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पहलगाम हमले पर BRICS का बड़ा फैसला, 21 देशों ने कहा दो टूक

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ सदस्य देशों ने एकजुट रुख अपनाते हुए जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। नई दिल्ली घोषणा में […]

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  • September 13, 2026 9:19 pm IST, Published 50 minutes ago

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ सदस्य देशों ने एकजुट रुख अपनाते हुए जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद को उसके मकसद, स्थान या उसे अंजाम देने वालों के आधार पर किसी भी तरह उचित ठहराने से इनकार किया गया है। साथ ही आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर दिया गया है।

घोषणा में साफ कहा गया कि आतंकवाद एक आपराधिक और अनुचित कृत्य है। आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़ना स्वीकार्य नहीं है। BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें कानून के दायरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पहलगाम हमले की कड़ी निंदा

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले के बाद भारत ने आतंकवाद और उसके नेटवर्क के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार कड़ा रुख अपनाया। अब BRICS की नई दिल्ली घोषणा में इस हमले की स्पष्ट निंदा को भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

घोषणा में आतंकवाद से निपटने के लिए केवल हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय उसके पूरे नेटवर्क पर प्रहार करने की जरूरत बताई गई। इसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद की फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों को भी गंभीरता से उठाया गया है।

टेरर फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों पर भी सख्त संदेश

BRICS के संयुक्त रुख में आतंकवाद की फंडिंग रोकने पर विशेष जोर दिया गया है। घोषणा में आतंकवादी संगठनों को आर्थिक मदद, अवैध वित्तीय प्रवाह और अन्य माध्यमों से मिलने वाली सहायता पर चिंता जताई गई। देशों से ऐसे नेटवर्क की पहचान करने, उन्हें रोकने और आतंकवाद से जुड़े वित्तीय स्रोतों पर कार्रवाई करने के लिए सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया गया।

BRICS ने आतंकवादियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया। घोषणा के मुताबिक आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई तभी संभव है, जब आतंकवादी नेटवर्क, उनकी फंडिंग और उन्हें संरक्षण या सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने वाले तंत्र पर एक साथ कार्रवाई की जाए।

यह रुख भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को मिलने वाले समर्थन का मुद्दा वैश्विक मंचों पर उठाता रहा है।

चीन समेत BRICS देशों का एक सुर

इस घोषणा का सबसे अहम पहलू यह है कि BRICS में भारत के साथ चीन भी शामिल है। पहलगाम हमले की निंदा पर आम सहमति बनना भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है। हालांकि घोषणा में किसी देश का नाम लेकर उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया गया और न ही भारत की किसी सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया गया, लेकिन पहलगाम हमले को आतंकवादी हमला मानकर उसकी निंदा की गई है।

यही वजह है कि नई दिल्ली घोषणा को भारत की आतंकवाद विरोधी कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इससे भारत को यह संदेश देने में मदद मिली है कि आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बड़े हिस्से को एक साझा मंच पर लाया जा सकता है।

आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं’

BRICS घोषणा में कहा गया कि आतंकवाद को उसके मकसद के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। चाहे आतंकवादी गतिविधि कहीं भी हो, किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा की जाए और उसका दावा किया गया उद्देश्य कुछ भी हो, उसे अपराध और अन्यायपूर्ण कृत्य ही माना जाना चाहिए।

यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अक्सर अलग-अलग देशों के रणनीतिक और राजनीतिक हित सामने आते हैं। BRICS की घोषणा में ‘डबल स्टैंडर्ड’ से बचने और आतंकवाद के खिलाफ समान दृष्टिकोण अपनाने की बात भी कही गई है।

संयुक्त राष्ट्र की व्यापक आतंकवाद संधि पर जोर

BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र के तहत व्यापक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी सम्मेलन यानी Comprehensive Convention on International Terrorism को जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने की जरूरत भी दोहराई। भारत लंबे समय से इस प्रस्ताव का समर्थन करता रहा है। इसका उद्देश्य आतंकवाद की साझा और व्यापक अंतरराष्ट्रीय परिभाषा तथा उसके खिलाफ मजबूत वैश्विक कानूनी ढांचा तैयार करना है।

घोषणा में संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी संगठनों और आतंकवादियों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का भी आह्वान किया गया है। इसके साथ ही BRICS के Counter-Terrorism Working Group के माध्यम से सहयोग को और मजबूत करने की बात कही गई है।

BRICS मंच से भारत की बड़ी कूटनीतिक बढ़त

नई दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन में आतंकवाद के अलावा वैश्विक व्यापार, आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन पहलगाम हमले की स्पष्ट निंदा और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संदेश भारत के लिए विशेष रूप से अहम रहा।

BRICS में 11 पूर्ण सदस्य और 10 साझेदार देश हैं, यानी इसका व्यापक प्रारूप 21 देशों तक पहुंचता है। � ऐसे में इस मंच से आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त संदेश का अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अपना महत्व है।

कुल मिलाकर, पहलगाम हमले को लेकर BRICS की नई दिल्ली घोषणा ने भारत की उस मांग को मजबूती दी है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई किसी राजनीतिक सुविधा के आधार पर नहीं, बल्कि समान और स्पष्ट मानदंडों के आधार पर होनी चाहिए। आतंकवाद की फंडिंग, सीमा पार आवाजाही और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई का आह्वान आने वाले समय में BRICS के आतंकवाद विरोधी सहयोग का अहम हिस्सा बन सकता है।

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