लखनऊ। बाहर खाना खाने वाले लोगों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य प्रतिष्ठानों में सुरक्षा, स्वच्छता, खाद्य सामग्री की जानकारी और उपभोक्ता हितों को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य ग्राहकों को भोजन से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ खाद्य प्रतिष्ठानों की जवाबदेही तय करना है। नए नियमों के तहत लाइसेंस से लेकर मेन्यू कार्ड, एलर्जन, कैलोरी, पानी की जांच और खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले एडिटिव्स तक कई बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार खाद्य प्रतिष्ठानों को अब ग्राहकों के लिए खाद्य सामग्री से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ ही विभागीय प्रवर्तन और निरीक्षण के दौरान इन सभी मानकों की जांच-पड़ताल की जाएगी। यानी आने वाले समय में रेस्टोरेंट, होटल और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों के लिए केवल स्वाद और साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि खाने से जुड़ी पारदर्शी जानकारी देना भी जरूरी होगा।
लाइसेंस से लेकर एलर्जी की जानकारी तक जरूरी
नए निर्देशों में खाद्य प्रतिष्ठानों को लाइसेंस से संबंधित जानकारी के साथ-साथ खाद्य पदार्थों में मौजूद संभावित एलर्जन की जानकारी देने पर जोर दिया गया है। इसका सीधा फायदा उन उपभोक्ताओं को मिलेगा, जिन्हें किसी विशेष खाद्य सामग्री से एलर्जी हो सकती है।
मेन्यू कार्ड में उपलब्ध खाद्य पदार्थों से जुड़ी आवश्यक जानकारी स्पष्ट तरीके से प्रदर्शित करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। इससे ग्राहक भोजन का ऑर्डर करने से पहले यह समझ सकेंगे कि उसमें कौन-कौन सी प्रमुख सामग्री या संभावित एलर्जन मौजूद हो सकते हैं।
यह व्यवस्था खास तौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और एलर्जी से प्रभावित लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है। उपभोक्ता को भोजन की जानकारी पहले मिलने से वह अपनी आवश्यकता और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के अनुसार विकल्प चुन सकेगा।
पानी की गुणवत्ता की जांच भी होगी अहम
खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले पानी को लेकर भी दिशा-निर्देशों में महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। संबंधित निर्देशों के अनुसार आईएस 10500 मानक के अनुरूप पानी की जांच रिपोर्ट उपलब्ध रखने की बात कही गई है।
पानी की गुणवत्ता खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भोजन तैयार करने, पेय पदार्थ बनाने और ग्राहकों को उपलब्ध कराने में इस्तेमाल होने वाला पानी मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान पानी की जांच रिपोर्ट को भी देखा जा सकता है।
खाद्य प्रतिष्ठानों को कर्मचारियों से संबंधित कुछ जरूरी दस्तावेज भी व्यवस्थित रूप से रखने होंगे। इनमें स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, पानी की जांच रिपोर्ट, पेस्ट कंट्रोल प्रमाण-पत्र और संबंधित बिल जैसे दस्तावेज शामिल हैं। विभागीय निरीक्षण के दौरान इन रिकॉर्ड की उपलब्धता और प्रामाणिकता की जांच की जा सकती है।
निरीक्षण के दौरान होगी बिंदुवार जांच
दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि विभागीय प्रवर्तन एवं निरीक्षण कार्रवाई के दौरान निर्धारित मानकों के अनुसार प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी। इसका मतलब यह है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी निरीक्षण के समय केवल रसोई की साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दस्तावेज, पानी, मेन्यू और खाद्य सामग्री से जुड़ी जानकारी भी देख सकते हैं।
इससे खाद्य कारोबारियों पर नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी। वहीं उपभोक्ताओं को भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनसे जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी।
