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SIR पर विपक्ष के सवालों का प्रवेश वर्मा ने दिया जवाब, प्रक्रिया पारदर्शी

SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी आपत्ति दाखिल किए जाने का जिक्र प्रवेश वर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि इस मामले पर अदालत में बहस होनी है। ऐसे में SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने और दस्तावेजों की जांच से जुड़े कानूनी पहलुओं पर

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  • September 22, 2026 11:32 am IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस के बीच दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने प्रक्रिया को लेकर सरकार और चुनाव आयोग का पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि SIR के दौरान यदि किसी मतदाता के दस्तावेजों में कोई जानकारी अधूरी रह जाती है या जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते हैं, तो संबंधित चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) की ओर से नोटिस जारी किया जाता है। इसके बाद मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर मिलता है।

प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। उनके मुताबिक, दस्तावेजों की जांच और मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था का हिस्सा है। उन्होंने विपक्षी दलों और आम आदमी पार्टी की ओर से SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि प्रक्रिया को लेकर बार-बार सवाल उठाने के बजाय यह समझना जरूरी है कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में कमी या विसंगति सामने आती है, उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है।

मंत्री ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के दस्तावेजों में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे सीधे मतदाता सूची से बाहर करने के बजाय संबंधित अधिकारी की ओर से नोटिस देकर जानकारी मांगी जाती है। इसके बाद मतदाता अपने दस्तावेजों के साथ जवाब दाखिल कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग की ओर से अपनाई जा रही प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष है। इस दौरान मतदाताओं को अपनी पात्रता और रिकॉर्ड से संबंधित आपत्तियां दर्ज कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का इस्तेमाल करने का अधिकार है।

SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग सवाल उठते रहे हैं। कुछ विपक्षी दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नामों के हटने और दस्तावेजों की जांच को लेकर चिंता जता रहे हैं। वहीं चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी यह स्पष्ट करते रहे हैं कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करना और सूची में आवश्यक सुधार करना है। ऐसे में नाम से जुड़ी किसी भी समस्या की स्थिति में मतदाताओं के लिए निर्धारित आपत्ति और दावा प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है।

प्रवेश वर्मा ने कहा कि यदि किसी मतदाता को लगता है कि SIR के दौरान उसका नाम छूट गया है, तो वह उपलब्ध प्रक्रिया के तहत अपनी बात रख सकता है। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति को अपने दस्तावेज पूरे करके नोटिस का जवाब देने का अवसर मिलता है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची तैयार होने की प्रक्रिया में यह व्यवस्था इसलिए रखी गई है ताकि रिकॉर्ड से संबंधित आपत्तियों पर विचार किया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। हालांकि, उनके बयान के अनुसार अंतिम सूची जारी होने के बाद भी यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम उसमें शामिल नहीं होता है, तो वह अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। इसका मतलब है कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भी संबंधित नियमों के तहत उपलब्ध शिकायत या आपत्ति प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी आपत्ति दाखिल किए जाने का जिक्र प्रवेश वर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि इस मामले पर अदालत में बहस होनी है। ऐसे में SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने और दस्तावेजों की जांच से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अदालत में होने वाली सुनवाई पर भी नजर रहेगी।

मतदाता सूची से संबंधित किसी भी बदलाव की स्थिति में मतदाताओं के लिए अपने दस्तावेज और रिकॉर्ड की जानकारी सही रखना अहम है। खासतौर पर जिन लोगों को चुनावी अधिकारियों की ओर से नोटिस मिलता है, उनके लिए तय समय सीमा में जवाब दाखिल करना जरूरी होगा। प्रवेश वर्मा ने इसी प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि मतदाताओं को अपनी आपत्ति दर्ज कराने और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया जाता है।

 

 

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