लखनऊ: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में सफाई कर्मियों के विरोध-प्रदर्शन से मंगलवार को अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। इमरजेंसी के ट्राएज क्षेत्र स्थित टॉयलेट में नवजात का शव मिलने की घटना के बाद दो सफाई कर्मियों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। सफाई कर्मियों ने आरोप लगाया कि नवजात के बारे में संस्थान के अधिकारियों को जानकारी देने के बाद सुरक्षा कर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। घटना के विरोध में करीब 200 सफाई कर्मियों ने काम बंद कर दिया और प्रशासनिक भवन के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, इमरजेंसी के ट्राएज क्षेत्र में सफाई के दौरान एक कर्मचारी की नजर टॉयलेट में पड़े नवजात के शव पर पड़ी थी। सफाई कर्मियों ने इसकी जानकारी डॉक्टरों और संस्थान के अधिकारियों को दी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक नवजात की मौत का समय और कारण पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट होगा। पुलिस यह पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है कि नवजात को टॉयलेट में कब और किसने छोड़ा था।
नवजात मिलने की घटना के बाद सोमवार शाम सफाई कर्मियों की ओर से अपने साथ कथित मारपीट के आरोप लगाए गए। कर्मचारियों का कहना है कि घटना की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने के बाद दो सफाई कर्मियों को सुरक्षा कर्मियों ने एक कमरे में ले जाकर पीटा। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्रता की गई और उन्हें नौकरी से हटाने की धमकी भी दी गई। इन आरोपों को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई और मंगलवार को उन्होंने काम बंद करने का फैसला लिया। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हड़ताल के दौरान बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी संस्थान के प्रशासनिक भवन के सामने एकत्र हुए। उन्होंने कथित मारपीट में शामिल सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कर्मचारियों के प्रदर्शन के चलते अस्पताल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की कोशिश की गई। मौके पर पुलिस भी पहुंची और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया।
मामले की शुरुआत सोमवार सुबह नवजात के शव मिलने से हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, शव मिलने के समय नवजात के साथ प्लेसेंटा भी जुड़ा हुआ था। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना देने के बाद शव को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। अब जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि नवजात अस्पताल के टॉयलेट तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारण और समय के बारे में अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।
संस्थान के प्रवक्ता डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने नवजात का शव मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को सूचना दी गई थी और शव उसके सुपुर्द कर दिया गया। वहीं, सफाई कर्मियों की कथित पिटाई के आरोपों को लेकर सामने आए वीडियो और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस मामले में आरोपों और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
सफाई कर्मियों के काम बंद करने से अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति पैदा हो गई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उनके साथ कथित तौर पर मारपीट करने वाले सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दूसरी ओर, नवजात की मौत से जुड़े मूल मामले में पुलिस की जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नवजात को टॉयलेट में कौन छोड़कर गया था और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।
फिलहाल अस्पताल परिसर में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है। सफाई कर्मियों और संस्थान प्रशासन के बीच बातचीत के बाद ही हड़ताल समाप्त होने को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं, नवजात की मौत और सफाई कर्मियों के साथ कथित मारपीट, दोनों मामलों में जांच के आगे बढ़ने के साथ तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।