नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए 1033 हेल्पलाइन को लेकर बड़ा तकनीकी बदलाव होने जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अपनी मौजूदा 1033 नेशनल हाईवे हेल्पलाइन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग और स्मार्ट इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से अपग्रेड करने की तैयारी में है। नई व्यवस्था का उद्देश्य दुर्घटना, वाहन खराब होने या अन्य आपात स्थिति में यात्रियों तक सहायता को अधिक तेजी और बेहतर समन्वय के साथ पहुंचाना है।
1033 हेल्पलाइन में अब AI की होगी बड़ी भूमिका
NHAI की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित Next Generation 1033 Helpline में AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कॉल करने वाले व्यक्ति की लोकेशन को रियल टाइम में पहचानने और आपात स्थिति की जानकारी को संबंधित टीम तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।
खास बात यह है कि नई प्रणाली अलग-अलग भारतीय भाषाओं में आने वाली कॉल को समझने और उन्हें बेहतर तरीके से संभालने में AI की सहायता लेगी। इससे भाषा से जुड़ी परेशानी कम करने और यात्रियों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
लोकेशन बताने में परेशानी हुई तो भी मिलेगी मदद
हाईवे पर दुर्घटना या वाहन खराब होने की स्थिति में कई बार यात्री आसपास की जगह या सड़क की सही लोकेशन नहीं बता पाते। ऐसी परिस्थितियों में रियल-टाइम लोकेशन सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
NHAI की प्रस्तावित व्यवस्था में कॉलर की लोकेशन को सिस्टम के जरिए पहचानने और आपातकालीन टीमों तक पहुंचाने की क्षमता विकसित की जा रही है। इससे संबंधित टीम को घटनास्थल तक पहुंचने के लिए जरूरी जानकारी जल्दी मिल सकेगी।
हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में लोकेशन तकनीक की सटीकता को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। इसलिए अंतिम तकनीकी क्षमता और संचालन संबंधी मानक नई प्रणाली के लागू होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
एंबुलेंस, क्रेन और पेट्रोल वाहन भेजना होगा आसान
नई प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Smart Dispatch होगा। इसका उद्देश्य जरूरत के हिसाब से सबसे उपयुक्त एंबुलेंस, क्रेन या हाईवे पेट्रोल वाहन की पहचान करके उसे घटनास्थल की ओर भेजने में सहायता करना है।
मसलन, यदि किसी यात्री का वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग पर खराब हो जाता है तो सहायता के लिए 1033 पर कॉल किया जा सकता है। दुर्घटना की स्थिति में एंबुलेंस या अन्य आवश्यक सहायता की जरूरत होने पर भी हेल्पलाइन के जरिए सूचना दी जा सकती है।
NHAI की मौजूदा व्यवस्था में भी एंबुलेंस, पेट्रोल वाहन और क्रेन जैसी सेवाओं के साथ 1033 हेल्पलाइन को जोड़ा गया है। नई तकनीक के जरिए इनके बीच समन्वय को और बेहतर बनाने का लक्ष्य है।
24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध है 1033 सेवा
NHAI के अनुसार 1033 हेल्पलाइन वर्ष 2018 में शुरू की गई थी और यह 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध रहती है। इसका इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपात और गैर-आपात समस्याओं के लिए किया जाता है।
इसमें मेडिकल इमरजेंसी, वाहन खराब होने, एंबुलेंस, क्रेन और पेट्रोल वाहन की सहायता के अलावा टोल प्लाजा और FASTag से संबंधित शिकायतें भी शामिल हैं।
IHMCL की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 1033 को राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए एकल संपर्क माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। FASTag से जुड़ी कई समस्याओं के लिए भी 1033 का इस्तेमाल किया जा सकता है।
1.46 लाख किलोमीटर से ज्यादा हाईवे नेटवर्क पर असर
सरकारी जानकारी के मुताबिक, 1033 हेल्पलाइन वर्तमान में 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों को कवर करती है और रोजाना करीब 15,000 कॉल प्राप्त करती है। इतने बड़े नेटवर्क और कॉल वॉल्यूम को देखते हुए तकनीकी अपग्रेड को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई प्रणाली में कॉल रिसीव करने से लेकर घटनास्थल की पहचान, सहायता का चयन और संबंधित टीम को सूचना देने तक की प्रक्रिया को ज्यादा एकीकृत करने की योजना है।
इंसानी भूमिका खत्म नहीं होगी
AI के इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि नई व्यवस्था में मानव ऑपरेटरों की भूमिका समाप्त नहीं होगी। सड़क दुर्घटना और अन्य गंभीर आपात स्थितियों में मानवीय निर्णय और विवेक जरूरी होने के कारण ऑपरेटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
इसका मतलब है कि AI को सहायता और प्रक्रिया को तेज करने वाली तकनीक के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में मानवीय हस्तक्षेप बना रहेगा।
IHMCL ने मांगा EOI, प्रक्रिया शुरू
Next Generation 1033 हेल्पलाइन और कॉल सेंटर के लिए Indian Highways Management Company Limited (IHMCL) ने Expression of Interest यानी EOI आमंत्रित किया है। IHMCL, NHAI द्वारा प्रमोटेड कंपनी है।
आधिकारिक टेंडर जानकारी के अनुसार, EOI 10 सितंबर 2026 को प्रकाशित किया गया था। इसमें Next Generation 1033 National Highways Helpline और Call Centre के डिजाइन, विकास, तैनाती, संचालन और रखरखाव से जुड़ा काम शामिल है।
इस प्रक्रिया में सॉफ्टवेयर, डिजिटल प्लेटफॉर्म, 24×7 कॉल सेंटर, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, Voice AI और भारतीय भाषाओं की स्पीच रिकॉग्निशन जैसी तकनीकी क्षमताओं वाली कंपनियों और कंसोर्टियम से भागीदारी की अपेक्षा की गई है।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
नई प्रणाली लागू होने के बाद यात्रियों को मुख्य रूप से तीन स्तरों पर बदलाव देखने को मिल सकता है—पहला, कॉल के दौरान लोकेशन की पहचान में सहायता; दूसरा, अलग-अलग भारतीय भाषाओं में बेहतर संवाद; और तीसरा, जरूरत के अनुसार एंबुलेंस, क्रेन या पेट्रोल वाहन भेजने की प्रक्रिया में बेहतर समन्वय।
इसके अलावा सिस्टम यात्रियों को सड़क घटनाओं और महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से संबंधित समय पर सलाह देने में भी मदद कर सकता है। NHAI के मुताबिक इसका व्यापक उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर सहायता व्यवस्था को अधिक तेज, समन्वित और सुविधाजनक बनाना है।
ध्यान देने योग्य बात: यह व्यवस्था अभी अपग्रेड और विकास की प्रक्रिया में है। इसलिए नई AI आधारित सुविधाओं की अंतिम कार्यप्रणाली और सभी यात्रियों के लिए उनका वास्तविक संचालन चरणबद्ध तरीके से स्पष्ट होगा।