सोलर बिजली बेचने का मौका, यूपी में शुरू होगा नया सिस्टम

उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में बिजली के इस्तेमाल और अतिरिक्त बिजली से कमाई का तरीका बदल सकता है।

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  • October 4, 2026 8:05 pm IST, Published 11 minutes ago

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में बिजली के इस्तेमाल और अतिरिक्त बिजली से कमाई का तरीका बदल सकता है। गाजियाबाद में पियर-टू-पियर (P2P) एनर्जी ट्रेडिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत सोलर पैनल से जरूरत से ज्यादा पैदा होने वाली बिजली को दूसरे उपभोक्ता, खासकर आसपास के उपभोक्ताओं को बेचने का विकल्प मिल सकेगा। मौजूदा जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था अभी तैयारी के चरण में है और इसके लिए लेनदेन, दर तथा ग्रिड शुल्क से जुड़े नियम तय किए जाने हैं।

इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह होगी कि बिजली बेचने वाले और खरीदने वाले के बीच लेनदेन डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होगा। बिजली के लिए अलग से कोई नई लाइन बिछाने की जरूरत नहीं होगी। बिजली मौजूदा वितरण ग्रिड के माध्यम से ही प्रवाहित होगी, जबकि डिजिटल सिस्टम यह निर्धारित करने में मदद करेगा कि किस उपभोक्ता की अतिरिक्त बिजली किस खरीदार तक पहुंचाई जानी है।

क्या है P2P एनर्जी ट्रेडिंग व्यवस्था?

P2P यानी Peer-to-Peer Energy Trading ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बिजली पैदा करने वाला उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त बिजली को दूसरे उपभोक्ता के साथ व्यापार कर सकता है। रूफटॉप सोलर के मामले में घर या प्रतिष्ठान को एक तरह से बिजली उत्पादक उपभोक्ता माना जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी घर में सोलर पैनल से महीने में 300 यूनिट बिजली पैदा हुई और घरेलू खपत 220 यूनिट रही, तो बची हुई 80 यूनिट बिजली अतिरिक्त मानी जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में ऐसी बिजली को ग्रिड में भेजकर निर्धारित नियमों के अनुसार बिल में समायोजित किया जाता है। नई P2P व्यवस्था का उद्देश्य इस अतिरिक्त ऊर्जा को दूसरे उपभोक्ता की जरूरत से जोड़ने का विकल्प उपलब्ध कराना है।

मौजूदा व्यवस्था से कैसे अलग होगा सिस्टम?

फिलहाल उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं के लिए नेट मीटरिंग जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण यानी UPNEDA के अनुसार ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सिस्टम में सोलर से पैदा बिजली पहले उपभोक्ता की जरूरत पूरी करती है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है।

नई P2P व्यवस्था में अंतर यह होगा कि अतिरिक्त बिजली के लिए केवल पारंपरिक बिल समायोजन पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर दूसरे उपभोक्ता के साथ डिजिटल रूप से लेनदेन का विकल्प विकसित किया जा सकता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि बिजली की अंतिम बिक्री दर, ग्रिड इस्तेमाल का शुल्क और अन्य तकनीकी व नियामकीय शर्तें अभी स्पष्ट रूप से तय नहीं हुई हैं। इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित/तैयार की जा रही व्यवस्था के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।

गाजियाबाद में क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

गाजियाबाद में बड़ी संख्या में उपभोक्ता रूफटॉप सोलर और नेट मीटरिंग व्यवस्था से जुड़े हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक जिले में करीब 9,072 उपभोक्ता नेट मीटरिंग और लगभग 950 उपभोक्ता नेट बिलिंग व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं। दोनों व्यवस्थाओं को मिलाकर लगभग 10,022 उपभोक्ता सोलर से संबंधित इन प्रणालियों से जुड़े बताए गए हैं।

ऐसे में यदि P2P मॉडल सफलतापूर्वक लागू होता है तो सोलर उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त बिजली को स्थानीय स्तर पर उपयोगी बनाने का एक नया रास्ता खुल सकता है।

बिजली की खरीद-बिक्री कैसे होगी?

