नोएडा: अनुष्ठान के बाद कथित तौर पर मुराद पूरी नहीं होने से नाराज आरोपियों द्वारा एक पुरोहित को अगवा कर बंधक बनाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुरोहित को जौनपुर बुलाकर उसका अपहरण किया गया और परिवार से एक लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। शिकायत मिलने के बाद सेक्टर-113 थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पुरोहित को सुरक्षित मुक्त करा लिया।
पुलिस के अनुसार, मामला नोएडा के सेक्टर-113 थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां रहने वाले एक पुरोहित ने कुछ समय पहले जौनपुर जाकर एक अनुष्ठान कराया था। बताया जा रहा है कि अनुष्ठान कराने वाले लोगों की मुराद पूरी नहीं हुई। इसके बाद आरोपियों ने पुरोहित को दोबारा जौनपुर बुलाने की योजना बनाई।
आरोप है कि पुरोहित को किसी बहाने से जौनपुर बुलाया गया और वहां पहुंचने के बाद उसे बंधक बना लिया गया। इसके बाद आरोपियों ने अनुष्ठान में खर्च हुए पैसे वापस करने के नाम पर एक लाख रुपये की मांग की। रकम नहीं मिलने तक पुरोहित को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया। जब पुरोहित काफी समय तक वापस नहीं लौटा तो उसके परिजनों को चिंता हुई। परिवार की ओर से मामले की जानकारी नोएडा पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पुरोहित की तलाश के लिए कार्रवाई तेज कर दी।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आशीष और उसके एक साथी को पकड़ लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से पुरोहित को भी मुक्त करा लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने पुरोहित से अनुष्ठान कराया था और दावा किया जा रहा है कि उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई। इसी बात को लेकर उन्होंने अनुष्ठान में खर्च रकम वापस लेने का दबाव बनाया। मामला बाद में अपहरण और रंगदारी की मांग तक पहुंच गया। हालांकि, घटना के पीछे आरोपियों की वास्तविक मंशा और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
सेक्टर-113 थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस घटना में कितने लोग शामिल थे और पुरोहित को किस परिस्थिति में जौनपुर बुलाया गया था। इसके साथ ही पुलिस आरोपियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।
फिलहाल पुलिस ने दो संदिग्धों को पकड़कर पुरोहित को सुरक्षित बरामद कर लिया है। घटना ने अनुष्ठान और धार्मिक गतिविधियों के नाम पर होने वाले विवादों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस मामले में आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।