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राष्ट्रपति के पूर्व ADC ऋषभ सांब्याल ने क्यों नहीं की शादी?

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व Aide-de-Camp (ADC) रहे मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल इन दिनों अपने सैन्य करियर के साथ-साथ निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा में हैं। भारतीय सेना में करीब 12 साल सेवा देने वाले सांब्याल ने हाल ही में समय से पहले रिटायरमेंट लिया। इसके बाद राज शमानी के पॉडकास्ट में […]

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  • September 13, 2026 8:02 pm IST, Published 20 seconds ago

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व Aide-de-Camp (ADC) रहे मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल इन दिनों अपने सैन्य करियर के साथ-साथ निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा में हैं। भारतीय सेना में करीब 12 साल सेवा देने वाले सांब्याल ने हाल ही में समय से पहले रिटायरमेंट लिया। इसके बाद राज शमानी के पॉडकास्ट में उन्होंने अपने सैन्य सफर, राष्ट्रपति भवन में ADC की जिम्मेदारियों और इस पद के दौरान किए गए निजी त्याग के बारे में खुलकर बात की।

उनके बयान का सबसे ज्यादा चर्चा में आया हिस्सा उनकी शादी से जुड़ा रहा। जब उनसे पूछा गया कि राष्ट्रपति के ADC के रूप में सेवा के दौरान उन्होंने सबसे बड़ा त्याग क्या किया, तो उन्होंने अपनी निजी जिंदगी का जिक्र किया। सांब्याल ने कहा कि वह शादीशुदा नहीं हैं और ADC की जिम्मेदारी के दौरान शादी करना संभव नहीं था। उनके मुताबिक परिवार से दूर रहना और सामान्य जिंदगी न जी पाना उनके लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत त्याग रहा।

राष्ट्रपति के ADC की नौकरी में ऐसा क्या है खास?

मेजर ऋषभ सांब्याल के मुताबिक राष्ट्रपति के ADC की जिम्मेदारी सामान्य सैन्य नियुक्ति से काफी अलग होती है। इस पद पर अधिकारी को हर समय बेहद सतर्क और तैयार रहना पड़ता है। राष्ट्रपति के कार्यक्रमों, यात्राओं और आधिकारिक गतिविधियों के दौरान ADC को प्रोटोकॉल, समन्वय और सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को बेहद गंभीरता से निभाना होता है।

सांब्याल ने बताया कि इस भूमिका में निजी जिंदगी के लिए समय और स्वतंत्रता काफी सीमित हो जाती है। सामान्य व्यक्ति की तरह अचानक दोस्तों के साथ बाहर जाना, डिनर का प्लान बनाना या निजी रिश्तों को समय देना आसान नहीं रहता। उनके अनुसार ड्यूटी की प्राथमिकता इतनी अधिक होती है कि निजी जीवन पीछे छूट जाता है।

शादी को लेकर ऋषभ सांब्याल ने क्या कहा?

ऋषभ सांब्याल के बयान के मुताबिक राष्ट्रपति के ADC के तौर पर उनकी सेवा के दौरान शादी की अनुमति नहीं थी। उन्होंने इसे अपने करियर के सबसे बड़े व्यक्तिगत त्यागों में से एक बताया। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि उनका बयान उनकी ADC सेवा के दौरान लागू नियम/शर्त के संदर्भ में था। इसे यह अर्थ नहीं दिया जाना चाहिए कि सेना के हर अधिकारी के लिए शादी पर ऐसी पाबंदी होती है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सांब्याल ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी शादी नहीं की है और फिलहाल शादी की कोई योजना नहीं बताई है। इसलिए उनकी हालिया सैन्य सेवा समाप्ति को शादी से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।

सबसे बड़ा बलिदान’ क्यों बताया निजी जिंदगी को?

