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ग्रेटर नोएडा सोसाइटी में उल्लुओं का हमला, 7 उल्लू रेस्क्यू

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक हाईराइज सोसाइटी में पिछले कई दिनों से उल्लुओं के लगातार दिखाई देने और कथित तौर पर लोगों पर हमला करने का मामला चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, ला रेजिडेंसिया सोसाइटी में निवासियों की शिकायतों के बाद वन विभाग की टीम ने कार्रवाई […]

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  • September 15, 2026 7:53 am IST, Published 9 minutes ago

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक हाईराइज सोसाइटी में पिछले कई दिनों से उल्लुओं के लगातार दिखाई देने और कथित तौर पर लोगों पर हमला करने का मामला चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, ला रेजिडेंसिया सोसाइटी में निवासियों की शिकायतों के बाद वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए 7 उल्लुओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। इनमें दो वयस्क उल्लू और पांच बच्चे बताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सोसाइटी परिसर में उल्लुओं की गतिविधियां पिछले कुछ दिनों से लगातार बनी हुई थीं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पक्षियों के हमलावर व्यवहार को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई थी। सोशल मीडिया पर साझा की गई पोस्ट में दावा किया गया है कि उल्लू सोसाइटी के निवासियों को निशाना बना रहे थे और कई लोगों पर हमला भी कर चुके थे। कुछ लोगों के सिर से खून निकलने की बात भी पोस्ट में कही गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के आधार पर नहीं हुई है।

शिकायत के बाद हरकत में आया वन विभाग

मामला सामने आने के बाद सोसाइटी के निवासियों ने वन विभाग से शिकायत की। इसके बाद विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और उल्लुओं को पकड़ने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, अभियान के दौरान कुल सात उल्लुओं को सुरक्षित पकड़ लिया गया। इनमें दो वयस्क और पांच बच्चे शामिल बताए गए हैं।

उल्लुओं को पकड़ने के बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया। वायरल तस्वीर में एक उल्लू को पिंजरे में रखा हुआ दिखाई दे रहा है। इससे संकेत मिलता है कि रेस्क्यू टीम ने पक्षियों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से कब्जे में लिया।

कई दिनों से परेशान थे सोसाइटी के लोग

पोस्ट में दावा किया गया है कि उल्लू पिछले कई दिनों से सोसाइटी के आसपास लगातार नजर आ रहे थे। लोगों के बीच सबसे ज्यादा चिंता उनके कथित हमलावर व्यवहार को लेकर थी। खासतौर पर खुले स्थानों, रास्तों और सोसाइटी परिसर में आने-जाने वाले लोगों को सावधानी बरतनी पड़ रही थी।

आम तौर पर उल्लू रात में अधिक सक्रिय रहने वाले पक्षी हैं। हालांकि, यदि किसी पक्षी को अपने घोंसले या बच्चों के आसपास खतरा महसूस होता है तो वह अपनी सुरक्षा के लिए आक्रामक प्रतिक्रिया दे सकता है। इस मामले में चूंकि पांच बच्चे भी रेस्क्यू किए जाने की बात कही गई है, इसलिए यह संभावना जांच का विषय हो सकती है कि वयस्क उल्लू अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्षेत्र में अधिक सक्रिय थे।

हालांकि, किसी वन्यजीव के व्यवहार के संबंध में अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञों की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।

दो वयस्क और पांच बच्चे रेस्क्यू

इस मामले की सबसे खास बात यह है कि रेस्क्यू किए गए सात उल्लुओं में पांच बच्चे भी बताए जा रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि सोसाइटी परिसर या उसके आसपास इन पक्षियों का प्रजनन स्थल अथवा घोंसला मौजूद हो सकता था। ऐसे में वन विभाग के लिए केवल पक्षियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित संरक्षण और उचित स्थान पर पुनर्वास की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

वन्यजीवों के रेस्क्यू के दौरान प्रशिक्षित टीम की भूमिका अहम होती है। बिना विशेषज्ञ सहायता के किसी जंगली पक्षी को पकड़ने या उसे हटाने का प्रयास पक्षी और इंसान दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

निवासियों की शिकायत के बाद मिली राहत

सोसाइटी में रहने वाले लोगों के लिए वन विभाग की कार्रवाई राहत देने वाली मानी जा रही है। यदि परिसर में लगातार उल्लुओं की मौजूदगी और उनके कथित हमलों को लेकर लोगों में डर था, तो रेस्क्यू के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।

हालांकि, भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए सोसाइटी प्रबंधन और संबंधित विभाग को यह भी पता लगाना होगा कि पक्षियों ने परिसर में अपना ठिकाना क्यों बनाया था। यदि वहां घोंसले, पेड़ों या अन्य स्थानों पर उनका स्थायी बसेरा है, तो विशेषज्ञों की सलाह से उचित कदम उठाए जाने की जरूरत होगी।

वन्यजीवों से दूरी बनाना जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी जंगली पक्षी या जानवर के आसपास भीड़ लगाना, उसे छेड़ना या पकड़ने का प्रयास करना उचित नहीं है। खासकर जब उसके बच्चे आसपास हों, तब वयस्क पक्षी अपनी रक्षा के लिए हमला कर सकता है।

ऐसी स्थिति में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और वन विभाग या अधिकृत वन्यजीव रेस्क्यू टीम को सूचना देनी चाहिए। बच्चों को भी ऐसे स्थानों से दूर रखना जरूरी है जहां जंगली पक्षियों की मौजूदगी हो।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में इंसानी बस्तियों और प्राकृतिक आवासों का संपर्क बढ़ रहा है। ऐसे में पक्षियों और अन्य वन्यजीवों का रिहायशी इलाकों में पहुंचना असामान्य नहीं है। जरूरत इस बात की है कि ऐसी परिस्थितियों में लोगों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण—दोनों के बीच संतुलन बनाया जाए।

सोशल मीडिया पोस्ट से सामने आया मामला

यह पूरा मामला फिलहाल सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी और वायरल पोस्ट पर आधारित है। पोस्ट में ला रेजिडेंसिया सोसाइटी, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सात उल्लुओं के रेस्क्यू और निवासियों पर कथित हमलों का उल्लेख किया गया है।

इसलिए हमले में घायल लोगों की संख्या, चोटों की गंभीरता, रेस्क्यू की सटीक तारीख और उल्लुओं को रेस्क्यू किए जाने के बाद उन्हें कहां रखा गया है, जैसे विवरणों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग से होना बाकी है।

फिलहाल सात उल्लुओं के रेस्क्यू की सूचना ने लोगों का ध्यान खींचा है। घटना यह भी बताती है कि रिहायशी क्षेत्रों में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर जागरूकता और समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप कितना जरूरी है। लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतनी चाहिए और वन्यजीव से जुड़ी किसी भी समस्या की सूचना सीधे संबंधित विभाग को देनी चाहिए।

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