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शादी का कार्ड खोलते ही फोन हैक, खाते से उड़ गए 1.76 लाख

नई दिल्ली/गोरखाबाद। WhatsApp पर आने वाले अनजान नंबरों के संदेशों और फाइलों को लेकर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार लोगों को सावधान करते रहे हैं। इसके बावजूद साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला क्षेत्र के कुरेथू गांव निवासी प्रिंस यादव के साथ सामने आया है। […]

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  • September 15, 2026 7:58 am IST, Published 15 seconds ago

नई दिल्ली/गोरखाबाद। WhatsApp पर आने वाले अनजान नंबरों के संदेशों और फाइलों को लेकर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार लोगों को सावधान करते रहे हैं। इसके बावजूद साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला क्षेत्र के कुरेथू गांव निवासी प्रिंस यादव के साथ सामने आया है। आरोप है कि WhatsApp पर शादी के निमंत्रण पत्र के नाम से भेजी गई एक PDF फाइल खोलना उन्हें भारी पड़ गया और इसके बाद उनके मोबाइल फोन पर साइबर अपराधियों का नियंत्रण हो गया। कुछ ही समय में उनके बैंक खाते से 1,76,850 रुपये गायब हो गए। मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

WhatsApp पर आया शादी का निमंत्रण

जानकारी के मुताबिक, प्रिंस यादव के WhatsApp पर 6 सितंबर को एक अनजान मोबाइल नंबर से संदेश आया था। संदेश में शादी के निमंत्रण पत्र के नाम से एक PDF फाइल भेजी गई थी। सामान्य तौर पर शादी-ब्याह के निमंत्रण WhatsApp के जरिए भेजे जाना आज आम बात है। इसी वजह से प्रिंस यादव को भी संदेश संदिग्ध नहीं लगा।

उन्होंने WhatsApp पर आई फाइल को डाउनलोड कर खोल लिया। आरोप है कि फाइल खोलने के बाद ही उनके मोबाइल फोन में ऐसी गतिविधियां शुरू हो गईं, जिसकी उन्हें तत्काल जानकारी नहीं हो सकी। साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर इसी तरीके का इस्तेमाल कर मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी तक पहुंच बनाई।

यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि किसी अनजान नंबर से आने वाली PDF, APK या दूसरी फाइल को बिना जांचे खोलना कितना जोखिम भरा हो सकता है।

पलक झपकते ही खाते से गायब होने लगी रकम

प्रिंस यादव का खाता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की गोराबादशाहपुर शाखा में संचालित बताया गया है। शिकायत के अनुसार, मोबाइल फोन हैक होने के बाद उनके बैंक खाते से कुछ ही समय के अंतराल में चार बार रकम निकाली गई।

बताया गया है कि कुल 1,76,850 रुपये खाते से गायब हो गए। जब खाते से पैसे निकलने का संदेश मोबाइल पर आया तो प्रिंस यादव को घटना की जानकारी हुई। लगातार होने वाले ट्रांजेक्शन को देखकर वह हैरान रह गए। उन्हें समझ में नहीं आया कि आखिर बिना उनकी जानकारी के खाते से इतनी बड़ी रकम कैसे निकल गई।

साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर पीड़ित के मोबाइल या बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल करने के बाद तेजी से रकम ट्रांसफर करते हैं। ऐसे में बैंक से आने वाले प्रत्येक ट्रांजेक्शन अलर्ट को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।

जांच में सामने आया ट्रांजेक्शन का तरीका

घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रिंस यादव ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद बैंक और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर खाते में हुए लेन-देन की जानकारी जुटाई गई।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, बैंक अधिकारियों ने जांच के दौरान बताया कि खाते से निकाली गई रकम Google UPI के माध्यम से अलग-अलग ट्रांजेक्शन में ट्रांसफर की गई है। इससे मामला सामान्य बैंकिंग लेन-देन के बजाय साइबर अपराध से जुड़ा होने की आशंका और मजबूत हुई।

पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की विवेचना सीओ केराकत जय प्रकाश राय को सौंपी गई है। अब पुलिस कथित ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, डिजिटल गतिविधियों और पैसों के आगे के लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है।

शादी के कार्ड के नाम पर साइबर ठगी का नया तरीका

साइबर अपराधी लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और सामाजिक गतिविधियों का फायदा उठाकर ठगी के नए तरीके अपनाते हैं। शादी के निमंत्रण पत्र के नाम पर PDF भेजना भी इसी तरह का तरीका हो सकता है। क्योंकि लोग अक्सर रिश्तेदारों, परिचितों और दोस्तों से WhatsApp पर शादी के कार्ड प्राप्त करते हैं, इसलिए अनजान नंबर से आए ऐसे संदेश को भी कई बार सामान्य समझ लिया जाता है।

यही लापरवाही साइबर अपराधियों के लिए मौका बन सकती है। किसी फाइल को खोलने या डाउनलोड करने से पहले यह देखना जरूरी है कि संदेश किस नंबर से आया है और भेजने वाले व्यक्ति की पहचान क्या है। यदि नंबर अपरिचित है और संदेश में किसी फाइल को तुरंत खोलने या डाउनलोड करने का दबाव बनाया जा रहा है तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

PDF समझकर कोई भी फाइल न खोलें

साइबर सुरक्षा के लिहाज से केवल PDF के नाम या आइकन को देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि फाइल पूरी तरह सुरक्षित है। अनजान स्रोत से प्राप्त किसी भी फाइल को खोलने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए।

विशेष रूप से ऐसी फाइलों से सावधान रहने की जरूरत है, जिनके साथ कोई संदिग्ध लिंक दिया गया हो या जिन्हें खोलने के बाद मोबाइल में अतिरिक्त अनुमति देने को कहा जाए। किसी अनजान ऐप को इंस्टॉल करने, स्क्रीन शेयर करने या मोबाइल की संवेदनशील अनुमति देने से बचना चाहिए।

बैंकिंग से जुड़े मोबाइल फोन में अनावश्यक एप्लिकेशन रखने से भी बचना चाहिए। साथ ही फोन और बैंकिंग ऐप को समय-समय पर अपडेट करते रहना जरूरी है।

रकम कटते ही 1930 पर करें शिकायत

इस मामले में पीड़ित ने रकम गायब होने के बाद साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। साइबर ठगी का शिकार होने पर शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, उतनी ही जल्दी संबंधित एजेंसियों को लेन-देन की जांच और रकम को रोकने के संभावित प्रयास का मौका मिल सकता है।

इसके साथ ही संबंधित बैंक को तुरंत सूचना देकर खाते और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को सुरक्षित कराने की कोशिश करनी चाहिए। मोबाइल फोन में किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो पासवर्ड और जरूरी सुरक्षा सेटिंग्स भी बदलनी चाहिए।

पुलिस जांच से खुल सकता है पूरा नेटवर्क

फिलहाल पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की जांच इस बात पर केंद्रित हो सकती है कि WhatsApp पर संदेश भेजने वाला मोबाइल नंबर किसके नाम पर है, रकम किन खातों या UPI माध्यमों में गई और उन ट्रांजेक्शन के पीछे कौन लोग हैं।

प्रिंस यादव के साथ हुई घटना लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा सबक है। WhatsApp पर आया शादी का कार्ड भी बिना जांचे खोलना भारी पड़ सकता है। इसलिए अनजान नंबर से आए किसी भी निमंत्रण, लिंक या फाइल पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है। एक छोटी सी सावधानी न केवल मोबाइल और निजी जानकारी को सुरक्षित रख सकती है, बल्कि बैंक खाते में जमा मेहनत की कमाई को भी साइबर अपराधियों के हाथों जाने से बचा सकती है।

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