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UPSSSC परीक्षाओं में अब आधार सत्यापन अनिवार्य, फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। UPSSSC की प्रस्तावित आधार एवं बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के तौर पर देखी जा रही है।

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Gauravshali Bharat News
  • September 22, 2026 5:33 pm IST, Published 2 hours ago

लखनऊ: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने भविष्य में होने वाली परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी की है। आयोग की ओर से जारी सूचना के अनुसार आने वाली परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान को पुख्ता करना और फर्जी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा देने जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगाना है।

नई व्यवस्था के तहत परीक्षा केंद्र पर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों की पहचान आधार से जुड़े विवरण के आधार पर सत्यापित की जाएगी। इसके साथ ही बायोमेट्रिक पहचान की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इसमें अभ्यर्थी के फिंगरप्रिंट और आइरिस यानी आंख की पुतली से जुड़े बायोमेट्रिक विवरण का मिलान किया जा सकता है। आयोग का मानना है कि इस तरह की तकनीकी व्यवस्था से परीक्षा में किसी दूसरे व्यक्ति के स्थान पर बैठने या पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम करने में मदद मिलेगी।

UPSSSC की ओर से अभ्यर्थियों को अपने आधार और बायोमेट्रिक विवरण समय रहते अपडेट कराने की सलाह दी गई है। आयोग ने संकेत दिया है कि यदि किसी अभ्यर्थी का आधार लंबे समय से अपडेट नहीं है या उसके आधार में दर्ज विवरण और वर्तमान पहचान से संबंधित जानकारी में अंतर है तो परीक्षा केंद्र पर सत्यापन के दौरान परेशानी आ सकती है। इसलिए अभ्यर्थियों से परीक्षा में शामिल होने से पहले अपने दस्तावेज और आधार से संबंधित जानकारी की जांच कर लेने को कहा गया है।

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नई व्यवस्था में बायोमेट्रिक सत्यापन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। परीक्षा केंद्र पर दर्ज किए जाने वाले फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन का उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। यदि बायोमेट्रिक विवरण में विसंगति सामने आती है तो अभ्यर्थी की पहचान का सत्यापन प्रभावित हो सकता है। ऐसे मामलों में अभ्यर्थी को परीक्षा में शामिल होने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। आयोग ने अभ्यर्थियों को इस प्रक्रिया को गंभीरता से लेने की सलाह दी है।

परीक्षा में फर्जीवाड़े और दूसरे अभ्यर्थी की जगह किसी अन्य व्यक्ति के बैठने के मामलों को रोकना भर्ती परीक्षाओं के सामने लगातार एक महत्वपूर्ण चुनौती रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा एजेंसियां अब तकनीक आधारित पहचान प्रणाली पर जोर दे रही हैं। आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन के इस्तेमाल से परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी की पहचान की पुष्टि पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तरीके से करने का प्रयास किया जाएगा। आयोग का कहना है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनका आधार विवरण सही और अद्यतन है। खासतौर पर उन अभ्यर्थियों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होगी जिनके आधार में लंबे समय से कोई अपडेट नहीं हुआ है या जिनके बायोमेट्रिक विवरण में बदलाव की स्थिति बनी है।

आधार आधारित प्रमाणीकरण में पहचान की पुष्टि के लिए जनसांख्यिकीय अथवा बायोमेट्रिक जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है। UIDAI के अनुसार आधार प्रमाणीकरण में फिंगरप्रिंट या आइरिस जैसे बायोमेट्रिक विवरण के आधार पर पहचान सत्यापित की जा सकती है। UPSSSC की इस व्यवस्था का असर भविष्य में आयोग की ओर से आयोजित होने वाली विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में दिखाई दे सकता है।

आयोग की ओर से अपनाई जा रही यह व्यवस्था परीक्षा केंद्रों पर पहचान प्रक्रिया को अधिक तकनीकी बनाने की दिशा में कदम है। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। UPSSSC की प्रस्तावित आधार एवं बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के तौर पर देखी जा रही है।

 

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