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SIT रिपोर्ट में चंदा चोरी की 105 घटनाएं, सुप्रीम कोर्ट में रखे सबूत

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिनों की वैधानिक अवधि इसी दिन पूरी हो रही है। कानून के तहत निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं होने की स्थिति में आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का अधिकार

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • September 21, 2026 7:35 pm IST, Published 13 minutes ago

नई दिल्ली: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित चोरी के मामले की जांच अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विशेष जांच दल (SIT) ने जांच लगभग पूरी कर ली है और 25 सितंबर तक मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान जांच से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष रखी गई, जिसमें जांच की प्रगति और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों का विवरण दिया गया।

SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर परिसर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ी 105 घटनाएं CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग में सामने आई हैं। जांच टीम ने इन घटनाओं से संबंधित फुटेज का अध्ययन करने के साथ-साथ मौके से जुड़े लोगों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की। रिपोर्ट में कहा गया है कि CCTV रिकॉर्डिंग और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर कथित घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया पूरी की गई है।

सरकार की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में CCTV फुटेज के अलावा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, दस्तावेज और गवाहों के बयान अहम साक्ष्य के तौर पर शामिल किए गए हैं। SIT ने मंदिर में चढ़ावे और मूल्यवान वस्तुओं के रखरखाव से संबंधित व्यवस्थाओं की भी जांच की है।

अदालत के समक्ष रखी गई जानकारी के अनुसार, मंदिर में प्राप्त कीमती वस्तुओं की रसीद तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर आधारित व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद संबंधित मूल्यवान वस्तुओं को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के लॉकर में सुरक्षित रखने की व्यवस्था है। SIT ने इस प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी पड़ताल की है, ताकि चढ़ावे के संग्रह और उसके सुरक्षित रखे जाने की प्रक्रिया को समझा जा सके।

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मामले में 25 सितंबर की तारीख कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिनों की वैधानिक अवधि इसी दिन पूरी हो रही है। कानून के तहत निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं होने की स्थिति में आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का अधिकार मिल सकता है। इसी वजह से सरकार ने अदालत को निर्धारित समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की जानकारी दी।

सुप्रीम कोर्ट ने SIT की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट और जांच से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड में दर्ज किया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया गया, लेकिन अदालत ने फिलहाल रिपोर्ट साझा करने की अनुमति नहीं दी। अदालत ने संकेत दिया कि मामले की आगे की प्रक्रिया संबंधित निचली अदालत में जारी रहेगी। आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में अतिरिक्त जांच या अन्य कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जा सकता है।

इस मामले के सामने आने के बाद मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी को लेकर भी चर्चा हुई। इसी बीच मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की व्यवस्था लागू की गई है और पूर्व सैन्य अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मामले की जांच में सामने आई 105 CCTV घटनाएं और अब तक हुई आठ गिरफ्तारियां SIT की जांच के प्रमुख हिस्से हैं। हालांकि, जांच में किसी व्यक्ति की पहचान या उसके खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य अपने आप में अंतिम दोषसिद्धि नहीं माने जाते। आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित अदालत में साक्ष्यों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

अब 25 सितंबर तक आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मामले की अगली कानूनी दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके बाद निचली अदालत में साक्ष्यों, आरोपों और आरोपियों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

 

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