आगरा: ताजमहल में हर दिन पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) अब एक वैज्ञानिक अध्ययन कराने की तैयारी में है। इसके तहत यह तय करने की कोशिश की जाएगी कि ऐतिहासिक स्मारक की संरचना, परिसर और पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक दिन में कितने लोग ताजमहल का सुरक्षित तरीके से भ्रमण कर सकते हैं। इस अध्ययन को कैरिंग कैपेसिटी तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, ASI के आगरा सर्किल की ओर से अध्ययन कराने का प्रस्ताव दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेजा गया है। प्रस्ताव में इस काम के लिए करीब सवा करोड़ रुपये के बजट की मांग की गई है। हालांकि अध्ययन को मंजूरी देने और इसके लिए धनराशि जारी करने का अंतिम निर्णय ASI मुख्यालय को लेना है।
अध्ययन के लिए IIT दिल्ली की विशेषज्ञ टीम को जिम्मेदारी दिए जाने की तैयारी है। यह टीम ताजमहल परिसर में पर्यटकों की आवाजाही, भीड़ के दबाव और स्मारक पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सकती है। इसका उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या निर्धारित करना नहीं, बल्कि यह समझना भी होगा कि बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के बीच स्मारक की सुरक्षा और संरक्षण को किस तरह बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
ताजमहल देश के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और यहां वर्षभर बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। त्योहारों, छुट्टियों और पर्यटन सीजन के दौरान परिसर में भीड़ और बढ़ जाती है। ऐसे में पर्यटकों की संख्या और स्मारक की क्षमता के बीच संतुलन बनाए रखना संरक्षण की दृष्टि से अहम माना जाता है।
IIT दिल्ली की टीम ताजमहल का प्रारंभिक दौरा मई में कर चुकी है। इस दौरे के दौरान टीम ने स्मारक और उसके आसपास के पर्यटक प्रबंधन से जुड़े पहलुओं को समझने की कोशिश की थी। अब प्रस्तावित विस्तृत अध्ययन के जरिए पर्यटकों की आवाजाही और ताजमहल की वहन क्षमता का वैज्ञानिक आकलन किए जाने की संभावना है।
कैरिंग कैपेसिटी का निर्धारण होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि एक निर्धारित अवधि में ताजमहल में कितने पर्यटकों को प्रवेश दिया जाना उपयुक्त होगा। इससे अत्यधिक भीड़ की स्थिति में स्मारक के संरक्षण और पर्यटकों की सुविधा के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अध्ययन पूरा होने के बाद पर्यटकों की संख्या की कोई निश्चित सीमा कितनी तय की जाएगी।
ASI का प्रस्ताव फिलहाल दिल्ली मुख्यालय के विचाराधीन है। अध्ययन को मंजूरी मिलने के बाद विशेषज्ञ टीम विस्तृत प्रक्रिया के तहत आंकड़े जुटा सकती है और उसके आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट में पर्यटकों की संख्या, उनके आवागमन, परिसर की क्षमता और स्मारक के संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जा सकता है।
ताजमहल विश्व प्रसिद्ध धरोहर होने के साथ-साथ आगरा के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित करने से जुड़े किसी भी फैसले का असर पर्यटन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि कैरिंग कैपेसिटी निर्धारित करने से पहले वैज्ञानिक अध्ययन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल ASI मुख्यालय के फैसले का इंतजार है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद IIT दिल्ली की टीम के विस्तृत अध्ययन का रास्ता साफ होगा। इसके बाद विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ताजमहल की दैनिक पर्यटक क्षमता को लेकर आगे की व्यवस्था तय की जा सकती है।