नई दिल्ली। आर्य समाज करोल बाग में पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ “पर्यावरण एवं हरितालिका तीज उत्सव” श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक हवन एवं मंत्रोच्चारण से हुआ, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने विश्व-कल्याण, पर्यावरण-सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव की कामना करते हुए आहुतियाँ अर्पित कीं। हवन के दौरान वैदिक ऋचाओं के उच्चारण से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया।
आयोजकों ने बताया कि इस उत्सव का उद्देश्य भारतीय पर्व-परम्पराओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए समाज में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना था। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया गया कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को पर्यावरण-अनुकूल बनाकर हम अपनी परम्पराओं का सम्मान करने के साथ-साथ धरती के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
इस अवसर पर महिलाओं ने पारम्परिक तीज गीत प्रस्तुत कर भारतीय संस्कृति और लोक-परम्पराओं की सुंदर छटा बिखेरी। संगीता ‘गीत’ द्वारा प्रस्तुत मधुर गीत ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति पर उपस्थित दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। तीज के पारम्परिक गीतों और लोकधुनों ने समारोह में उल्लास और आत्मीयता का वातावरण बना दिया। इस अवसर पर श्रीमती शशि मल्होत्रा, अध्यक्ष, स्त्री समाज करोल बाग, निरुपमा, स्त्री आर्य समाज करोल बाग, श्रीमती इंदिरा शर्मा, निकिता सहित अनेक महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करते हुए आयोजन की शोभा बढ़ाई और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प व्यक्त किया।
पर्यावरण-सुरक्षा पर आधारित प्रभावशाली लघुनाटिका के माध्यम से वृक्षों की रक्षा, जल-संरक्षण, प्लास्टिक के सीमित उपयोग और प्रकृति के प्रति मानवीय उत्तरदायित्व का संदेश दिया गया। नाटिका में दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले छोटे-छोटे पर्यावरण-अनुकूल उपायों को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक एवं प्रेरणादायक बनाया तथा बच्चों और युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम की स्वागताध्यक्ष श्रीमती मंजु शर्मा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय पर्व केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सामाजिक दायित्व निभाने की प्रेरणा भी देते हैं। तीज का पर्व हरियाली, वर्षा, समृद्धि और प्रकृति के साथ मनुष्य के आत्मीय सम्बन्ध का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना हमारी संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करना है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में पर्यावरण-संरक्षण से जुड़े व्यवहार अपनाने चाहिए और परिवार तथा समाज को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से वृक्षारोपण, वर्षाजल-संचयन, जल की बचत, ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग और स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।
कार्यक्रम की संयोजिका सुश्री दीप्ति टंडन के कुशल संयोजन में सभी प्रस्तुतियाँ सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुईं। उन्होंने कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं, कलाकारों, अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके मार्गदर्शन में आयोजन की विभिन्न गतिविधियों का संचालन अनुशासित और प्रभावी ढंग से किया गया।
समारोह के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं और समाज के सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न संकल्पों पर चर्चा की। बच्चों और युवाओं को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने तथा उन्हें पौधों की देखभाल, जल-संरक्षण और स्वच्छता अभियानों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
समारोह के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण की रक्षा करने, अधिकाधिक वृक्ष लगाने, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया। उपस्थित लोगों ने यह भी संकल्प लिया कि वे प्लास्टिक का अनावश्यक उपयोग कम करेंगे और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।
उत्सव ने वैदिक संस्कारों, भारतीय संस्कृति और पर्यावरणीय चेतना का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। बड़ी संख्या में उपस्थित आर्यजनों, महिलाओं और समाज के गणमान्य नागरिकों ने कार्यक्रम की सराहना की। उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।