प्रस्तावित मॉडल में डिजिटल प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सोलर उपभोक्ता के पास यदि जरूरत से ज्यादा बिजली उपलब्ध है तो सिस्टम पर उसकी उपलब्धता दर्ज की जा सकती है। दूसरी तरफ किसी उपभोक्ता को बिजली की जरूरत होने पर वह इस ऊर्जा को खरीदने की प्रक्रिया में शामिल हो सकता है।

इस पूरी प्रक्रिया में बिजली का वास्तविक प्रवाह मौजूदा ग्रिड नेटवर्क से ही होगा। यानी पड़ोसी के घर से दूसरे घर तक अलग तार डालकर बिजली पहुंचाने की जरूरत नहीं होगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से ऊर्जा के लेनदेन और हिसाब-किताब को संभालने का माध्यम बनेगा।

ग्रिड इस्तेमाल के लिए देना होगा शुल्क

P2P सिस्टम में वितरण नेटवर्क का इस्तेमाल होने के कारण ग्रिड से संबंधित शुल्क भी महत्वपूर्ण होगा। उपलब्ध रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रिड के इस्तेमाल के बदले संबंधित निगम शुल्क ले सकता है। हालांकि शुल्क कितना होगा, यह अभी निर्धारित नहीं किया गया है। इसी तरह अतिरिक्त बिजली की बिक्री की दर को लेकर भी अंतिम निर्णय बाकी है।

यही कारण है कि सोलर उपभोक्ताओं को अभी इस व्यवस्था से होने वाली संभावित कमाई को लेकर कोई निश्चित अनुमान नहीं लगाना चाहिए। अंतिम लाभ बिजली की बिक्री दर, ग्रिड शुल्क और नियामकीय नियमों पर निर्भर करेगा।

यूपी की सोलर नीति से भी जुड़ी है पहल

उत्तर प्रदेश की Solar Energy Policy 2022 में राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और रूफटॉप सोलर को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति में 2026-27 तक 22,000 मेगावाट सोलर पावर प्रोजेक्ट विकसित करने का लक्ष्य तथा लगभग 13.50 लाख घरों को नीति अवधि के दौरान रूफटॉप सोलर से जोड़ने की बात कही गई है।

सरकार की नीति में सौर ऊर्जा के उपयोग, निजी भागीदारी और रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त सौर बिजली के बेहतर उपयोग की व्यवस्था इस व्यापक लक्ष्य के अनुरूप एक संभावित कदम हो सकती है।

उपभोक्ताओं को क्या फायदा हो सकता है?

यदि P2P व्यवस्था नियामकीय मंजूरी और व्यावहारिक परीक्षण के बाद प्रभावी रूप से लागू होती है, तो सोलर उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बिजली के लिए एक और विकल्प मिल सकता है। इससे सौर ऊर्जा का स्थानीय उपयोग बढ़ाने, उपभोक्ताओं को ऊर्जा व्यापार में भागीदार बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की संभावना है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि व्यवस्था किन उपभोक्ताओं पर लागू होगी, किस क्षमता के सोलर सिस्टम इसके दायरे में आएंगे और बिक्री की अंतिम प्रक्रिया क्या होगी। इन सभी पहलुओं पर संबंधित नियामकीय और वितरण संस्थाओं की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी होंगे।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में सोलर बिजली के क्षेत्र में P2P एनर्जी ट्रेडिंग की तैयारी ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में कदम हो सकती है। खासकर गाजियाबाद जैसे शहरों में बड़ी संख्या में रूफटॉप सोलर उपभोक्ता होने के कारण इसका प्रभाव व्यापक हो सकता है। फिलहाल इसे तैयारी के चरण में प्रस्तावित नई व्यवस्था के तौर पर देखना चाहिए। अंतिम दर, ग्रिड शुल्क, पात्रता और संचालन के नियम जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आम उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त सौर बिजली से कितना आर्थिक लाभ उठा पाएंगे।

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