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चीन में मिला नया टिक-बोर्न वायरस ALTNV, जानें कितना है खतरनाक

नई दिल्ली/बीजिंग। सर्दी-जुकाम, बुखार, थकान और पेट से जुड़ी परेशानियों को अक्सर सामान्य वायरल या फ्लू मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन चीन में वैज्ञानिकों की एक नई खोज ने ऐसे लक्षणों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। शोधकर्ताओं ने Asian Longhorned Tick Nairovirus (ALTNV) नाम के एक नए वायरस की पहचान की है, […]

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  • September 15, 2026 10:58 am IST, Published 39 minutes ago

नई दिल्ली/बीजिंग। सर्दी-जुकाम, बुखार, थकान और पेट से जुड़ी परेशानियों को अक्सर सामान्य वायरल या फ्लू मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन चीन में वैज्ञानिकों की एक नई खोज ने ऐसे लक्षणों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। शोधकर्ताओं ने Asian Longhorned Tick Nairovirus (ALTNV) नाम के एक नए वायरस की पहचान की है, जो टिक यानी किलनी के जरिए इंसानों तक पहुंच सकता है। इस खोज की जानकारी प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल New England Journal of Medicine में प्रकाशित हुई है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक ALTNV Orthonairovirus समूह और Nairoviridae परिवार से जुड़ा है। फिलहाल उपलब्ध अध्ययन इसे सीधे किसी नई महामारी की चेतावनी के रूप में नहीं देखते। हालांकि इसकी पहचान महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह ऐसे मरीजों में मिला जिनमें टिक के संपर्क के बाद बीमारी के लक्षण दिखाई दिए थे, लेकिन पहले से ज्ञात प्रमुख वायरस की जांच निगेटिव आ रही थी।

आखिर कैसे सामने आया ALTNV?

चीन में वैज्ञानिक लंबे समय से Severe Fever with Thrombocytopenia Syndrome (SFTS) जैसी टिक से फैलने वाली बीमारियों पर नजर रख रहे हैं। SFTS का प्रमुख कारण Dabie bandavirus (DBV) माना जाता है। मरीजों में तेज बुखार और प्लेटलेट्स की संख्या में कमी समेत गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं।

वैज्ञानिकों के सामने सवाल तब खड़ा हुआ जब SFTS जैसे लक्षण वाले लगभग 30 प्रतिशत संदिग्ध मरीजों में DBV की जांच निगेटिव आने की बात सामने आई। आखिर इन मरीजों को बीमारी किस वजह से हो रही थी? इसी सवाल का जवाब तलाशते हुए शोधकर्ताओं ने नमूनों का विस्तृत विश्लेषण शुरू किया।

शोधकर्ताओं ने RNA sequencing, वायरस आइसोलेशन और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। इसी प्रक्रिया में एक अलग वायरस की पहचान हुई, जिसे Asian Longhorned Tick Nairovirus यानी ALTNV नाम दिया गया।

3,163 मरीजों की जांच में क्या मिला?

अध्ययन में टिक के संपर्क के इतिहास वाले 3,163 बुखार पीड़ित मरीजों के नमूनों की जांच की गई। इनमें करीब 10.4 प्रतिशत मरीजों में ALTNV संक्रमण से जुड़े प्रमाण मिले। वहीं DBV निगेटिव मरीजों के समूह में करीब 15.1 प्रतिशत ALTNV पॉजिटिव पाए गए।

ये आंकड़े इसलिए अहम हैं क्योंकि वे बताते हैं कि टिक के संपर्क के बाद होने वाली कुछ ऐसी बीमारियां, जिनकी वजह पहले स्पष्ट नहीं हो पा रही थी, उनमें ALTNV की भूमिका हो सकती है।