सांब्याल की कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि उन्होंने सैन्य दबाव या लंबी ड्यूटी को अपना सबसे बड़ा त्याग नहीं बताया। इसके बजाय उन्होंने अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को पीछे छोड़ने की बात कही।

उनके मुताबिक राष्ट्रपति के साथ लगातार रहने वाली जिम्मेदारी में सामान्य सामाजिक जीवन के लिए बहुत कम जगह बचती है। परिवार से दूरी, लगातार सतर्क रहने की जरूरत और हर समय ड्यूटी के लिए तैयार रहना इस भूमिका का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी बताया कि वह अपने लिए रोजाना कुछ समय अकेले बिताना पसंद करते हैं। इस समय में वह खुद के साथ रहकर सोचते और नई चीजें सीखते थे। यानी उनके लिए अकेलापन पूरी तरह नकारात्मक अनुभव नहीं था, बल्कि कभी-कभी यह आत्मचिंतन का अवसर भी बन जाता था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कैसा रहा रिश्ता?

ADC के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए सांब्याल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ अपने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रपति को मां जैसी भावना से जोड़कर याद किया और बताया कि तीन साल के कार्यकाल के दौरान उनके बीच बेहद सम्मान और आत्मीयता का रिश्ता बना।

सांब्याल राष्ट्रपति के बेहद करीब रहकर काम करते थे। यही वजह है कि उनके काम की जिम्मेदारी सिर्फ औपचारिक प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं थी। उन्हें राष्ट्रपति के कार्यक्रमों और यात्राओं के दौरान लगातार सक्रिय रहना पड़ता था।

उनका यह अनुभव बताता है कि राष्ट्रपति के ADC की चमकदार वर्दी और सार्वजनिक पहचान के पीछे कितनी बड़ी व्यक्तिगत जिम्मेदारी छिपी होती है।

12 साल की सैन्य सेवा के बाद क्यों लिया रिटायरमेंट?

ऋषभ सांब्याल ने भारतीय सेना में करीब 12 वर्ष सेवा की। वह विशेष बलों में भी रहे और बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC के रूप में करीब तीन साल जिम्मेदारी निभाई। हाल में उन्होंने समय से पहले सेना से रिटायरमेंट लिया, जिसके बाद उनके फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुईं।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपने रिटायरमेंट को शादी से नहीं जोड़ा। उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को इस फैसले का अहम कारण बताया। उनका कहना था कि एक बेटे के तौर पर परिवार के प्रति भी उनकी कुछ जिम्मेदारियां हैं और अब उन्हें उन जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने का समय लगा।

सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा

राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीरों और व्यक्तित्व के कारण ऋषभ सांब्याल सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हुए। उन्हें लेकर कई तरह की अफवाहें भी सामने आईं, जिनमें उनकी निजी जिंदगी और शादी से संबंधित दावे शामिल थे। सांब्याल ने ऐसी अफवाहों पर भी प्रतिक्रिया दी और बताया कि गलत सूचनाओं का असर उनके परिवार पर पड़ता है।

उनकी कहानी इसलिए भी लोगों का ध्यान खींच रही है क्योंकि आम तौर पर जनता राष्ट्रपति के साथ दिखाई देने वाले ADC को सिर्फ एक सैन्य अधिकारी के रूप में देखती है। लेकिन सांब्याल ने बताया कि इस प्रतिष्ठित पद के पीछे व्यक्तिगत समय, परिवार और सामान्य जिंदगी से जुड़े कई समझौते भी होते हैं।

निष्कर्ष

मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल की शादी को लेकर सामने आया बयान उनके निजी जीवन और सैन्य सेवा के बीच संघर्ष की एक झलक देता है। राष्ट्रपति के ADC के रूप में उन्होंने जिस जिम्मेदारी को निभाया, उसमें अनुशासन, सतर्कता और प्रोटोकॉल सर्वोच्च प्राथमिकता रहे। इसी वजह से उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को पीछे रखने को सबसे बड़ा त्याग बताया।

हालांकि, उनकी सेना से समयपूर्व विदाई को शादी से जोड़ना सही नहीं है। उपलब्ध बयानों के अनुसार उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए यह कठिन फैसला लिया। उनकी कहानी यह बताती है कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था के साथ काम करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारियों के पीछे व्यक्तिगत स्तर पर कितने बड़े त्याग छिपे हो सकते हैं।

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