नई दिल्ली: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के जज को लेकर आपत्ति जताई गई। शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मामले की सुनवाई कर रहे ट्रायल जज को बदलने की मांग उठाई। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से जज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया कि मामले में मनमाने तरीके से कार्रवाई की गई।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के सामने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को लेकर अपनी आपत्ति रखी। वकील प्रशांत भूषण ने अदालत से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए ट्रायल जज को बदला जाना चाहिए। शिकायतकर्ता पक्ष की दलील थी कि ट्रायल कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कुछ ऐसे फैसले और प्रक्रियाएं अपनाई गईं, जिन पर उन्हें गंभीर आपत्ति है।
मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मुद्दे पर शिकायतकर्ता पक्ष को संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष अपनी आपत्ति उठाने की बात कही। अदालत ने संकेत दिया कि ट्रायल जज से संबंधित शिकायत या आपत्ति के लिए हाईकोर्ट उचित मंच हो सकता है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाए गए इस पहलू को फिलहाल हाईकोर्ट में ले जाने का रास्ता बताया गया।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी पक्ष रखा गया। राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि सरकार इस मामले में अपना जवाब दाखिल करेगी। इसके बाद मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अदालत आगे विचार कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट में हुई इस सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही और जज की भूमिका को लेकर उठाए गए सवाल चर्चा में रहे। लखीमपुर खीरी हिंसा मामला अक्टूबर 2021 की उस घटना से जुड़ा है, जिसमें किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। इस मामले में कई लोगों की मौत हुई थी और इसके बाद आशीष मिश्रा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
आशीष मिश्रा केंद्रीय मंत्री रहे अजय मिश्रा टेनी के बेटे हैं। मामले की जांच, आरोपियों की जमानत और ट्रायल की प्रगति को लेकर समय-समय पर अदालतों में सुनवाई होती रही है| सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस मामले में आशीष मिश्रा की जमानत और ट्रायल से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर चुका है। जनवरी 2025 में अदालत के एक आदेश में शिकायतकर्ता द्वारा जमानत रद्द करने की मांग के दौरान लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया गया था। उस समय अदालत ने संबंधित सामग्री की विश्वसनीयता और तथ्यों की जांच के लिए पुलिस प्रशासन से फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट लेने की प्रक्रिया तय की थी।
मौजूदा सुनवाई में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से ट्रायल जज को बदलने की मांग सामने आने के बाद अदालत ने इस आपत्ति को हाईकोर्ट के समक्ष उठाने की बात कही। इससे यह स्पष्ट है कि ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को लेकर उठाए गए सवालों पर संबंधित न्यायिक स्तर पर विचार की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
इस मामले में अब उत्तर प्रदेश सरकार के जवाब का इंतजार रहेगा। राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर सुनवाई कर सकता है। वहीं, ट्रायल जज के खिलाफ शिकायतकर्ता पक्ष की आपत्ति हाईकोर्ट में किस तरह रखी जाती है और उस पर क्या कार्रवाई होती है, यह भी मामले की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लंबे समय से चर्चा में रहा है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इससे जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर समय-समय पर सुनवाई होती रही है। अब ताजा सुनवाई में ट्रायल जज को लेकर उठाई गई आपत्ति और राज्य सरकार के जवाब पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया केंद्रित रहेगी।