सामान्य फ्लू जैसे हैं ALTNV के लक्षण

ALTNV संक्रमण की सबसे बड़ी चुनौती इसके लक्षणों का दूसरी बीमारियों से मिलता-जुलता होना है। अध्ययन में केवल ALTNV से संक्रमित मरीजों में थकान लगभग 84 प्रतिशत और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं करीब 80 प्रतिशत दर्ज की गईं। इसके अलावा करीब 38 प्रतिशत में thrombocytopenia यानी प्लेटलेट्स की संख्या कम होने और लगभग 36 प्रतिशत में aminotransferase का स्तर बढ़ने की बात सामने आई।

इसलिए केवल बुखार, कमजोरी या पेट की परेशानी के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि किसी व्यक्ति को ALTNV संक्रमण है। ऐसे लक्षण कई सामान्य संक्रमणों में भी हो सकते हैं और बीमारी की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

टिक में भी मिला वायरस, वैज्ञानिकों को मिला अहम सुराग

शोधकर्ताओं ने केवल इंसानों के नमूनों का अध्ययन नहीं किया बल्कि बड़े पैमाने पर ticks की भी जांच की। रिपोर्ट के अनुसार 15 प्रांतों से एकत्र 47,428 ticks में से करीब 1.3 प्रतिशत में ALTNV RNA पाया गया। Haemaphysalis longicornis यानी Asian longhorned tick में इसकी मौजूदगी करीब 1.8 प्रतिशत दर्ज की गई। प्रयोगों में इस tick द्वारा चूहों तक वायरस पहुंचाने की क्षमता भी दिखाई गई।

यह निष्कर्ष वायरस के टिक-बोर्न होने के वैज्ञानिक प्रमाण को मजबूत करता है।

क्या ALTNV जानलेवा है?

यहां सावधानी के साथ आंकड़ों को समझना जरूरी है। केवल ALTNV संक्रमण वाले मरीज अध्ययन में पूरी तरह ठीक हुए। लेकिन ALTNV और DBV दोनों से एक साथ संक्रमित मरीजों में बीमारी ज्यादा गंभीर दिखाई दी। अध्ययन में ऐसे 38 coinfection मरीजों में श्वसन संबंधी समस्याएं और किडनी की खराबी अपेक्षाकृत अधिक देखी गईं और सात मरीजों की मौत हुई।

इसका मतलब यह नहीं कि ALTNV से संक्रमित हर मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच जाएगा। शोध अभी शुरुआती चरण में है और वायरस की वास्तविक गंभीरता, संक्रमण के पूरे दायरे और जोखिम कारकों को समझने के लिए आगे और अध्ययन जरूरी होंगे।

क्या एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है?

फिलहाल उपलब्ध शोध का फोकस टिक के जरिए संक्रमण पर है और ALTNV के आसानी से इंसान से इंसान में फैलने का प्रमाण स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए सोशल मीडिया पर इसे तत्काल किसी कोविड जैसी महामारी से जोड़कर देखना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। विशेषज्ञ इस खोज को मुख्य रूप से बेहतर रोग निगरानी और टिक से होने वाली बीमारियों की सटीक जांच की जरूरत से जोड़ रहे हैं।

टिक के काटने से कैसे करें बचाव?

ऐसे क्षेत्रों में जहां ticks ज्यादा पाए जाते हैं, घास, झाड़ियों और वन क्षेत्रों में जाते समय शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना उपयोगी हो सकता है। बाहर से लौटने के बाद शरीर और कपड़ों पर टिक की जांच करनी चाहिए। यदि टिक काटने के बाद बुखार, अत्यधिक थकान, पेट की समस्या या दूसरी असामान्य तकलीफें विकसित हों तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

ALTNV की खोज फिलहाल किसी वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा नहीं है। लेकिन इसने यह जरूर दिखाया है कि टिक जैसे छोटे जीव कई ऐसे वायरस के वाहक हो सकते हैं जिनके बारे में विज्ञान अभी पूरी तरह नहीं जानता। वैज्ञानिकों के लिए अब अगली चुनौती यह समझना है कि ALTNV कितना व्यापक है, किन क्षेत्रों में इसका खतरा ज्यादा है और मानव स्वास्थ्य पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव क्या हो सकता है।

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