थानीय विवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। महापंचायत के बाद आंदोलन की दिशा क्या होगी और क्या प्रशासन-ग्रामीणों के बीच बातचीत का रास्ता निकलेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।