गोरखपुर एम्स में सितंबर अंत तक शुरू होगी एयर एंबुलेंस सेवा

गोरखपुर: पूर्वी उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। गोरखपुर स्थित AIIMS Gorakhpur में एयर एंबुलेंस सेवा शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। संस्थान के परिसर में मौजूद हेलीपैड को एयर एंबुलेंस के संचालन के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों […]

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  • September 13, 2026 8:23 pm IST, Published 13 seconds ago

गोरखपुर: पूर्वी उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। गोरखपुर स्थित AIIMS Gorakhpur में एयर एंबुलेंस सेवा शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। संस्थान के परिसर में मौजूद हेलीपैड को एयर एंबुलेंस के संचालन के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जरूरी सुरक्षा मानकों और तकनीकी तैयारियों को पूरा करने के बाद सितंबर 2026 के अंत तक सेवा शुरू होने की उम्मीद है।

यह सुविधा खास तौर पर उन मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिनकी हालत गंभीर है और जिन्हें कम से कम समय में किसी बड़े चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना जरूरी होता है। हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर सड़क हादसे, गंभीर चोट, आपदा या बड़े स्तर की दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में समय पर इलाज मिलना मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

हेलीपैड को एयर एंबुलेंस के लिए किया जा रहा तैयार

AIIMS गोरखपुर परिसर में पहले से हेलीपैड मौजूद है, लेकिन इसे एयर एंबुलेंस की जरूरतों के हिसाब से और बेहतर बनाया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, हेलीपैड की सुरक्षा और संचालन से जुड़े जरूरी मानकों को पूरा किया जा रहा है। इसके लिए एयरफोर्स के अधिकारियों से भी तकनीकी सुझाव लिए गए हैं। निरीक्षण और जरूरी सुधारों के बाद इसे नियमित रूप से इस्तेमाल में लाने की तैयारी है।

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे अहम बात यह है कि हेलीपैड अस्पताल के ओपीडी क्षेत्र के काफी नजदीक है। इसका फायदा यह होगा कि हेलीकॉप्टर या एयर एंबुलेंस से पहुंचने वाले मरीज को अस्पताल की इमरजेंसी या ट्रॉमा सेंटर तक ले जाने में अतिरिक्त समय कम लगेगा।

गंभीर मरीजों के मामले में यही कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचने में ट्रैफिक, दूरी और सड़क की स्थिति जैसी कई चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में सीधे अस्पताल परिसर में एयर एंबुलेंस की लैंडिंग होने से मरीज को तेजी से उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

लखनऊ और दिल्ली पहुंचने में लगेगा काफी कम समय

एयर एंबुलेंस सुविधा शुरू होने के बाद गोरखपुर से गंभीर मरीजों को बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने में लगने वाला समय काफी कम होने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एयर ट्रांसफर के जरिए गोरखपुर से लखनऊ करीब 35 से 40 मिनट में पहुंचा जा सकता है, जबकि दिल्ली पहुंचने में लगभग 1 घंटे 45 मिनट का समय लग सकता है।

फिलहाल गंभीर मरीजों को दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफर किए जाने पर सड़क एंबुलेंस, ट्रेन या कमर्शियल फ्लाइट जैसे विकल्पों का सहारा लेना पड़ सकता है। मरीज की स्थिति और दूरी के आधार पर इस पूरी प्रक्रिया में कई घंटे लग सकते हैं। गंभीर बीमारी में इतना लंबा ट्रांसफर समय कई बार उपचार की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।

एयर एंबुलेंस की सुविधा से ऐसे मरीजों को तेजी से उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने का विकल्प उपलब्ध होगा।

आसपास के जिलों के मरीजों को भी मिल सकता है फायदा

AIIMS गोरखपुर सिर्फ गोरखपुर शहर ही नहीं, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान है। ऐसे में एयर एंबुलेंस और हेलीपैड की सुविधा का लाभ आसपास के जिलों के गंभीर मरीजों को भी मिल सकता है।

