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DTU में सेवा-फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज शुरू, युवाओं के लिए ₹2 पुरस्कार राशि

यह कार्यक्रम ग्रामीण भारत में इंजीनियरिंग, उद्यमिता और सामाजिक परिवर्तन पर केंद्रित होगा। DTU द्वारा इसे आगामी शैक्षणिक सत्र से शुरू किया जाएगा। इसके माध्यम से इंजीनियरिंग और इनोवेशन से जुड़ी

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  • September 19, 2026 5:52 pm IST, Published 56 minutes ago

नई दिल्ली: दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शनिवार को दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) में ‘सेवा-फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल के तहत युवा नवोन्मेषकों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान कर उनके व्यावहारिक और तकनीक आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। चैलेंज में ₹2 करोड़ की पुरस्कार राशि, विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन तथा दिल्ली सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री सूद ने कहा कि ‘सेवा-फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ का विचार सरल है वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजकर समाज की सेवा करना। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के बीच जाकर उसकी वास्तविक चुनौतियों को समझना और उनके समाधान विकसित करना चाहिए।

सूद ने कहा कि दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) को एंकर यूनिवर्सिटी मानते हुए यह पहल उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और लद्दाख में संचालित की जाएगी। विश्वविद्यालयों, उद्योगों, स्टार्टअप्स, स्कूलों, ITIs और पॉलिटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थी इसमें भाग लेंगे। प्रतिभागी स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों की पहचान करेंगे, नए विचार विकसित करेंगे, उनके प्रोटोटाइप तैयार करेंगे, उनका परीक्षण एवं सत्यापन करेंगे और व्यावहारिक समाधान को लागू करने की दिशा में कार्य करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह पहल केवल कुछ नए स्टार्टअप तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली में एक मजबूत इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने का प्रयास है। इसके माध्यम से युवा नवोन्मेषकों को सफल उद्यमियों, स्टार्टअप संस्थापकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों से सीखने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। दिल्ली सरकार की ओर से आवश्यक हैंडहोल्डिंग और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा तथा संभावनाशील विचारों को स्टार्टअप इकोसिस्टम और नीतियों के माध्यम से आवश्यकतानुसार वित्तीय सहयोग दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली स्टार्टअप नीति के तहत दिल्ली में 10,000 स्टार्टअप और 4 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘सेवा-फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ ऐसे इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां युवा अपने विचारों को व्यावहारिक समाधान और सफल उद्यमों में बदल सकें। ₹2 करोड़ की पुरस्कार राशि वाला यह चैलेंज युवाओं को अपने अभिनव विचार सामने लाने, वास्तविक समस्याओं पर काम करने और सामाजिक प्रभाव वाले समाधान विकसित करने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के ‘सेवा’ और ‘विकसित भारत’ के ‘विजन से प्रेरणा’,  सूद ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का निर्माण केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं हो सकता, बल्कि इसे जन-आंदोलन बनाना होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं को इस राष्ट्र निर्माण की यात्रा के केंद्र में रखा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और जन-केंद्रित तथा तकनीक आधारित शासन की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का ‘प्रधान सेवक’ के रूप में सेवा का दृष्टिकोण युवाओं को समाज की समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करता है।

उच्च शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले भारत में पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या 500 से भी कम थी, जबकि आज भारत दुनिया के प्रमुख स्टार्टअप केंद्रों में शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं की सोच में भी बड़ा बदलाव आया है। आज युवा केवल रोजगार पाने की इच्छा नहीं रखते, बल्कि Startup India और Digital India जैसी पहलों के माध्यम से रोजगार सृजित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।

आशीष सूद ने कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियों के समाधान पर विशेष जोर दिया। उन्होंने DTU की उस पहल की सराहना की जिसके तहत 2027-28 के शैक्षणिक सत्र से इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को गांवों में भेजकर स्थानीय समस्याओं की पहचान और उनके व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा की यदि आपके आसपास कोई किसान किसी समस्या से जूझ रहा है, तो केवल उस समस्या को देखकर आगे न बढ़ें, बल्कि उसका समाधान खोजें। स्वच्छ ऊर्जा और कृषि से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना ही ‘सेवा-फर्स्ट’ है और यही सच्ची सेवा है।

‘सेवा-फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में प्रतिभागियों को प्रमुख स्टार्टअप लीडर्स और यूनिकॉर्न संस्थापकों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इनमें वीबा (Veeba) के विराज बहल, ज़िप्पी (Zypp) के आकाश गुप्ता, कैशकरो (CashKaro) की स्वाति भार्गव और एस्ट्रोटॉक (AstroTalk) के पुनीत गुप्ता शामिल हैं।

 

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इनोवेशन पोर्टल के शुभारंभ के बाद कार्यक्रम में Rural Technology and Community Engagement Programme (RTCEP) की भी घोषणा की गई। यह कार्यक्रम ग्रामीण भारत में इंजीनियरिंग, उद्यमिता और सामाजिक परिवर्तन पर केंद्रित होगा। DTU द्वारा इसे आगामी शैक्षणिक सत्र से शुरू किया जाएगा। इसके माध्यम से इंजीनियरिंग और इनोवेशन से जुड़ी विशेषज्ञता को ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

कार्यक्रम के समापन पर  आशीष सूद ने विद्यार्थियों और प्रोफेसरों से निराशावाद के बजाय जिम्मेदारी और सक्रिय भागीदारी की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देशभक्ति साबित करने के लिए सीमाओं पर जाकर विदेशी दुश्मनों का सामना करना ही जरूरी नहीं है। हम अपने विश्वविद्यालय परिसरों, अपने मोहल्लों और अपने समुदायों में मौजूद वास्तविक समस्याओं का समाधान करके भी देश की सेवा कर सकते हैं। सक्रिय भागीदारी और समस्याओं के समाधान की भावना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है।

 

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