नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने बिना पंजीकरण वाले कथित खतरनाक खरपतवारनाशक की बिक्री और विज्ञापन के मामले में तीन प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने अमेजन और फ्लिपकार्ट पर 10-10 लाख रुपये, जबकि जियोमार्ट पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
मामला ‘साइक्लोसिनोन हर्बिसाइड’ नाम के कृषि रसायन की ऑनलाइन बिक्री से जुड़ा है। सीसीपीए के अनुसार, यह उत्पाद संबंधित कानून के तहत पंजीकृत नहीं था और इसके बावजूद इसे ई-कॉमर्स मंचों पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा था।
सीसीपीए ने 22 सितंबर को जारी आदेश में तीनों कंपनियों को इस उत्पाद की बिक्री और विज्ञापन तत्काल बंद करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कंपनियों से अपने मंचों पर मौजूद ऐसे उत्पादों की पहचान करने और उनकी सूची हटाने के लिए आंतरिक जांच करने को कहा गया है।
प्राधिकरण ने ई-कॉमर्स कंपनियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे नियमित रूप से अपने मंचों का स्वयं परीक्षण करें, ताकि ऐसे उत्पादों की बिक्री या सूचीबद्धता रोकी जा सके जो मौजूदा कानूनों का उल्लंघन करते हैं या उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
तीनों कंपनियों को आदेश के 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है।
इस मामले की जांच केंद्रीय कृषि मंत्रालय से सीसीपीए को मिली शिकायत के बाद शुरू हुई। यह शिकायत मूल रूप से क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीसीएफआई) की ओर से दर्ज कराई गई थी।
जांच के दौरान कृषि मंत्रालय ने सीसीपीए को बताया कि ‘साइक्लोसिनोन’ नाम का कोई रसायन कीटनाशक अधिनियम, 1968 की अनुसूची में सूचीबद्ध नहीं है।
इसके चलते नियामक के सामने यह सवाल उठा कि संबंधित कृषि रसायन को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत पंजीकरण, सुरक्षा, प्रभावशीलता और गुणवत्ता संबंधी जांच के बिना किस तरह ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया।
सीसीपीए की कार्रवाई में ई-कॉमर्स मंचों की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया है। प्राधिकरण ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने मंचों पर बिकने वाले उत्पादों की निगरानी मजबूत करें और ऐसे सामान की बिक्री रोकें जो कानून के अनुरूप न हों या उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हों।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच नियामक संस्थाएं ई-कॉमर्स मंचों पर उपलब्ध उत्पादों की वैधता और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन पर निगरानी बढ़ा रही हैं।