दुर्गम इलाकों या ऐसे क्षेत्रों से जहां सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचने में लंबा समय लगता है, गंभीर मरीजों को एयर ट्रांसफर के जरिए अपेक्षाकृत जल्दी AIIMS गोरखपुर लाने की संभावना भी बढ़ेगी। इससे गंभीर दुर्घटनाओं और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान अस्पताल तक पहुंचने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।

इसके अलावा प्राकृतिक आपदा, बड़े सड़क हादसे या mass casualty जैसी स्थिति में भी एयर एंबुलेंस व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

गोल्डन आवर’ में इलाज पहुंचाने में मदद

मेडिकल इमरजेंसी में शुरुआती समय को अक्सर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खासकर स्ट्रोक, हार्ट अटैक, गंभीर चोट और सड़क दुर्घटना के मामलों में जितनी जल्दी मरीज को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिलती है, उतना ही उपचार का अवसर बेहतर हो सकता है।

AIIMS गोरखपुर का एयर एंबुलेंस इंफ्रास्ट्रक्चर इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अस्पताल परिसर में हेलीकॉप्टर के उतरने की सुविधा होने से एयरपोर्ट से अस्पताल तक अलग से सड़क यात्रा करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे मरीज को सीधे चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

हेलीपैड से इमरजेंसी तक आसान होगी आवाजाही

हेलीपैड की लोकेशन AIIMS के चिकित्सा क्षेत्रों के नजदीक होना इस व्यवस्था की बड़ी खासियत है। एयर एंबुलेंस से मरीज के पहुंचने के बाद उसे अस्पताल के संबंधित विभाग तक ले जाने में कम समय लगने की संभावना है।

रिपोर्ट के अनुसार, हेलीपैड से मरीज को इमरजेंसी या संबंधित वार्ड तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे एयर एंबुलेंस से उतरने के बाद मरीज को अस्पताल के अंदर ले जाने की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।

सेवा शुरू होने से पहले पूरे होंगे सुरक्षा मानक

हालांकि एयर एंबुलेंस सेवा को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं, लेकिन इसे निर्धारित सुरक्षा और तकनीकी मानकों को पूरा करने के बाद ही संचालन में लाया जाएगा। रिपोर्टों में बताया गया है कि हेलीपैड से संबंधित जरूरी निरीक्षण और सुधार की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों की ओर से सितंबर के अंत तक सेवा शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। इसे निश्चित लॉन्च डेट के बजाय मौजूदा तैयारी के आधार पर बताई गई समय-सीमा के रूप में देखा जाना चाहिए।

AIIMS गोरखपुर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, संस्थान केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत संचालित एक स्वायत्त संस्थान है और यहां मरीजों के लिए विभिन्न चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं।

पूर्वांचल के लिए क्यों अहम है यह सुविधा?

गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में एयर एंबुलेंस सुविधा शुरू होने पर गंभीर मरीजों के रेफरल और ट्रांसफर की व्यवस्था को नया विकल्प मिलेगा।

सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को हो सकता है जिन्हें तत्काल उच्च स्तरीय उपचार की आवश्यकता है। अगर हेलीपैड और एयर एंबुलेंस सेवा तय समय के अनुसार शुरू होती है, तो यह गोरखपुर ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों के लिए इमरजेंसी मेडिकल ट्रांसपोर्ट का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

फिलहाल नजर इस बात पर है कि हेलीपैड से जुड़े अंतिम सुरक्षा और तकनीकी कार्य कब तक पूरे होते हैं और एयर एंबुलेंस सेवा किस मॉडल के तहत संचालित की जाती है। लेकिन इतना साफ है कि AIIMS गोरखपुर में यह सुविधा शुरू होना गंभीर मरीजों के लिए इलाज तक पहुंचने के समय को कम करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।

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