अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाले कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में तैनाती के दौरान आठ आत्महत्या प्रयासों का खुलासा हुआ है। अमेरिकी नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ ने सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड को भेजे एक पत्र में यह जानकारी दी है। पत्र के मुताबिक, ये घटनाएं केवल विमानवाहक पोत के चालक दल तक सीमित नहीं थीं, बल्कि पूरे स्ट्राइक ग्रुप में शामिल अलग-अलग जहाजों, एयर विंग और अन्य नौसैनिक इकाइयों के कर्मियों से जुड़ी थीं। नौसेना के अनुसार, इस दौरान आत्महत्या से किसी नौसैनिक की मौत नहीं हुई।
यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब USS अब्राहम लिंकन की लंबे समय तक चली तैनाती को लेकर अमेरिकी नौसेना में मानसिक स्वास्थ्य और सैनिकों की परिस्थितियों पर सवाल उठ रहे थे। यह पोत ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान से जुड़ी तैनाती का हिस्सा रहा और करीब 286 दिनों तक लगातार समुद्र में रहा। इस दौरान बिना बंदरगाह पर रुके लंबे समय तक समुद्र में रहने का रिकॉर्ड भी बना। तैनाती नवंबर 2025 में शुरू हुई थी और बाद में इसे निर्धारित समय से आगे बढ़ाया गया।
काओ ने सीनेटर गिलिब्रैंड के सवालों के जवाब में बताया कि स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती शुरू होने के बाद कुल आठ आत्महत्या प्रयास सामने आए। इनमें मार्च में एक नौसैनिक के समुद्र में कूदने की कोशिश का मामला भी शामिल था। उसके साथियों ने समय रहते उसे रोक लिया। अगस्त में एक अन्य नौसैनिक समुद्र में कूद गया था। उसे रेस्क्यू हेलिकॉप्टर की मदद से बाहर निकाला गया और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। बाद में उसे जहाज से अलग कर आगे की देखभाल के लिए भेजा गया।
अमेरिकी नौसेना के इस खुलासे के बाद लंबे समय तक समुद्र में तैनाती के सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहस फिर तेज हो गई है। USS अब्राहम लिंकन पर करीब 5,000 कर्मी तैनात हैं, जबकि पूरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में लगभग 6,000 से 7,000 नौसैनिक शामिल रहे। लगातार कई महीनों तक समुद्र में रहने के कारण सैनिकों को परिवार से दूर रहना पड़ा और सामान्य तटीय अवकाश भी सीमित रहा। सितंबर की शुरुआत में जहाज ने थाईलैंड के पटाया के पास कुछ समय के लिए बंदरगाह पर ठहराव किया था। इसके बाद यह गुआम पहुंचा और अब अमेरिका लौटने की प्रक्रिया में है।
सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने पहले नौसेना से जहाज पर तैनात सैनिकों की मानसिक स्थिति, थकान, मनोबल और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर जानकारी मांगी थी। उनके सवालों के जवाब में नौसेना ने तैनाती के दौरान हुई घटनाओं का विवरण साझा किया। गिलिब्रैंड ने इन मामलों को लेकर सैनिकों की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि लंबे समय तक चलने वाली तैनाती का असर सैन्यकर्मियों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है।
नौसेना की ओर से हालांकि यह भी कहा गया है कि जहाज पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सहायता उपलब्ध थी। अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों की भावनात्मक और मानसिक जरूरतों के लिए मेडिकल स्टाफ, काउंसलर और चैपलिन मौजूद थे। कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ ने भी लंबे मिशन के दौरान नौसैनिकों की भूमिका और उनके प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उनकी जिम्मेदारियों को चुनौतीपूर्ण बताया।
इससे पहले अमेरिकी नौसेना ने USS लिंकन पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों की रिपोर्टों को लेकर कहा था कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर जहाज पर आत्महत्या संबंधी घटनाओं में कोई स्पष्ट बढ़ोतरी नहीं मिली थी। बाद में कार्यवाहक नौसेना सचिव के पत्र में पूरे स्ट्राइक ग्रुप में आठ आत्महत्या प्रयासों की पुष्टि हुई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आंकड़ा केवल विमानवाहक पोत के चालक दल तक सीमित नहीं था।
लंबी तैनाती के दौरान जहाज पर भोजन और अन्य आवश्यक सामान की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे थे। नौसेना ने कुछ आपूर्ति में देरी की बात स्वीकार की, लेकिन यह भी कहा कि सैनिकों को पर्याप्त और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया गया। अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक समुद्र में मिशन जारी रखने के लिए संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर कुछ अस्थायी बदलाव किए गए थे।
USS अब्राहम लिंकन की तैनाती ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों के बीच हुई। मिशन की अवधि बढ़ने और लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण जहाज के सैनिकों की स्थिति पर सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा होती रही। अब आठ आत्महत्या प्रयासों के आधिकारिक खुलासे के बाद अमेरिकी नौसेना के सामने सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य, लंबे मिशनों के प्रभाव और भविष्य की तैनाती के दौरान सहायता व्यवस्था को लेकर सवाल फिर सामने हैं।