प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछली रात से सुबह 10 बजे तक ही 15 हजार से अधिक यात्री ट्रेनों के जरिए अपने गृह नगरों के लिए रवाना हो चुके थे। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में बड़ी संख्या उन मजदूरों की है, जो सूरत के कपड़ा और हीरा उद्योग में काम करते हैं। ये लोग दिवाली और छठ पूजा पर अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए कई दिनों की यात्रा करने को तैयार हैं। घर पहुंचने की जल्दबाजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई यात्री ट्रेन के निर्धारित समय से पांच से दस घंटे पहले ही स्टेशन पहुंच रहे हैं। लंबी दूरी की यात्रा के लिए सामान लेकर पहुंचे परिवारों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इस भीड़ में महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। कई यात्रियों को पर्याप्त जगह नहीं मिलने के कारण खड़े रहकर या जमीन पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है।
रेलवे प्रशासन ने त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं। जानकारी के मुताबिक, कुल 10 ट्रेनों के संचालन की योजना बनाई गई है। इनमें तीन नियमित ट्रेनें और सात फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। इनमें से पांच ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार के यात्रियों को लेकर रवाना हो चुकी हैं। अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन का उद्देश्य यात्रियों की भीड़ को कम करना और उन्हें सुरक्षित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाना है।
स्टेशन परिसर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करने, प्लेटफॉर्म पर व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। रेलवे प्रशासन की कोशिश है कि त्योहारों के दौरान यात्रियों को किसी तरह की बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े।
सूरत से अपने घर लौटने वाले श्रमिकों की संख्या इस बार काफी अधिक बताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर से अब तक सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों से चार लाख से ज्यादा यात्री अपने गृह राज्यों के लिए रवाना हो चुके हैं। अनुमान है कि वाघ बारस, ग्यारस और छठ पूजा तक दो से तीन लाख अतिरिक्त श्रमिक सूरत छोड़ सकते हैं। इससे आने वाले दिनों में रेलवे स्टेशनों पर भीड़ और बढ़ने की संभावना है।
प्रवासी मजदूरों के इस बड़े पलायन का असर सूरत के औद्योगिक कारोबार पर भी दिखाई देगा। शहर का कपड़ा उद्योग और हीरा कारोबार काफी हद तक दूसरे राज्यों से आए श्रमिकों पर निर्भर है। दिवाली और छठ के मौके पर बड़ी संख्या में मजदूरों के अपने गांव लौटने से अगले एक सप्ताह तक कई औद्योगिक इकाइयों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ने और कामगारों की कमी के कारण गतिविधियां सीमित होने की आशंका है। कुल मिलाकर सूरत में त्योहारों का असर अब कारोबार से लेकर रेलवे व्यवस्था तक दिखाई देने लगा है। एक तरफ प्रवासी श्रमिक अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए उत्साहित हैं, तो दूसरी तरफ रेलवे प्रशासन के सामने भारी भीड़ को सुरक्षित तरीके से संभालने की चुनौती है।