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भारत के हेल्थकेयर मॉडल ने ब्रिटेन को किया हैरान, जानें वजह

नई दिल्ली। भारत का हेल्थकेयर सिस्टम अब सिर्फ देश के भीतर ही चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों का ध्यान भी अपनी ओर खींच रहा है। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) से जुड़ी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पेनी डैश ने भारत के हेल्थकेयर मॉडल, तकनीक के इस्तेमाल और मरीजों तक स्वास्थ्य […]

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  • September 14, 2026 7:57 am IST, Published 13 minutes ago

नई दिल्ली। भारत का हेल्थकेयर सिस्टम अब सिर्फ देश के भीतर ही चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों का ध्यान भी अपनी ओर खींच रहा है। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) से जुड़ी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पेनी डैश ने भारत के हेल्थकेयर मॉडल, तकनीक के इस्तेमाल और मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर ऐसी बातें कही हैं, जो भारत के लिए बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखी जा रही हैं। उनके मुताबिक ब्रिटेन को भारत के हेल्थकेयर सिस्टम से सीखने की जरूरत है और आने वाले समय में भारत वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का एक उदाहरण बन सकता है।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक पोस्ट के मुताबिक डॉ. पेनी डैश ने भारत के हेल्थकेयर सिस्टम की तारीफ करते हुए कहा कि भारत जल्द ही ग्लोबल स्टैंडर्ड स्थापित कर सकता है, जिसे दुनिया के दूसरे देश भी अपनाना चाहेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया के कई विकसित देश बढ़ती उम्र की आबादी, स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और अस्पतालों पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

भारत के हेल्थकेयर मॉडल की क्यों हो रही तारीफ?

डॉ. पेनी डैश के अनुसार भारत हेल्थकेयर के क्षेत्र में जिस तरह तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, वह काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। उनका कहना है कि भारत में तकनीक का उपयोग केवल आधुनिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए भी किया जा रहा है।

आज भारत में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ऑनलाइन मेडिकल कंसल्टेशन, डिजिटल डायग्नोस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान और टेक्नोलॉजी से जुड़े हेल्थ प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं। इन बदलावों ने खासकर उन मरीजों के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं, जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचने में पहले काफी कठिनाई होती थी।

भारत शायद दुनिया के लिए मिसाल बन जाए’

पोस्ट में दिए गए डॉ. पेनी डैश के बयान के अनुसार उन्होंने ‘हेल्थटेक आवर’ पॉडकास्ट में भारत के हेल्थकेयर सेक्टर की प्रगति की प्रशंसा की। उन्होंने भारत को लेकर कहा कि देश जिस तेजी से स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, वह प्रभावशाली है।

उनके मुताबिक भारत भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के मामले में दुनिया के लिए एक मिसाल बन सकता है। इस बयान की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि ब्रिटेन की NHS दुनिया की प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में गिनी जाती है। ऐसे में भारत के हेल्थकेयर मॉडल से सीखने की बात सामने आना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

अमेरिका का भी जिक्र, लेकिन भारत को बताया खास

डॉ. डैश ने अमेरिका में हो रहे कुछ अच्छे कामों का भी उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने भारत की विशेष रूप से प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ऐसे तरीकों से किया जा रहा है, जिनके बारे में दूसरे देश शायद अभी केवल कल्पना ही कर सकते हैं।

उनके अनुसार भारत में टेक कंपनियों के संस्थापक, हेल्थकेयर सर्विस से जुड़े मैनेजर और डॉक्टर तकनीक को स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानकर आगे बढ़ रहे हैं। यही सोच भारत को हेल्थटेक के क्षेत्र में तेजी से आगे ले जाने में मदद कर सकती है।

यह बदलाव केवल बड़े निजी अस्पतालों तक सीमित नहीं है। डिजिटल माध्यमों के विस्तार के कारण छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों में भी विशेषज्ञ सलाह, जांच और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक पहुंच बढ़ाने की संभावनाएं बनी हैं।

बढ़ती आबादी के बीच तकनीक बनेगी बड़ा सहारा

दुनिया के कई देशों के सामने उम्रदराज होती आबादी एक बड़ी चुनौती बन रही है। बुजुर्ग आबादी बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की मांग भी बढ़ती है। अस्पतालों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य मेडिकल संसाधनों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।

ऐसे समय में तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक कुशल बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। मरीजों की जानकारी का डिजिटल प्रबंधन, रिमोट कंसल्टेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जांच और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकें डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं।

भारत जैसे विशाल और विविध आबादी वाले देश के लिए यह बदलाव और भी महत्वपूर्ण है। यहां बड़ी आबादी को कम समय में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमेशा से चुनौती रहा है। डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी इस चुनौती को कम करने का एक प्रभावी माध्यम बन सकती है।

भारत के लिए बढ़ता हेल्थटेक बाजार

भारत में हेल्थटेक का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हुआ है। स्टार्टअप कंपनियां मरीजों की अपॉइंटमेंट, ऑनलाइन कंसल्टेशन, मेडिकल रिकॉर्ड, डायग्नोस्टिक सेवाओं और स्वास्थ्य संबंधी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही बड़े अस्पताल और स्वास्थ्य संस्थान भी डिजिटल सिस्टम को अपनाने पर जोर दे रहे हैं।

इसका फायदा मरीजों के साथ-साथ डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों को भी मिल सकता है। डिजिटल सिस्टम के जरिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री को व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे उपचार की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकती है।

हालांकि, हेल्थकेयर में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सुरक्षा, मरीजों की निजता, डिजिटल साक्षरता और तकनीक की विश्वसनीयता जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। भारत के लिए अगला बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होगा कि आधुनिक तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

NHS के लिए भारत से सीखने का संकेत

डॉ. पेनी डैश की टिप्पणी को व्यापक संदर्भ में देखा जाए तो यह भारत के हेल्थकेयर क्षेत्र में हो रहे बदलावों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का संकेत है। ब्रिटेन की NHS खुद स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाने के लिए डिजिटलाइजेशन तथा नई तकनीकों पर लगातार जोर दे रही है।

ऐसे में भारत के उन मॉडल्स पर ध्यान दिया जाना स्वाभाविक है, जहां बड़े स्तर पर आबादी को तकनीक के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

भारत के लिए यह केवल प्रशंसा का विषय नहीं, बल्कि अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने की जिम्मेदारी भी है। यदि तकनीक, बेहतर नीतियों और मजबूत स्वास्थ्य ढांचे का संतुलित इस्तेमाल किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक हेल्थटेक क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

निष्कर्ष: ब्रिटेन की NHS से जुड़ी डॉ. पेनी डैश की भारत के हेल्थकेयर मॉडल को लेकर सकारात्मक टिप्पणी ने एक बार फिर यह चर्चा तेज कर दी है कि स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भारत किस तेजी से बदलाव कर रहा है। तकनीक, डिजिटलाइजेशन और मरीजों तक आसान पहुंच का मॉडल आने वाले समय में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी ताकत बन सकता है। हालांकि, इस दिशा में डेटा सुरक्षा, समान पहुंच और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी होगा।

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