अजीनोमोटो इस्तेमाल होने पर देनी होगी चेतावनी
नए दिशा-निर्देशों में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG), जिसे आम तौर पर अजीनोमोटो कहा जाता है, के इस्तेमाल को लेकर भी स्पष्टता पर जोर दिया गया है।
यदि किसी खाद्य पदार्थ में MSG का इस्तेमाल किया जाता है तो उसके पैकेज या मेन्यू कार्ड पर निर्धारित घोषणा करने की बात कही गई है। विशेष रूप से 12 माह से कम आयु के शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के लिए इसके सेवन को लेकर चेतावनी प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है।
इसका उद्देश्य ग्राहकों को भोजन में इस्तेमाल होने वाले ऐसे घटकों के बारे में पहले से जानकारी देना है, ताकि वे अपनी जरूरत और सावधानी के अनुसार खाद्य पदार्थ का चुनाव कर सकें।
आर्टिफिशियल स्वीटनर और कलर की जानकारी भी जरूरी
खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किए जाने वाले आर्टिफिशियल स्वीटनर और आर्टिफिशियल कलर की जानकारी भी ग्राहकों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिष्ठानों को संबंधित खाद्य पदार्थ के पैकेज या मेन्यू कार्ड पर इस्तेमाल किए गए स्वीटनर और कलर का नाम घोषित करना होगा।
मेन्यू कार्ड पर एलर्जन संबंधी सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण बताई गई है। इससे ग्राहक भोजन लेने से पहले उसमें मौजूद संभावित एलर्जी पैदा करने वाले घटकों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे।
आज के समय में बड़ी संख्या में लोग खाद्य एलर्जी, विशेष डाइट या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भोजन का चयन सावधानी से करते हैं। ऐसे में मेन्यू पर स्पष्ट जानकारी उपभोक्ता के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
बड़े रेस्टोरेंट में कैलोरी की जानकारी भी दिखानी होगी
केंद्रीय लाइसेंस वाले खाद्य प्रतिष्ठानों या ऐसे आउटलेट जहां दस या उससे अधिक प्रतिष्ठान संचालित होते हैं, उन्हें मेन्यू कार्ड, बोर्ड या बुकलेट में खाद्य पदार्थों की कैलोरी संबंधी जानकारी प्रदर्शित करनी होगी।
इसके तहत सर्विंग के हिसाब से भोजन में कितनी किलो कैलोरी है, इसकी जानकारी ग्राहक को उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। साथ ही सर्विंग साइज भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा।
यह व्यवस्था उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है जो अपनी कैलोरी खपत पर नजर रखते हैं। इससे ग्राहक भोजन का चयन अधिक जागरूक तरीके से कर सकेंगे।
कुकिंग मीडियम की जानकारी भी होगी जरूरी
दिशा-निर्देशों में कुकिंग मीडियम का उल्लेख भी अनिवार्य किए जाने की बात कही गई है। यानी खाद्य पदार्थ तैयार करने में किस प्रकार के तेल या अन्य कुकिंग मीडियम का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसकी जानकारी निर्धारित तरीके से उपलब्ध करानी होगी।
कुल मिलाकर नए निर्देशों का फोकस खाद्य प्रतिष्ठानों में पारदर्शिता, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने पर है। ग्राहकों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उन्हें भोजन खरीदने या ऑर्डर करने से पहले उससे संबंधित अधिक जानकारी मिल सकेगी।
खाद्य कारोबारियों के लिए यह निर्देश अपनी व्यवस्थाओं और रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने का संकेत भी हैं। आने वाले निरीक्षणों में दस्तावेजों से लेकर खाद्य पदार्थों की जानकारी तक कई पहलुओं की जांच की जा सकती है। ऐसे में प्रतिष्ठानों के संचालकों के लिए जरूरी होगा कि वे निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें और ग्राहकों को आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराएं।
अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध सामग्री और विभागीय दिशा-निर्देशों के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार किया गया है। नियमों के वास्तविक अनुपालन में संबंधित विभाग द्वारा जारी नवीनतम आधिकारिक आदेश को अंतिम आधार माना जाना चाहिए।