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सूरत अग्निकांड: 10 हजार के वेतन विवाद में 24 करोड़ स्वाहा!

सूरत के टेक्सटाइल मार्केट में भीषण आग से 17 दुकानें प्रभावित होने का दावा, पूर्व कर्मचारी पर आग लगाने का आरोप; करोड़ों का कपड़ा और अन्य सामान जलकर खाक।

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  • September 27, 2026 7:42 pm IST, Published 2 hours ago

सूरत, गुजरात। गुजरात के प्रमुख कपड़ा व्यापार केंद्र सूरत से आगजनी की एक गंभीर घटना सामने आई है। श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में 9 सितंबर को लगी भीषण आग ने कई कपड़ा कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया। सामने आई जानकारी के अनुसार, महज 10 हजार रुपये के कथित बकाया वेतन को लेकर उपजे विवाद के बाद एक पूर्व कर्मचारी ने अपने पूर्व नियोक्ता की दुकान के बाहर आग लगा दी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास की दुकानों तक फैल गई।

इस घटना में 17 दुकानों का सामान जलने और लगभग 24 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक राशि और आग लगने के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

पुलिस जांच में सामने आई आगजनी की साजिश

इस अग्निकांड की जांच में सूरत क्राइम ब्रांच को महत्वपूर्ण सुराग मिले। पुलिस के अनुसार, आग किसी तकनीकी खराबी या सामान्य दुर्घटना के कारण नहीं लगी थी, बल्कि इसे जानबूझकर लगाया गया था। मामले में महाराष्ट्र के धुले निवासी 33 वर्षीय विनोद पंडित सावले को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस का आरोप है कि विनोद पहले इसी मार्केट में कपड़ा कारोबारी हनुमान प्रसाद जावर की दुकान पर अकाउंटेंट के रूप में काम करता था। नौकरी छोड़ने के बाद बकाया वेतन को लेकर उसका विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते उसने कथित तौर पर आगजनी की योजना बनाई।

30 हजार मासिक वेतन, विवाद केवल 10 हजार रुपये का

पुलिस जांच के अनुसार, विनोद ने अप्रैल 2026 में अकाउंटेंट के रूप में काम शुरू किया था। उसे प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये वेतन मिलता था। कुछ समय बाद उसने नौकरी छोड़ दी। आरोपी का दावा है कि नौकरी के दौरान उसके काम पर बार-बार सवाल उठाए जाते थे और उसे अपमानित किया जाता था।

उसके मुताबिक, नौकरी छोड़ते समय उसके वेतन के 10 हजार रुपये बकाया रह गए थे। रकम नहीं मिलने से वह नाराज था। हालांकि, वेतन और कार्यस्थल पर कथित उत्पीड़न से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पेट्रोल खरीदकर कपड़ों के पार्सल में लगाई आग

जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी ने 8 सितंबर को एक पेट्रोल पंप से पेट्रोल खरीदा। इसके बाद वह रात के समय अपने पूर्व नियोक्ता की दुकान के पास पहुंचा।

पुलिस का आरोप है कि उसने दुकान के बाहर रखे कपड़ों के पार्सल पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी और मौके से फरार हो गया। कपड़े अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। कुछ ही समय में आसपास की दुकानों में रखा सामान भी इसकी चपेट में आ गया।

अग्निशमन विभाग को आग बुझाने के लिए लंबी मशक्कत करनी पड़ी। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, आग पर काबू पाने में लगभग 14 घंटे लगे।

चार कारोबारियों को लगभग 24 करोड़ का नुकसान

अग्निकांड ने उन व्यापारियों को भी प्रभावित किया जिनका आरोपी और उसके पूर्व नियोक्ता के बीच चल रहे विवाद से कोई संबंध नहीं था।

प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट की 17 दुकानों में रखा सामान आग से प्रभावित हुआ। चार कपड़ा कारोबारियों ने कुल लगभग 24 करोड़ रुपये के नुकसान की जानकारी दी।

हनुमान प्रसाद जावर को लगभग छह करोड़, अभिषेक सोनी को दो करोड़, अनुराग जालान को 12 करोड़ और हरिप्रसाद जावर को चार करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है। अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में प्रभावित दुकानों की संख्या 14 से 17 बताई गई है।

सीसीटीवी फुटेज से आरोपी तक पहुंची क्राइम ब्रांच

घटना के बाद पुलिस ने मार्केट और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली। तकनीकी जांच और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारियों के आधार पर संदिग्ध की पहचान की गई।

पुलिस के मुताबिक, जांच में अपना नाम सामने आने की जानकारी मिलने के बाद आरोपी ने मोबाइल फोन बंद कर दिया और सूरत छोड़कर फरार हो गया।

वह राजस्थान के खाटूश्याम मंदिर और उत्तर प्रदेश के अयोध्या सहित विभिन्न स्थानों पर गया। करीब 12 दिन बाद सूरत लौटने पर क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।

व्यापारियों के सामने आर्थिक नुकसान के साथ सुरक्षा की चुनौती

सूरत देश के प्रमुख कपड़ा उत्पादन और व्यापार केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में व्यापारी कपड़ों का थोक कारोबार करते हैं। त्योहारों के मौसम से पहले व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बड़ी मात्रा में माल जमा रहता है।

ऐसे समय में आग लगने से न केवल दुकानों में रखा सामान नष्ट होता है, बल्कि व्यापारियों की आपूर्ति व्यवस्था और ग्राहकों के ऑर्डर भी प्रभावित हो सकते हैं।

इस घटना के बाद मार्केट में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा संबंधी खामियों के कारण परिसर बंद किए जाने से अन्य व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हुआ।

वेतन विवाद और कार्यस्थल पर संवाद का सवाल

यह घटना कार्यस्थल पर उत्पन्न विवादों के समाधान और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के महत्व को भी सामने लाती है।

कर्मचारियों के वेतन संबंधी विवादों का समय पर निपटारा, शिकायतों की उचित सुनवाई और कर्मचारियों तथा नियोक्ताओं के बीच संवाद ऐसी परिस्थितियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वहीं, व्यापारिक परिसरों में सीसीटीवी निगरानी, अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच और ज्वलनशील सामग्री के सुरक्षित भंडारण पर ध्यान देना आवश्यक है।

सूरत के इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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