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₹2,000 तक UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज, सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकेंगे। इसके साथ ही RuPay-powered डेबिट कार्ड से किए जाने वाले […]

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  • September 15, 2026 3:10 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकेंगे। इसके साथ ही RuPay-powered डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान को भी शुल्क से सुरक्षा दी गई है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ सप्ताह से UPI पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होने की चर्चाओं के कारण लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा था कि क्या आने वाले दिनों में UPI से भुगतान करने पर आम ग्राहकों को अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। नई अधिसूचना ने कम से कम ₹2,000 तक के UPI भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

₹2,000 तक के UPI भुगतान पर पूरी सुरक्षा

वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के कुछ माध्यमों को शुल्क से संरक्षित किया है। इनमें RuPay डेबिट कार्ड और ₹2,000 तक के UPI लेनदेन शामिल हैं। अधिसूचना के मुताबिक बैंक अथवा सिस्टम प्रोवाइडर भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकता।

इसका सीधा मतलब है कि यदि कोई व्यक्ति दुकान पर ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 का सामान्य UPI भुगतान करता है, तो इस भुगतान के लिए बैंक या संबंधित पेमेंट सिस्टम की ओर से अलग से चार्ज लगाने की अनुमति नहीं होगी।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि यह व्यवस्था UPI के हर संभावित प्रकार के लेनदेन को एक ही तरीके से परिभाषित नहीं करती। खासकर बड़े मूल्य वाले मर्चेंट लेनदेन को लेकर MDR की व्यवस्था पर अलग से नीति और नियम लागू हो सकते हैं।

क्या ₹2,000 से ज्यादा UPI भुगतान पर चार्ज लगेगा?

यही सवाल सबसे ज्यादा लोगों के मन में है। फिलहाल उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण का मुख्य फोकस ₹2,000 तक के UPI लेनदेन को शुल्क से सुरक्षित रखने पर है। इससे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI भुगतान अब ग्राहक से शुल्क लेकर ही किया जाएगा।

दरअसल, MDR को लेकर चर्चा मुख्य रूप से मर्चेंट यानी कारोबारियों से जुड़े बड़े मूल्य के UPI लेनदेन पर है। अगस्त में सरकार द्वारा प्रस्तावित बदलावों के बाद यह रास्ता खुला था कि भविष्य में चुनिंदा उच्च-मूल्य वाले मर्चेंट UPI लेनदेन पर शुल्क व्यवस्था बनाई जा सके। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित ढांचे में ₹2,000 से ऊपर के कुछ मर्चेंट लेनदेन पर MDR लगाने के विकल्प पर चर्चा हुई थी।

इसलिए आम UPI यूजर को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि हर बार ₹2,000 से अधिक का भुगतान करने पर उसके बैंक खाते से कोई निश्चित चार्ज कट जाएगा।

P2P UPI भुगतान को लेकर क्या स्थिति है?

व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P (Person-to-Person) भुगतान UPI की सबसे प्रमुख सुविधाओं में से एक है। किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिचित को पैसे भेजना इसी श्रेणी में आता है।

सरकार की ओर से पहले भी यह स्पष्ट किया गया है कि आम उपभोक्ताओं के P2P UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की बात नहीं है। मौजूदा चर्चा मुख्य रूप से मर्चेंट पेमेंट और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की लागत को लेकर है।

इसलिए किसी व्यक्ति को ₹500, ₹1,500 या ₹2,000 भेजने वाले यूजर के लिए इस अधिसूचना का सीधा संदेश यही है कि इस सीमा तक भुगतान पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर शुल्क नहीं लगा सकते।

दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के लिए क्या मायने?

UPI का सबसे बड़ा इस्तेमाल दुकानों, छोटे कारोबारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और सेवा प्रदाताओं के यहां होता है। डिजिटल भुगतान की सुविधा ने नकदी पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

₹2,000 तक के लेनदेन को शुल्क से सुरक्षित रखने का निर्णय छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे ग्राहकों को भुगतान के समय अतिरिक्त शुल्क की चिंता कम होगी और छोटे कारोबारियों के लिए QR आधारित भुगतान स्वीकार करना आसान बना रहेगा।

सरकार पहले भी कम मूल्य वाले BHIM-UPI P2M यानी Person-to-Merchant लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना चला चुकी है। वर्ष 2024-25 की योजना में छोटे व्यापारियों के ₹2,000 तक के UPI लेनदेन को शून्य MDR व्यवस्था के तहत रखा गया था।

UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा

भारत में डिजिटल भुगतान के विस्तार में UPI की भूमिका लगातार बढ़ी है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24,508.96 मिलियन यानी 24.5 अरब से अधिक लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग ₹29.82 लाख करोड़ रही। जुलाई 2026 में भी 23,658.35 मिलियन लेनदेन दर्ज किए गए थे।

इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि UPI अब केवल ऑनलाइन खरीदारी का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि रोजमर्रा के छोटे-बड़े भुगतान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

सरकार के फैसले से क्या बदलेगा?

सरकार के इस कदम से सबसे बड़ा फायदा यह है कि ₹2,000 तक के UPI भुगतान को लेकर शुल्क की स्थिति स्पष्ट हो गई है। ग्राहक छोटी खरीदारी, बिल भुगतान या दुकानों पर QR कोड के जरिए भुगतान करते समय अतिरिक्त UPI चार्ज को लेकर चिंतित नहीं होंगे।

हालांकि, भविष्य में ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट लेनदेन पर MDR की व्यवस्था किस रूप में लागू होगी, यह अलग नियमों और दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी पोस्ट से सावधान रहना जरूरी है, जिनमें दावा किया जा रहा है कि अब हर UPI भुगतान पर बैंक सीधे ग्राहक से शुल्क वसूलेंगे।

आम UPI यूजर के लिए आसान भाषा में समझें

₹2,000 तक का UPI भुगतान: कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं।

RuPay डेबिट कार्ड भुगतान: सरकार की अधिसूचना में शुल्क से संरक्षित।

P2P भुगतान: आम उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहने की बात स्पष्ट की गई है।

₹2,000 से अधिक मर्चेंट भुगतान: संभावित MDR व्यवस्था को लेकर आगे के नियम महत्वपूर्ण होंगे।

ग्राहक से सीधे UPI शुल्क: ₹2,000 तक के भुगतान पर इसकी अनुमति नहीं है।

कुल मिलाकर, सरकार के ताजा फैसले से करोड़ों UPI यूजर्स को बड़ी राहत मिली है। फिलहाल ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर चार्ज लगाने की आशंका खत्म हो गई है। वहीं बड़े मर्चेंट लेनदेन को लेकर MDR की भविष्य की व्यवस्था पर नजर रखना जरूरी होगा।

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